राज्य कृषि समाचार (State News)

शेडनेट हाउस में फूलों की खेती कर किसान ने बदली किस्मत, 15 हजार लगाकर कमाए 50 हजार

18 मई 2026, भोपाल: शेडनेट हाउस में फूलों की खेती कर किसान ने बदली किस्मत, 15 हजार लगाकर कमाए 50 हजार – आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं का सही लाभ उठाकर किसान कैसे अपनी किस्मत बदल सकते हैं, इसकी मिसाल पेश की है छतरपुर विकासखण्ड के ग्राम सरानी के एक प्रगतिशील किसान ने। कलेक्टर पार्थ जैसवाल के निर्देशन में उद्यानिकी विभाग की अनुदान योजना का लाभ उठाकर ग्राम सरानी के कृषक मोहन लाल कुशवाहा पिता प्रभुदयाल कुशवाहा ने अपने शेडनेट हाउस में लीक से हटकर खेती की और महज एक सीजन में बंपर कमाई कर दिखाई है।

पारंपरिक फसलों के साथ फूलों का डबल डोज

 किसान मोहन लाल ने उद्यानिकी विभाग से अनुदान प्राप्त कर अपने खेत में शेडनेट हाउस का निर्माण करवाया था। शुरुआत में उन्होंने इसमें खीरा, टमाटर, मिर्च और बैंगन जैसी सब्जियों का बेहतरीन उत्पादन कर अच्छी आय प्राप्त की। लेकिन उनकी सूझबूझ का असली रंग तब दिखा जब उन्होंने शेडनेट हाउस के खाली बचे हिस्से का भी सही इस्तेमाल करने की सोची।

15 हजार की लागत कमाए 50 हजार रुपए

 नवंबर के महीने में मोहन लाल ने शेडनेट हाउस की बची हुई जगह पर 3,000 गेलार्डिया फूलों के पौधे रोपे। इस पूरी प्रक्रिया में उनका लगभग 15 हजार रुपये का खर्च आया।

 कृषक मोहन लाल कुशवाहा अब फूलों की खेती को और बढ़ाएंगे। उन्होंने बताया कि पौधे लगाने के ठीक दो महीने बाद फूल आने लगे। चूंकि उस समय शादियों का सीजन चल रहा था, इसलिए बाजार में फूलों की डिमांड बहुत ज्यादा थी। मुझे बाजार में 20 से 30 रुपये प्रति किलो का भाव मिला। दो महीने तक लगातार फूलों की तुड़ाई हुई, जिससे कुल 50,000 रुपये की कमाई हुई। सारा खर्चा निकालकर मुझे 35,000 रुपये का शुद्ध मुनाफा मिला है।”

कम समय और कम लागत में मिले इस शानदार मुनाफे से किसान मोहन लाल के हौसले बुलंद हैं। उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए बताया कि उद्यानिकी विभाग और प्रशासन के सहयोग से उन्हें यह सफलता मिली है। अब वे भविष्य में फूलों की खेती का रकबा और अधिक बढ़ाने की योजना बना रहे हैं, ताकि उनकी आय में और इजाफा हो सके।

प्रशासन का मानना है कि मोहन लाल की यह सफलता क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बनेगी, जिससे वे पारंपरिक खेती के साथ-साथ उद्यानिकी और फूलों की खेती (फ्लोरीकल्चर) की ओर कदम बढ़ाएंगे।

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