ग्राफ्टेड बैंगन की खेती से किसान हुआ मालामाल, सिर्फ 0.40 हेक्टेयर में कमाया 3 लाख रुपए का मुनाफा
22 जुलाई 2026, रायपुर: ग्राफ्टेड बैंगन की खेती से किसान हुआ मालामाल, सिर्फ 0.40 हेक्टेयर में कमाया 3 लाख रुपए का मुनाफा – छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के सरायपाली विकासखंड के ग्राम पंडरीपानी के किसान सीताराम पटेल ने आधुनिक खेती अपनाकर मिसाल पेश की है। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत उन्होंने 0.40 हेक्टेयर क्षेत्र में ग्राफ्टेड बैंगन की खेती शुरू की और पारंपरिक धान की खेती की तुलना में कई गुना अधिक आय हासिल की। उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से उन्हें लगभग 3 लाख रुपये का मुनाफा हुआ है।
धान की जगह अपनाई ग्राफ्टेड बैंगन की खेती
किसान सीताराम पटेल ने बताया कि पहले वे पारंपरिक तरीके से धान की खेती करते थे। धान की खेती में मजदूरी, खाद और कीटनाशकों पर अधिक खर्च होने के बावजूद अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा था। बेहतर आय की तलाश में उन्होंने उद्यानिकी विभाग से संपर्क किया। विभाग के मार्गदर्शन में वर्ष 2025-26 में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत 0.40 हेक्टेयर क्षेत्र में ग्राफ्टेड बैंगन की खेती शुरू की।
ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग से बढ़ा उत्पादन
खेती में उन्होंने ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया। इससे पानी की बचत हुई, खरपतवार नियंत्रण आसान हुआ और पौधों की बेहतर वृद्धि के कारण उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। जहां पहले धान की फसल से लगभग 18 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन मिलता था, वहीं ग्राफ्टेड बैंगन से करीब 300 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन प्राप्त हुआ।
सरकार से मिला 30 हजार रुपये का अनुदान
इस नवाचार को बढ़ावा देने के लिए उद्यानिकी विभाग ने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत किसान को 30 हजार रुपये की अनुदान राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके बैंक खाते में प्रदान की।
सीताराम पटेल ने अपने बैंगन का विक्रय सरायपाली और ओडिशा की मंडियों में किया, जहां उन्हें लगभग 31 रुपये प्रति किलोग्राम का मूल्य मिला। इस खेती में प्रति एकड़ करीब 18 हजार रुपये इनपुट लागत, 7 हजार रुपये श्रमिक लागत तथा अन्य खर्चों सहित कुल लागत लगभग 30,800 रुपये आई। इसके बावजूद उन्हें करीब 3 लाख रुपये का लाभ प्राप्त हुआ, जो पारंपरिक खेती की तुलना में कई गुना अधिक है।
अन्य किसानों के लिए बने प्रेरणा
सीताराम पटेल की सफलता से ग्राम पंडरीपानी सहित आसपास के क्षेत्रों के किसान भी उद्यानिकी फसलों और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। उद्यानिकी विभाग का मानना है कि आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक खेती अपनाकर किसान सीमित क्षेत्र में भी बेहतर उत्पादन और अधिक आय प्राप्त कर सकते हैं।
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