अदरक की खेती से किसान हुआ मालामाल, पौन एकड़ से कमाया ₹4.5 लाख का मुनाफा; अब बढ़ाया रकबा
10 अगस्त 2026, रायपुर: अदरक की खेती से किसान हुआ मालामाल, पौन एकड़ से कमाया ₹4.5 लाख का मुनाफा; अब बढ़ाया रकबा – छत्तीसगढ़ में किसानों को पारंपरिक धान की खेती के साथ फसल विविधीकरण अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसका असर अब किसानों के खेतों में भी दिखाई देने लगा है। सरगुजा जिले के ग्राम दरिमा निवासी किसान संतोष कुमार सिंह ने अदरक की खेती से बेहतर कमाई कर फसल विविधीकरण की मिसाल पेश की है। उन्होंने पिछले वर्ष करीब पौन एकड़ जमीन में अदरक की खेती कर लगभग 4.5 लाख रुपये का शुद्ध लाभ कमाया।
अदरक की गुणवत्तापूर्ण उपज का बाजार में बेहतर भाव मिलने से किसान को उम्मीद से अधिक आमदनी हुई। पिछले वर्ष अदरक का बाजार भाव करीब 150 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंचा था। इस आमदनी से संतोष कुमार सिंह ने अपने घर का ढलाई सहित निर्माण कार्य कराया। खेती से हुई अतिरिक्त आय ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के साथ जीवन स्तर में भी सुधार किया।
धान से ज्यादा लाभकारी लगी अदरक की खेती
किसान संतोष कुमार सिंह के मुताबिक, धान की तुलना में अदरक की खेती उनके लिए अधिक लाभकारी साबित हुई। पिछले वर्ष उन्हें करीब 30 से 35 क्विंटल अदरक का उत्पादन मिला। सीमित भूमि में बेहतर आमदनी होने से उनका खेती के प्रति उत्साह बढ़ा। इसी सफलता से प्रेरित होकर उन्होंने इस वर्ष अदरक की खेती का रकबा बढ़ाकर करीब एक एकड़ कर दिया है। उनका कहना है कि बाजार की मांग और सही तकनीक के साथ अदरक जैसी नगदी फसल किसानों को कम जमीन में भी बेहतर आमदनी दे सकती है।
कृषक उन्नति योजना से मिल रहा प्रोत्साहन
किसान ने बताया कि राज्य सरकार किसानों को लाभकारी फसलों की ओर प्रोत्साहित करने के लिए कृषक उन्नति योजना के तहत प्रति एकड़ 15 हजार रुपये तक का अनुदान उपलब्ध करा रही है। इससे किसानों को फसल विविधीकरण अपनाने में आर्थिक मदद मिल रही है। संतोष कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और राज्य सरकार के प्रति आभार जताते हुए कहा कि शासन के प्रोत्साहन से किसानों का रुझान पारंपरिक खेती के साथ अधिक लाभ देने वाली फसलों की ओर बढ़ रहा है।
बाजार में मिला बेहतर भाव, बढ़ा भरोसा
संतोष कुमार सिंह ने बताया कि अदरक की बिक्री के दौरान उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं हुई। गुणवत्तापूर्ण उपज का बाजार में उचित मूल्य मिलने से उन्हें अपनी मेहनत का बेहतर प्रतिफल मिला। उन्होंने कहा कि यदि किसान वैज्ञानिक तकनीक, बाजार की मांग और उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखकर खेती करें, तो अदरक जैसी नगदी फसल कम भूमि में भी आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकती है।
मल्चिंग से बेहतर उत्पादन
अदरक की खेती की तकनीक के बारे में किसान ने बताया कि मार्च-अप्रैल में खेत की अच्छी तरह जुताई कर आवश्यक खाद और पोषक तत्वों का इस्तेमाल किया जाता है। इसके बाद मेड़ों पर अदरक की बुवाई की जाती है और खेत में पैराव यानी मल्चिंग की जाती है। मल्चिंग से मिट्टी में नमी बनाए रखने, खरपतवार की वृद्धि नियंत्रित करने और फसल के बेहतर विकास में मदद मिलती है। वैज्ञानिक पद्धति अपनाने से गुणवत्तापूर्ण उत्पादन हासिल किया जा सकता है।
किसानों से फसल विविधीकरण अपनाने की अपील
संतोष कुमार सिंह ने अन्य किसानों से भी धान के साथ अदरक, टमाटर, मिर्च, धनिया और अरहर जैसी लाभकारी फसलों की खेती अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि फसल विविधीकरण से एक ही फसल पर निर्भरता कम होती है और खेती के जोखिम भी घटते हैं। बाजार की मांग के अनुसार नगदी और उद्यानिकी फसलों को अपनाकर किसान कम भूमि में भी बेहतर आमदनी हासिल कर सकते हैं। शासन की योजनाओं और आधुनिक कृषि तकनीकों का लाभ लेकर खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।
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