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राज्य कृषि समाचार (State News)

पारंपरिक धान छोड़ करेले की उन्नत खेती से किसान ने दोगुनी की आमदनी

06 सितंबर 2026, महासमुंद (छत्तीसगढ़): पारंपरिक धान छोड़ करेले की उन्नत खेती से किसान ने दोगुनी की आमदनी – छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बागबाहरा विकासखंड स्थित ग्राम टेंगराही के किसान नारायण प्रसाद वर्मा ने परंपरागत धान की खेती छोड़कर करेले की उन्नत खेती अपनाई और अपनी आमदनी को दोगुना कर लिया। महज एक हेक्टेयर जमीन से वे अब हर साल एक लाख रुपये से ज्यादा का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं।पहले नारायण प्रसाद पारंपरिक तरीके से धान की खेती करते थे, जिससे उन्हें सीमित आमदनी ही मिल पाती थी। राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत सब्जी क्षेत्र विस्तार योजना की जानकारी मिलने पर उन्होंने करेले की व्यावसायिक खेती की ओर रुख किया।

ड्रिप सिंचाई और मचान विधि से बदली तस्वीर

नारायण प्रसाद ने अपने खेत में ड्रिप सिंचाई प्रणाली लगाई, जिससे पानी की बचत हुई और पौधों को जरूरत के मुताबिक ही नमी मिलती रही। खेत में प्लास्टिक मल्चिंग बिछाई गई, जिससे खरपतवार कम उगे और मिट्टी की नमी बनी रही।करेले की बेल को जमीन पर फैलने देने के बजाय उन्होंने मचान विधि अपनाई, जिसमें बांस और तार की मदद से बेलों को ऊपर चढ़ाया जाता है। इससे फल जमीन के संपर्क में नहीं आते, सड़न कम होती है और तुड़ाई भी आसान हो जाती है।मचान विधि से हवा और धूप पौधों तक बेहतर तरीके से पहुंचती है, जिससे फफूंद जनित रोगों का खतरा भी कम हो जाता है। इससे फल का आकार और रंग भी बेहतर आता है, जिसका सीधा फायदा मंडी में मिलने वाले भाव पर पड़ता है।

सरकारी अनुदान से मिली मदद, उत्पादन भी बढ़ा

इस पूरे बदलाव में सरकारी योजनाओं से भी नारायण प्रसाद को मदद मिली। सब्जी क्षेत्र विस्तार योजना के तहत उन्हें 24,000 रुपये का अनुदान मिला, वहीं मचान बनाने के लिए डीबीटी के जरिए 5,000 रुपये की अतिरिक्त सहायता दी गई।नई तकनीक अपनाने के बाद उनके खेत से प्रति एकड़ करीब 12 टन करेले का उत्पादन हो रहा है। उन्नत खेती अपनाने के बाद प्रति एकड़ शुद्ध मुनाफा 1,07,000 रुपये तक पहुंच गया है, जो धान की खेती के मुकाबले कई गुना ज्यादा है।स्थानीय सब्जी मंडी में करेले की मांग साल भर बनी रहती है, जिससे नारायण प्रसाद को हर तुड़ाई के साथ नकद आमदनी मिलती रहती है। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इलाके के अन्य किसानों को भी इस मॉडल की जानकारी दी जा रही है, ताकि सिंचित क्षेत्रों में धान के बदले सब्जी की उन्नत खेती को बढ़ावा मिल सके।विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि फसल बदलने से पहले किसान अपने इलाके की मिट्टी, सिंचाई सुविधा और नजदीकी मंडी में मांग की जानकारी जरूर ले लें, ताकि उत्पादन बेचने में दिक्कत न आए।नारायण प्रसाद ने अपने खेत में करेले की उन्नत हाइब्रिड किस्म का इस्तेमाल किया, जिसमें फल जल्दी आने लगते हैं और तुड़ाई लंबे समय तक चलती रहती है। इससे उन्हें बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद लगातार कई महीनों तक आमदनी होती रही, जबकि धान से साल में सिर्फ एक बार ही कमाई हो पाती थी।कृषि विभाग अब जिले के अन्य छोटे और सीमांत किसानों को भी समूह में जोड़कर करेले जैसी सब्जियों की खेती और मंडी तक पहुंच को आसान बनाने पर काम कर रहा है, ताकि उपज बेचने में बिचौलियों पर निर्भरता कम हो सके।

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