किसान अलर्ट: मूंग में माहू, जैसिड और फल मक्खी का बढ़ा प्रकोप, वैज्ञानिकों जारी की एडवाइजरी
15 अप्रैल 2026, भोपाल: किसान अलर्ट: मूंग में माहू, जैसिड और फल मक्खी का बढ़ा प्रकोप, वैज्ञानिकों जारी की एडवाइजरी – मध्यप्रदेश में मूंग की फसल में इस समय रस चूसक कीटों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार खेतों में माहू , जैसिड, थ्रिप्स और फल मक्खी का असर देखा जा रहा है, जिससे फसल की बढ़वार और उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसे देखते हुए किसानों को समय पर नियंत्रण उपाय अपनाने की सलाह दी गई है।
रस चूसक कीटों से फसल को नुकसान
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार माहू कीट नए पौधों, पत्तियों, फलियों और फूलों पर समूह में रहकर रस चूसते हैं। इससे पत्तियां सिकुड़ जाती हैं और पौधे कमजोर हो जाते हैं। यह कीट मधु स्राव छोड़ता है, जिससे पत्तियों पर काली फफूंद विकसित हो जाती है।
जैसिड पत्तियों की निचली सतह से रस चूसता है, जिससे पत्तियों के किनारे पीले पड़ने लगते हैं। थ्रिप्स पत्तियों, फूलों और फलियों को नुकसान पहुंचाकर पौधों की वृद्धि रोक देती है। वहीं, सफेद मक्खी फसल की शुरुआती अवस्था में अधिक सक्रिय रहती है और यह पीला मोजेक वायरस फैलाने में प्रमुख भूमिका निभाती है, जिससे फसल को गंभीर क्षति हो सकती है।
कीट नियंत्रण के लिए वैज्ञानिकों की सलाह
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि रस चूसक कीटों के नियंत्रण के लिए किसी एक अनुशंसित कीटनाशक का उपयोग किया जाए। इनमें थायोमिथाक्साम 25 डब्ल्यू.जी., एसिटामिप्रिड 20 एस.पी., थायोमिथाक्साम + लेम्डासायलोथ्रिन (125 ग्राम प्रति हेक्टेयर) या फिप्रोनिल + इमिडाक्लोप्रिड (150 ग्राम प्रति हेक्टेयर) में से किसी एक का छिड़काव किया जा सकता है।
वैज्ञानिकों ने यह भी सलाह दी है कि अगली बार छिड़काव करते समय दवा को बदलकर उपयोग किया जाए, ताकि कीटों में प्रतिरोध क्षमता विकसित न हो सके।
चने की इल्ली और मारूका इल्ली से भी खतरा
मूंग के साथ-साथ चने की इल्ली और मारूका इल्ली भी फसल को नुकसान पहुंचा सकती हैं। ये कीट कलिकाओं, फूलों और फलियों में छेद करके उत्पादन को प्रभावित करते हैं। शुरुआती अवस्था में नियंत्रण के लिए इंडोक्साकार्ब (350 मिली प्रति हेक्टेयर) या क्लोरेंट्रानिलीप्रोल (150 मिली प्रति हेक्टेयर) के छिड़काव की सलाह दी गई है।
बाद की अवस्था में नियंत्रण के लिए नोवाल्यूरॉन + इंडोक्साकार्ब (850 मिली), क्लोरेंट्रानिलीप्रोल + लेम्डासायलोथ्रिन (200 मिली) या इमामेक्टिन + लूफेन्यूरॉन (75 ग्राम प्रति हेक्टेयर) में से किसी एक का उपयोग किया जा सकता है।
खरपतवार नियंत्रण पर भी जोर
कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि मूंग की फसल में बुवाई के 15–20 दिन बाद खरपतवार नियंत्रण आवश्यक है। इसके लिए किसान इमेजेथापायर (1 लीटर), प्रोपाक्विजाफॉप + इमेजेथापायर (2 लीटर), इमेजेथापायर + इमाजामॉक्स (100 मिली) या सोडियम एसिफ्लोरफेन + क्लोडिनोफॉप (1 लीटर प्रति हेक्टेयर) में से किसी एक दवा का उपयोग कर सकते हैं।
छिड़काव सुबह 10 बजे से पहले या शाम 4 बजे के बाद करने की सलाह दी गई है, ताकि अधिक प्रभावी परिणाम मिल सके और फसल को नुकसान न हो।
किसानों को सावधानी की सलाह
विशेषज्ञों ने कहा है कि कीटनाशक या खरपतवारनाशक का उपयोग निर्धारित मात्रा और समय के अनुसार ही करें। गलत तरीके से छिड़काव करने पर फसल को नुकसान हो सकता है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे कृषि विशेषज्ञों की निगरानी में ही दवाओं का उपयोग करें।
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