राज्य कृषि समाचार (State News)

जबलपुर जिले में सुगंधित धान का रकबा बढ़ाने के प्रयास

Share

06 जुलाई 2024, जबलपुर: जबलपुर जिले में सुगंधित धान का रकबा बढ़ाने के प्रयास – जबलपुर जिले में लगभग सात इंच से अधिक वर्षा हो चुकी है और किसानों ने अपनी खेती का काम तेज कर दिया है। जिले में धान का रकबा 1.75 लाख हेक्टेयर है । इस बार जिले में जहाँ सुगंधित धान का रकबा बढ़ाने के प्रयास किये जा रहे हैं, वहीं डी एस आर विधि से बोनी के लिये भी किसानों को प्रेरित किया जा रहा है। यह जानकारी परियोजना संचालक आत्मा डॉ एस के निगम ने दी।

डॉ. निगम के मुताबिक पिछले खरीफ सीजन में जिले में लगभग 30 हजार हेक्टेयर में बासमती धान बोई गई थी। उन्होंने बताया कि सुगंधित धान की बुआई का रकबा  बढ़ाने  के प्रयासों की कड़ी में गुरुवार को अनुविभागीय कृषि अधिकारी कृषि पाटन डॉ इंदिरा त्रिपाठी एवं वरिष्ठ कृषि अधिकारी पाटन श्री श्रीकांत यादव की उपस्थिति में ग्राम लुहारी के कृषक श्री  देवी सिंह पटेल के खेत में सुगंधित धान की किस्म पूसा बासमती-1 की रोपाई के काम की शुरुआत करवाई गई ।

इस अवसर पर मौजूद किसानों से कृषि अधिकारियों ने धान की सुगंधित किस्मों को अपनाने का आग्रह किया गया । किसानों को बताया गया कि सुगंधित धान की खरीदी सीधे व्यापारियों द्वारा अधिक रेट पर की जाती है । इससे जहाँ उनकी आय बढ़ेगी, वहीं सरकारी खरीदी पर निर्भरता भी खत्म हो जायेगी । सुगंधित धान की रोपाई के मौके पर किसानों को डीआरएस विधि से धान बोनी करने की सलाह भी दी गई । किसानों को बताया गया कि इस विधि से समय, श्रम और पानी की बचत के साथ लागत में भी कमी आती है । डीआरएस पर्यावरण के अनुकूल होती है, साथ ही इससे मिट्टी की  संरचना में भी सुधार होता है । किसान श्री देवी सिंह पटेल के खेत  में  सुगंधित धान की रोपाई के मौके पर किसान कृषि विस्तार अधिकारी श्री जे पी त्रिपाठी, सीमा राउत, अंकिता गुप्ता, इशिता श्रीवास्तव, देवानंद सिंह भी उपस्थित  थे।

(कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें)

(नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़,  टेलीग्रामव्हाट्सएप्प)

कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें:

www.krishakjagat.org/kj_epaper/

कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें:

www.en.krishakjagat.org

Share
Advertisements