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राज्य कृषि समाचार (State News)

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के क्रियान्वयन में डिंडोरी जिला देश में प्रथम

23 अगस्त 2026, डिंडोरी: प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के क्रियान्वयन में डिंडोरी जिला देश में प्रथम – कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया के निर्देशन एवं उप संचालक कृषि श्री संजय दोषी के मार्गदर्शन में जिले में प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। योजना के तहत कृषि, मिलेट उत्पादन, प्राकृतिक एवं जैविक खेती, कृषि मशीनीकरण, पशुपालन, सिंचाई तथा जल संरक्षण सहित विभिन्न क्षेत्रों में विभागीय योजनाओं का समन्वित रूप से संचालन किया जा रहा है। इन्हीं प्रयासों के परिणामस्वरूप डिंडौरी जिले ने देश के 100 चयनित जिलों में जुलाई माह के मध्य प्रथम रैंक हासिल की है। यह उपलब्धि जिले में 11 विभागों द्वारा संचालित 36 योजनाओं के प्रभावी समन्वय, बेहतर क्रियान्वयन तथा योजनाओं का लाभ किसानों तक पहुंचाने के लिए किए जा रहे सतत प्रयासों का परिणाम है। योजना के माध्यम से कृषि उत्पादकता बढ़ाने, किसानों की आय में वृद्धि, सिंचाई एवं कृषि अधोसंरचना को मजबूत करने तथा आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

कृषि एवं मिलेट उत्पादन को मिल रहा प्रोत्साहन – डिंडोरी जिले की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि, वनोपज और ग्रामीण आजीविका पर आधारित है। जिले में प्राकृतिक एवं जैविक खेती के साथ श्रीअन्न (मिलेट्स) के उत्पादन को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। जिले में 34 हजार 700 हेक्टेयर क्षेत्र में कोदो-कुटकी की खेती की जा रही है, जिससे 52 हजार 282 कृषक परिवार तथा 14 कृषक उत्पादक संगठन सीधे जुड़े हैं। जिले के पारंपरिक कोदो-कुटकी उत्पादों को जीआई टैग प्राप्त होने से इन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।

रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना के तहत 5 हजार 36 किसानों से 3 हजार क्विंटल कोदो-कुटकी की उपार्जन एवं खरीदी पूर्ण की जा चुकी है। वर्तमान वर्ष में 10 हजार क्विंटल खरीदी का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्राकृतिक एवं जैविक खेती के विस्तार के लिए जिले में 33 जैव संसाधन केंद्रों का निर्माण किया गया है। इनके माध्यम से 67 हजार 155 लीटर वर्मी वॉश, जीवामृत एवं आग्नेयास्त्र का उत्पादन कर 390 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में उपयोग किया गया है। जिले के 15 हजार 928 किसानों ने प्राकृतिक खेती अपनाई है, जबकि 8 हजार 400 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र का जैविक प्रमाणीकरण पूर्ण किया जा चुका है।

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आधुनिक कृषि यंत्रों से बढ़ा कृषि मशीनीकरण – कृषि मशीनीकरण के क्षेत्र में हैप्पी सीडर एवं सुपर सीडर जैसे आधुनिक कृषि यंत्रों के माध्यम से 38 हजार 518 हेक्टेयर क्षेत्र में मशीनीकरण किया गया है। किसानों को 305 उन्नत कृषि यंत्र वितरित किए गए हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 में जुलाई माह तक प्राकृतिक एवं जैविक कृषि विकास योजना के तहत 6 हजार 364 कृषकों का पंजीयन किया गया। एफपीओ सुदृढ़ीकरण के अंतर्गत 4 हजार 615 नवीन कृषकों की लिंकिंग, 5 हजार 100 हेक्टेयर क्षेत्र में वर्षा जल संरक्षण अधोसंरचनाओं का निर्माण तथा 678 हेक्टेयर में सूक्ष्म सिंचाई कृषि यंत्रों का उपयोग सुनिश्चित किया गया है।

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इसके साथ ही दलहन एवं तिलहन क्षेत्र के विस्तार, किसान क्रेडिट कार्ड का लाभ, फसल बीमा, प्राकृतिक खेती तथा कृषि विज्ञान केंद्र एवं एनआरएलएम के माध्यम से कृषकों को प्रशिक्षण जैसी गतिविधियां भी संचालित की जा रही हैं। कृषि उत्पादकता बढ़ाने और किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए विभागों के बीच समन्वित रूप से कार्य किया जा रहा है।

पशुपालन एवं डेयरी विकास से मजबूत हो रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था – पशुपालन एवं डेयरी विकास के क्षेत्र में भी जिले में प्रभावी कार्य किए जा रहे हैं। क्षीरधारा ग्राम योजना के प्रथम चरण में चयनित 28 ग्रामों में 72 शिविर आयोजित कर शत-प्रतिशत टीकाकरण पूर्ण किया गया है। द्वितीय चरण में नियमानुसार 144 नए ग्रामों का चयन किया जा चुका है। चारा बीज प्रदाय योजना के तहत 1 हजार 469 पशुपालकों को गुणवत्तापूर्ण ज्वार चारा बीज वितरित किया गया है।

मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना के तहत 26 पशुपालकों को मुर्रा नस्ल की दुधारू भैंस का वितरण किया गया है। डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के माध्यम से डेयरी व्यवसाय को प्रोत्साहित किया जा रहा है। पशु स्वास्थ्य एवं उपचार के क्षेत्र में वर्ष 2025-26 से अब तक जिले में 3 लाख 94 हजार 667 पशुओं का प्रभावी उपचार किया गया है। राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत 4 लाख 7 हजार 800 टीके लगाकर शत-प्रतिशत लक्ष्य पूर्ण किया गया। एफएमडी टीकाकरण में डिंडोरी जिले ने जबलपुर संभाग में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।

सुशासन एवं विभागीय समन्वय से मिली उपलब्धि –  प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के अंतर्गत शिकायतों का समय-सीमा में निराकरण, सुशासन श्रेणी, कृषक प्रशिक्षण, फसल कटाई प्रयोग की शत-प्रतिशत पूर्ति, प्राथमिक कृषि साख सहकारी संस्थाओं का डिजिटलीकरण, पीएम किसान के माध्यम से ऋण वितरण, ग्रामीण कौशल योजना, आधार सीडिंग, राजस्व प्रकरणों का निराकरण, उद्यानिकी एवं पशुपालन गतिविधियों सहित विभिन्न क्षेत्रों में जिले ने बेहतर प्रदर्शन किया है।

जिला प्रशासन ने प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के क्रियान्वयन में देश के 100 चयनित जिलों में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर संबंधित विभागों के अधिकारियों-कर्मचारियों तथा जिले के किसानों को बधाई दी है। साथ ही आगामी अवधि में भी इसी प्रकार प्रभावी विभागीय समन्वय, जनभागीदारी और सतत निगरानी के साथ कार्य करते हुए अधिक से अधिक किसानों एवं ग्रामीण परिवारों को शासन की योजनाओं का लाभ दिलाने का आह्वान किया है।

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