बिहार में धान खरीद का लक्ष्य 50 लाख मीट्रिक टन करने की मांग
खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री अशोक चौधरी ने केंद्र को लिखा पत्र, वर्तमान 35 लाख मीट्रिक टन लक्ष्य को बताया अपर्याप्त
01 अक्टूबर2026, पटना: बिहार में धान खरीद का लक्ष्य 50 लाख मीट्रिक टन करने की मांग – बिहार में खरीफ विपणन सत्र 2026-27 के लिए निर्धारित धान खरीद के लक्ष्य को बढ़ाकर 50 लाख मीट्रिक टन करने की मांग राज्य सरकार ने केंद्र से की है। वर्तमान में केंद्र सरकार ने बिहार के लिए धान खरीद का लक्ष्य 35 लाख मीट्रिक टन निर्धारित किया है। राज्य के खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री अशोक चौधरी ने इसे बिहार की जरूरतों के अनुरूप अपर्याप्त बताते हुए लक्ष्य में 15 लाख मीट्रिक टन की बढ़ोतरी करने का आग्रह किया है।
मंत्री अशोक चौधरी ने केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी को पत्र भेजकर खरीफ विपणन सत्र 2026-27 के लिए धान खरीद का लक्ष्य 35 लाख से बढ़ाकर 50 लाख मीट्रिक टन करने की आवश्यक स्वीकृति जल्द प्रदान करने का अनुरोध किया है। बिहार में इस वर्ष धान की सरकारी खरीद 1 नवंबर से शुरू होने वाली है।
37 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में धान की खेती
राज्य सरकार का कहना है कि बिहार में खरीफ मौसम के दौरान लगभग 42 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न फसलों की खेती होती है। इसमें 37 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र धान की खेती के अंतर्गत आता है। ऐसे में धान बिहार के किसानों की आय का प्रमुख आधार है। सरकार के अनुसार पिछले वर्ष से धान खरीद का लक्ष्य कम किए जाने के कारण किसानों को अपनी उपज के विपणन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत जन वितरण प्रणाली के माध्यम से बिहार के लोगों को खाद्यान्न उपलब्ध कराने के लिए राज्य को हर वर्ष करीब 33.16 लाख मीट्रिक टन चावल की आवश्यकता होती है। इस मात्रा में चावल की जरूरत पूरी करने के लिए लगभग 48.87 लाख मीट्रिक टन धान की आवश्यकता होती है। ऐसे में राज्य सरकार 50 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य निर्धारित करने की मांग कर रही है।स्थानीय खरीद से परिवहन खर्च भी घटेगा
मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि बिहार में धान का उत्पादन लगातार बढ़ रहा है और राज्य अब स्थानीय स्तर पर आवश्यक मात्रा में धान खरीदने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि 50 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य निर्धारित किए जाने से राज्य की खाद्यान्न जरूरतों को स्थानीय स्तर पर पूरा करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय स्तर पर अधिक धान की खरीद होने से दूसरे राज्यों से चावल मंगाने की आवश्यकता कम होगी। इससे चावल के परिवहन पर होने वाली अतिरिक्त लागत को भी कम किया जा सकेगा। राज्य सरकार ने केंद्र से आगामी खरीद सत्र को देखते हुए लक्ष्य बढ़ाने की स्वीकृति शीघ्र देने का आग्रह किया है।
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