राज्य कृषि समाचार (State News)

बूंदी में डीबीडब्ल्यू-303 गेहूं प्रक्षेत्र दिवस, किसानों को उन्नत खेती और पोषण सुरक्षा की जानकारी दी गई

17 मार्च 2026, जयपुर: बूंदी में डीबीडब्ल्यू-303 गेहूं प्रक्षेत्र दिवस, किसानों को उन्नत खेती और पोषण सुरक्षा की जानकारी दी गई – कृषि विज्ञान केन्द्र, बूंदी द्वारा ग्राम सांदडी में उन्नत गेहूं की जैव संवर्धित किस्म डीबीडब्ल्यू-303 (करण वैष्णवी) पर प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर किसानों को किस्म की विशेषताओं, उत्पादन क्षमता और पोषण महत्व के बारे में जानकारी दी गई। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों से अवगत कराना और पोषण सुरक्षा को बढ़ावा देना था।

डीबीडब्ल्यू-303 की विशेषताएं और उत्पादन क्षमता

कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रभारी डॉ. महेश चौधरी ने बताया कि डीबीडब्ल्यू-303 गेहूं की जैव संवर्धित (बायो फोर्टिफाइड) किस्म है, जिसमें सामान्य गेहूं की तुलना में सूक्ष्म पोषक तत्वों की मात्रा अधिक होती है। इसका औसत उत्पादन लगभग 80 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुँच सकता है।

डॉ. चौधरी ने बताया कि इस किस्म के दानों में उच्च प्रोटीन, अच्छा चपाती स्कोर, अधिक गीला व सूखा ग्लूटन और बिस्कुट फैलाव गुणांक पाया जाता है। इसके उच्च अवसादन मूल्य के कारण यह गेहूं के विभिन्न उत्पादों के लिए उपयुक्त है।

मृदा स्वास्थ्य और वैज्ञानिक खेती पर जोर

कार्यक्रम में मृदा वैज्ञानिक डॉ. सेवाराम रूंडला ने किसानों को मृदा स्वास्थ्य और मृदा परीक्षण के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि समय-समय पर मिट्टी की जांच कर उर्वरकों का संतुलित उपयोग करना चाहिए। इससे उत्पादन लागत कम होती है, मृदा की उर्वरता बनी रहती है और फसल की उत्पादकता बढ़ती है।

डॉ. दीपक कुमार ने किसानों को गेहूं की फसल में समय पर सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण और रोग-कीट प्रबंधन की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उन्नत किस्मों की समय पर बुवाई और वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाने से बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

कृषि योजनाओं की जानकारी और प्रोत्साहन

कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ कृषि पर्यवेक्षक विष्णु प्रसाद मीणा और लोकेश मीणा ने किसानों को कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं के बारे में अवगत कराया। उन्होंने विशेष रूप से तारबंदी योजना, गोवर्धन योजना, खेत तलाई योजना और पॉली हाउस योजना का विवरण दिया।

1. तारबंदी योजना: खेतों को आवारा पशुओं से बचाने के लिए अनुदान।
2. गोवर्धन योजना: गोबर और जैविक अपशिष्ट से जैविक खाद एवं ऊर्जा उत्पादन।
3. खेत तलाई योजना: वर्षा जल संचयन और सिंचाई सुविधा के लिए तालाब निर्माण पर सहायता।
4. पॉली हाउस योजना: संरक्षित खेती को बढ़ावा देना, जिससे कम क्षेत्र में अधिक उत्पादन।

किसानों को इन योजनाओं का अधिकतम लाभ लेने के लिए प्रेरित किया गया।

प्रशिक्षण और फसल भ्रमण

तकनीकी सहायक विजेन्द्र वर्मा और दीपक वर्मा ने किसानों को फसल का भ्रमण करवाया और प्रायोगिक खेती के तरीके समझाए। कार्यक्रम में उपस्थित किसानों ने वैज्ञानिकों से खेती से जुड़े विभिन्न विषयों पर जानकारी प्राप्त की और इसे उपयोगी बताया।

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