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राज्य कृषि समाचार (State News)

सरसों की फसल पर मंडरा रहा चितकबरा कीट और आरा मक्खी का खतरा, बचाव के लिए कृषि विभाग ने जारी की सलाह

06 नवंबर 2026, जयपुर: सरसों की फसल पर मंडरा रहा चितकबरा कीट और आरा मक्खी का खतरा, बचाव के लिए कृषि विभाग ने जारी की सलाह – राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में इस बार प्रमुख तिलहनी फसल सरसों की बुवाई करीब 1 लाख 70 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में की गई है। फसल की शुरुआती अवस्था में पेंटेड बग (चितकबरा कीट) और आरा मक्खी का प्रकोप किसानों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इससे फसल को बचाने के लिए कृषि विभाग की ओर से किसानों को जागरूक किया जा रहा है। इसी क्रम में कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक लखपत लाल मीना के नेतृत्व में अधिकारियों की टीम ने चौथ का बरवाड़ा क्षेत्र के गांवों में पहुंचकर सरसों की फसल का निरीक्षण किया और किसानों को कीटों की पहचान, नुकसान के लक्षण तथा नियंत्रण के उपायों की जानकारी दी।

चौथ का बरवाड़ा क्षेत्र के गांवों में किया निरीक्षण

संयुक्त निदेशक लखपत लाल मीना के नेतृत्व में चौथ का बरवाड़ा ब्लॉक के सहायक कृषि अधिकारी विजय जैन और कृषि पर्यवेक्षक डिडायच हस्तीमल मीना की टीम ने डिडायच, बंदेडिया, भेड़ोला सहित अन्य गांवों में किसानों के खेतों पर पहुंचकर सरसों की फसल का निरीक्षण किया।

संयुक्त निदेशक लखपत लाल मीना ने बताया कि सरसों की फसल की शुरुआती अवस्था में इन दोनों कीटों का प्रकोप विशेष रूप से नुकसानदायक हो सकता है। पेंटेड बग का प्रकोप अंकुरण के तुरंत बाद शुरू हो जाता है, जबकि आरा मक्खी का प्रकोप अंकुरण के लगभग 7 से 10 दिन बाद दिखाई देने लगता है। समय पर नियंत्रण नहीं होने पर नवजात पौधों की संख्या और फसल की बढ़वार प्रभावित हो सकती है।

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पेंटेड बग पत्तियों से चूसता है रस

पेंटेड बग यानी चितकबरा कीट काले रंग का होता है, जिसके शरीर पर लाल और पीले रंग के निशान पाए जाते हैं। इसके शिशु और वयस्क कीट पौधों की पत्तियों और कोमल भागों से रस चूसते हैं। इससे पौधे पीले पड़कर मुरझाने और सूखने लगते हैं। अधिक प्रकोप होने पर नवजात पौधे नष्ट भी हो सकते हैं। वहीं, आरा मक्खी (सॉफ्लाई) की सूंडियां हरे अथवा धूसर रंग की होती हैं। ये शुरुआत में पत्तियों के किनारों को कुतरती हैं और बाद में पूरी पत्तियों को खाकर केवल डंठल और नसें छोड़ देती हैं। अधिक प्रकोप होने पर पौधों की बढ़वार और उत्पादन प्रभावित होता है।

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कीट नियंत्रण के लिए किसानों को दी ये सलाह

कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि खेतों से फसल अवशेष और खरपतवार नष्ट करें। बुवाई के लिए प्रमाणित बीज का उपयोग करें और अनुशंसित बीजोपचार के बाद ही बुवाई करें। अंकुरण के तुरंत बाद से फसल की नियमित निगरानी शुरू कर दें। विशेष रूप से पहले 25 से 30 दिनों तक सतर्क रहें। पेंटेड बग के नियंत्रण के लिए खेत और मेड़ों को खरपतवार मुक्त रखें। कीटों के समूह दिखाई देने पर उन्हें एकत्रित कर नष्ट करें। वहीं, आरा मक्खी की सूंडियों को सुबह और शाम हाथ से एकत्रित कर नष्ट करने की सलाह दी गई है। आवश्यकता के अनुसार फसल में हल्की सिंचाई करें, इससे आरा मक्खी की सूंडियों का प्रकोप कम करने में मदद मिलती है।

अधिक प्रकोप होने पर इन दवाओं का करें छिड़काव

कृषि विभाग के अनुसार, इन कीटों के नियंत्रण के लिए क्यूनालफॉस 1.5 प्रतिशत डस्ट का 6 किलो प्रति बीघा की दर से भुरकाव करें। पेंटेड बग का प्रकोप अधिक होने पर इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल की 0.3 मिलीलीटर मात्रा प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।

इसी तरह, आरा मक्खी का प्रकोप अधिक होने पर मैलाथियान 50 ईसी की 1 मिलीलीटर मात्रा प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है। कीटनाशी का छिड़काव और भुरकाव सुबह अथवा शाम के समय करें। निर्धारित मात्रा से अधिक दवा का प्रयोग न करें और छिड़काव के दौरान सुरक्षा उपकरणों का उपयोग करें। किसानों को कीटनाशक खरीदते समय उसका बिल अवश्य लेने की सलाह भी दी गई है।

कृषि अधिकारियों ने किसानों से अपील की है कि सरसों की फसल की शुरुआती अवस्था को विशेष महत्व दें। फसल में कीटों के लक्षण दिखाई देते ही नजदीकी कृषि पर्यवेक्षक अथवा कृषि अधिकारी से संपर्क कर तकनीकी सलाह प्राप्त करें। समय पर कीटों की पहचान और नियंत्रण के उपाय अपनाकर फसल को होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है।

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