ओडिशा में गेंदा-गुलाब पर लाल मकड़ी का हमला, मौसम केंद्र ने बताई दवा की मात्रा
06 नवंबर 2026, भुवनेश्वर (ओडिशा): ओडिशा में गेंदा-गुलाब पर लाल मकड़ी का हमला, मौसम केंद्र ने बताई दवा की मात्रा – ओडिशा में गेंदा और गुलाब जैसे फूलों की फसल पर लाल मकड़ी (रेड स्पाइडर माइट) कीट का खतरा बढ़ गया है। मौसम विज्ञान केंद्र, भुवनेश्वर की कृषि मौसम सलाहकार सेवा (एग्रोमेट एडवाइजरी) ने राज्यभर के फूल उत्पादक किसानों के लिए ताज़ा बुलेटिन में छिड़काव के लिए तीन दवाओं और उनकी मात्रा की जानकारी दी है।
3 नवंबर को जारी यह बुलेटिन (क्रमांक 88/2026) 4 से 8 नवंबर तक के लिए वैध है। मौसम केंद्र के मुताबिक गेंदा और गुलाब की फसल इस समय बढ़वार से फूल आने की अवस्था में है, और मौजूदा मौसम लाल मकड़ी के प्रकोप को बढ़ा सकता है। ओडिशा में गेंदा और गुलाब की खेती त्योहारों और शादी-ब्याह के मौसम में फूलों की बढ़ती मांग को देखते हुए कई इलाकों में किसानों के लिए अच्छी कमाई का ज़रिया बन चुकी है, इसलिए फूलों की सेहत पर असर डालने वाले कीट को समय पर रोकना ज़रूरी हो जाता है।
तीन दवाओं में से किसी एक का करें इस्तेमाल
बुलेटिन के मुताबिक लाल मकड़ी के नियंत्रण के लिए किसान वेटेबल सल्फर 80% डब्ल्यूपी की 2 ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव कर सकते हैं। बाज़ार में यह सल्फेक्स, बलवान या सल्फाडेक्स जैसे नामों से उपलब्ध है।
इसके अलावा प्रोपरजाइट 57% ईसी की 2 मिलीलीटर मात्रा प्रति लीटर पानी में या फेनपाइरोक्सिमेट 5% ईसी की 2 मिलीलीटर मात्रा प्रति लीटर पानी में घोलकर भी छिड़काव किया जा सकता है। प्रोपरजाइट बाज़ार में ओमाइट, माइटकिल या सुपर डायनामाइट नाम से मिलता है, जबकि फेनपाइरोक्सिमेट सीगेट, मिटिगेट या फॉर्माइट जैसे नामों से बिकता है। तीनों में से कोई एक दवा चुनना ही काफी है, तीनों को एक साथ मिलाने की ज़रूरत नहीं है।
मौसम में बदलाव पर भी नज़र ज़रूरी
मौसम केंद्र ने अगले कुछ दिनों के लिए ओडिशा में बारिश को लेकर चेतावनी भी जारी की है। 4 नवंबर की सुबह तक और उसके बाद के एक दिन के लिए कोरापुट और मलकानगिरी जिलों में भारी बारिश और कई इलाकों में 30-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज़ हवा चलने की संभावना जताई गई है, जिसमें झोंके 50-60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं।
इसके बाद के तीन दिन मौसम सामान्यतः शुष्क रहने का अनुमान है। आगे 30 अक्टूबर से 12 नवंबर के बीच की अवधि के लिए राज्य में बारिश सामान्य से कम और तापमान सामान्य रहने की संभावना जताई गई है, जबकि मछुआरों को पहले ही समुद्र में न जाने की सलाह दी जा चुकी है।
उसी बुलेटिन में उत्तर-पूर्वी तटीय इलाके (रानीताल कृषि मौसम इकाई क्षेत्र) के लिए गन्ने की फसल में मिलीबग और स्केल कीट का ज़िक्र भी किया गया है, जिसके लिए अलग दवा सुझाई गई है। फूल उत्पादक किसानों को सलाह है कि वे अपने इलाके के मौसम और फसल की अवस्था के मुताबिक नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लेकर ही छिड़काव करें।
लाल मकड़ी कीट पत्तियों की निचली सतह पर रहकर रस चूसता है, जिससे पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं और फूलों की गुणवत्ता व आकार दोनों पर असर पड़ता है। गर्म और शुष्क मौसम में इस कीट की संख्या तेज़ी से बढ़ती है, इसलिए मौसम बुलेटिन में बारिश के पूर्वानुमान के साथ-साथ इस सलाह को भी शामिल किया गया है।
बुलेटिन की सलाह है कि किसान हर हफ्ते खेत का निरीक्षण करें और संक्रमण दिखने पर शुरुआती अवस्था में ही सुझाई गई दवाओं में से किसी एक का छिड़काव करें, ताकि नुकसान फैलने से पहले उसे रोका जा सके।
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