हरे बैंगन की खेती से मालामाल हुए दमोह के किसान, ₹50 हजार की लागत में ₹6 लाख तक की कमाई; दूसरे राज्यों में हो रही सप्लाई
19 अगस्त 2026, भोपाल: हरे बैंगन की खेती से मालामाल हुए दमोह के किसान, ₹50 हजार की लागत में ₹6 लाख तक की कमाई; दूसरे राज्यों में हो रही सप्लाई – मध्यप्रदेश के दमोह जिले में किसानों ने सब्जी की खेती को कमाई का बेहतर जरिया बनाया है। जिले के फुटेरा क्षेत्र में किसान समूह बनाकर हरे बैंगन की खेती कर रहे हैं। खास बात यह है कि किसानों को उनकी उपज बेचने के लिए मंडी जाने की जरूरत नहीं पड़ रही है। व्यापारी सीधे खेत पर पहुंचकर बैंगन खरीद रहे हैं। इससे किसानों का परिवहन और मंडी से जुड़ा खर्च व समय दोनों बच रहे हैं।
कृषि विज्ञान केंद्र दमोह और उद्यान विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन में किसान उन्नत तरीके से सब्जी उत्पादन कर रहे हैं। यहां हरे बैंगन की मांग बालाघाट, सिवनी और महाराष्ट्र सहित आसपास के क्षेत्रों में है। फुटेरा क्षेत्र से रोजाना करीब 1 से 2 ट्रक सब्जियां दूसरे जिलों और राज्यों में भेजी जा रही हैं।
₹50 हजार की लागत में ₹6 लाख तक आय
दमोह जिले की बटियागढ़ तहसील के फुटेरा निवासी किसान हेमंत पटैल प्रमुख सब्जी उत्पादकों में शामिल हैं। फुटेरा और आसपास के गांवों के करीब 100 से 200 किसान समूह बनाकर सब्जियों की खेती कर रहे हैं। इनमें हरे बैंगन की खेती प्रमुख है। किसानों के मुताबिक हरे बैंगन की खेती में एक एकड़ पर करीब ₹50 हजार की उत्पादन लागत आती है। किसान प्रतिदिन करीब ₹2,000 से ₹4,000 तक की बिक्री कर रहे हैं। तीन से चार महीने तक लगातार बैंगन की बिक्री से एक किसान को करीब ₹3 लाख से ₹6 लाख तक की आय प्राप्त हो रही है।
खेत पर ही पहुंच रहे व्यापारी
फुटेरा क्षेत्र में हरे बैंगन की अच्छी मांग के कारण व्यापारी किसानों के खेतों तक पहुंच रहे हैं और वहीं से उपज खरीद रहे हैं। इससे किसानों को मंडी तक फसल ले जाने की जरूरत नहीं पड़ती। परिवहन खर्च और मंडी में लगने वाला समय बचने के साथ किसानों को उपज का अच्छा भाव मिलने की भी सुविधा हो रही है।
समूह में खेती से मिल रहा फायदा
कृषि विज्ञान केंद्र दमोह के प्रभारी वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. मनोज अहिरवार के मार्गदर्शन में किसान समूह बनाकर उन्नत सब्जी उत्पादन कर रहे हैं। किसान सीधे सब्जी व्यापारियों से मार्केटिंग कर रहे हैं। डॉ. अहिरवार के अनुसार, किसान यदि समूह या क्लस्टर बनाकर सब्जियों की खेती करते हैं तो उन्हें बाजार में बेहतर भाव मिलने की संभावना रहती है। फुटेरा क्षेत्र में भी समूह और क्लस्टर के जरिए खेती करने से बड़ी संख्या में किसान हरे बैंगन के उत्पादन से जुड़ रहे हैं और अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।
ड्रिप और पॉलीमल्च से मिल रही तकनीकी मदद
किसानों को उद्यान विभाग दमोह की ओर से ड्रिप और पॉलीमल्च की सुविधा भी दी जा रही है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक किसानों को समय-समय पर फसल में लगने वाले रोग-कीट की पहचान, नियंत्रण और उन्नत कृषि तकनीक के संबंध में मार्गदर्शन देते हैं। समूह में खेती, सीधे खेत से बिक्री और वैज्ञानिक तकनीक के इस्तेमाल से फुटेरा क्षेत्र के किसान सब्जी उत्पादन को लाभकारी गतिविधि के रूप में आगे बढ़ा रहे हैं।
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