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राज्य कृषि समाचार (State News)

खीरे की खेती से बदली किसान की किस्मत! सिर्फ 0.40 हेक्टेयर में की 10 लाख की शानदार कमाई, शेडनेट हाउस से बदली तस्वीर

13 जुलाई 2026, भोपाल: खीरे की खेती से बदली किसान की किस्मत! सिर्फ 0.40 हेक्टेयर में की 10 लाख की शानदार कमाई, शेडनेट हाउस से बदली तस्वीर – आधुनिक कृषि तकनीकों और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहा है। इसका बेहतरीन उदाहरण झाबुआ जिले के पेटलावद विकासखंड के ग्राम मोहनपुरा निवासी प्रगतिशील किसान चन्द्रपाल सिंह राठौर हैं। उन्होंने उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में संरक्षित खेती (शेडनेट हाउस) को अपनाकर पारंपरिक खेती से आगे बढ़ते हुए खीरे की खेती में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। महज 0.40 हेक्टेयर क्षेत्र में उन्होंने लगभग 10 लाख रुपये की शुद्ध आय अर्जित कर क्षेत्र के किसानों के लिए नई मिसाल पेश की है।

पहले चन्द्रपाल सिंह राठौर अपने खेत में सोयाबीन और गेहूं जैसी पारंपरिक फसलों की खेती करते थे। इससे उन्हें लगभग 25 क्विंटल उत्पादन प्राप्त होता था। खेती पर करीब 35 हजार रुपये की लागत आती थी, जबकि कुल आय लगभग 77 हजार रुपये और शुद्ध आय केवल 42 हजार रुपये रह जाती थी। सीमित आय के कारण खेती से अपेक्षित आर्थिक लाभ नहीं मिल पा रहा था।

MIDH योजना से मिली नई दिशा

उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) योजना के तहत 0.40 हेक्टेयर क्षेत्र में शेडनेट हाउस स्थापित किया। इस परियोजना की कुल लागत 28.40 लाख रुपये रही, जिसमें शासन की ओर से 50 प्रतिशत यानी 14.20 लाख रुपये का अनुदान प्रदान किया गया। इसके बाद उन्होंने शेडनेट हाउस में एफ-1 एमिस्टार (F1 Amistar) किस्म के खीरे की वैज्ञानिक तरीके से खेती शुरू की।

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800 क्विंटल उत्पादन, 10 लाख रुपये की शुद्ध आय

संरक्षित खेती अपनाने के बाद उन्हें खीरे का करीब 800 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ। इस खेती पर लगभग 6 लाख रुपये की लागत आई, जबकि कुल आय 16 लाख रुपये रही। सभी खर्चों को निकालने के बाद उन्हें करीब 10 लाख रुपये की शुद्ध आय हुई। इस तरह उनकी आय 42 हजार रुपये से बढ़कर लगभग 10 लाख रुपये पहुंच गई, जो पहले की तुलना में करीब 24 गुना अधिक है।

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संरक्षित खेती से बढ़ रही किसानों की आय

चन्द्रपाल सिंह राठौर का कहना है कि शेडनेट हाउस में खेती करने से फसल पर मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों का असर काफी कम होता है। आधुनिक तकनीकों, उन्नत किस्मों और वैज्ञानिक प्रबंधन से कम क्षेत्र में भी अधिक उत्पादन और बेहतर गुणवत्ता वाली फसल प्राप्त की जा सकती है। गुणवत्तापूर्ण उत्पाद होने के कारण बाजार में अच्छे दाम मिलते हैं, जिससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।

दूसरे किसानों के लिए बने प्रेरणा

उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि संरक्षित खेती किसानों के लिए आय बढ़ाने का प्रभावी विकल्प बनकर उभर रही है। चन्द्रपाल सिंह राठौर की सफलता यह साबित करती है कि यदि किसान सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाएं, तो कम भूमि में भी बेहतर उत्पादन और अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है। उनकी सफलता अब क्षेत्र के अन्य किसानों को भी शेडनेट हाउस जैसी आधुनिक तकनीकों की ओर प्रेरित कर रही है।  

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