फसल कटाई प्रयोगों से होगा उपज का वैज्ञानिक आकलन, पीएम फसल बीमा योजना के तहत कार्मिकों को मिलेगा प्रशिक्षण
01 सितंबर 2026, जयपुर: फसल कटाई प्रयोगों से होगा उपज का वैज्ञानिक आकलन, पीएम फसल बीमा योजना के तहत कार्मिकों को मिलेगा प्रशिक्षण – प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत खरीफ सीजन में होने वाले फसल कटाई प्रयोगों को अधिक वैज्ञानिक, पारदर्शी एवं प्रमाणिक बनाने के उद्देश्य से फूल उत्कृष्टता केन्द्र, सवाई माधोपुर के कॉन्फ्रेंस हॉल में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिला कलक्टर काना राम के निर्देशानुसार आयोजित प्रशिक्षण में तहसील सवाई माधोपुर क्षेत्र के कृषि एवं राजस्व विभाग के कार्मिकों ने भाग लिया।
प्रशिक्षण के दौरान कृषि विभाग के सहायक निदेशक सांख्यिकी डॉ. श्यामबिहारी मथुरिया ने बताया कि फसल कटाई प्रयोगों के माध्यम से खेत स्तर पर फसलों की वास्तविक उपज का वैज्ञानिक आकलन किया जाता है। इन प्रयोगों से प्राप्त आंकड़े फसल उत्पादन के आकलन के साथ-साथ प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों के बीमा दावों के निर्धारण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों को खेत के चयन, निर्धारित क्षेत्रफल में फसल कटाई, उपज के वजन तथा रिकॉर्ड में सही विवरण दर्ज करने की प्रक्रिया की जानकारी दी।
एनएसएसओ कोटा के कंसल्टेंट ओमप्रकाश गुप्ता ने फसल कटाई प्रयोग की वैज्ञानिक पद्धति एवं निर्धारित मानकों के बारे में विस्तार से बताया। वहीं सहायक सांख्यिकी अधिकारी सतीश कुमार बैरवा ने ऑनलाइन फसल कटाई प्रयोग के संपादन की प्रक्रिया का प्रेजेंटेशन दिया। उन्होंने सीसीई एवं जीसीईएस मोबाइल ऐप के माध्यम से आंकड़े दर्ज करने, आवश्यक फोटो एवं विवरण अपलोड करने तथा निर्धारित समय सीमा में प्रयोग पूर्ण करने की प्रक्रिया समझाई।
सीसीई ऐप मास्टर ट्रेनर एवं सहायक कृषि अधिकारी विजय जैन ने प्रशिक्षणार्थियों को मौके पर फसल कटाई प्रयोग संपादित करने की व्यावहारिक प्रक्रिया से अवगत कराया। उन्होंने प्रयोग के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों, निर्धारित मापदंडों के अनुसार फसल कटाई, उपज के सही वजन तथा रिकॉर्ड संधारण की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी।
प्रशिक्षण के आयोजन एवं समन्वय में जिला कलेक्ट्रेट की भू-अभिलेख शाखा के पटवारी उमेश कुमार मित्तल एवं अतिरिक्त ऑफिस कानूनगो पीताम्बर गर्ग उपस्थित रहे। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों ने कहा कि फसल कटाई प्रयोग में छोटी सी त्रुटि भी आंकड़ों की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती है। इसलिए प्रत्येक प्रयोग निर्धारित वैज्ञानिक प्रक्रिया एवं विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जाना आवश्यक है। सटीक एवं प्रमाणिक आंकड़ों से न केवल फसल उपज का सही आकलन सुनिश्चित होगा, बल्कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को देय लाभ के निर्धारण में भी पारदर्शिता बनी रहेगी।
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