धान बेचने से पहले कराएं एग्री-स्टैक पंजीयन, छत्तीसगढ़ सरकार ने बदले नियम
04 सितंबर 2026, रायपुर: धान बेचने से पहले कराएं एग्री-स्टैक पंजीयन, छत्तीसगढ़ सरकार ने बदले नियम – छत्तीसगढ़ सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर धान खरीदी की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब राज्य के सभी किसानों को धान बेचने से पहले केंद्र सरकार के एग्री-स्टैक (Agri Stack) पोर्टल पर पंजीयन कराना अनिवार्य होगा।
पिछले वर्षों की तरह राज्य के अलग एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीयन कराने की जरूरत इस बार खत्म कर दी गई है। राज्य के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने सभी कलेक्टरों, खाद्य विभाग के अधिकारियों और अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक को इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। सरकार ने किसानों को 31 अक्टूबर 2026 तक एग्री-स्टैक पोर्टल पर पंजीयन कराने की समय-सीमा दी है, और यह प्रक्रिया राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के जरिए पूरी की जाएगी ताकि सभी किसानों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार हो सके।
पंजीयन कैसे होगा और किसका रकबा मान्य
किसानों को राहत देते हुए नई व्यवस्था के तहत सहकारी समितियों (सोसाइटी) में भी एग्री-स्टैक पंजीयन की सुविधा दी जाएगी। हर समिति के ऑपरेटर को लॉगिन आईडी और पासवर्ड दिया जाएगा, जिससे किसान एक ही जगह पर पंजीयन से जुड़ी सारी औपचारिकताएं पूरी कर सकेंगे।
सरकार ने यह भी साफ किया है कि इस सीजन में धान बेचने वाले किसानों के लिए केवल एग्री-स्टैक पोर्टल पर दर्ज डिजिटल क्रॉप सर्वे में दर्ज रकबा ही मान्य होगा। यानी धान खरीद के दौरान किसान की पात्रता उसी दर्ज रकबे के आधार पर तय होगी।
जिन किसानों ने पिछले सीजन में धान बेचने के लिए पंजीयन नहीं कराया था, या जिनके पास एग्री-स्टैक फार्मर आईडी और किसान कोड नहीं है, उन्हें पहले एग्री-स्टैक में पंजीयन कराना होगा। इसके बाद संबंधित समिति या उपार्जन केंद्र में जाकर जमीन का खसरा विवरण, बैंक खाते की जानकारी और नॉमिनी का विवरण दर्ज कराना होगा।
डिजिटल खरीद से किसानों को क्या फायदा
नई व्यवस्था से पंजीयन प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी बनेगी। डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर खरीदी होने से फर्जी पंजीयन और दोहराव पर रोक लगेगी, किसानों को एक ही जगह पर ज्यादातर सेवाएं मिल सकेंगी और धान खरीदी की प्रक्रिया पहले से तेज व व्यवस्थित होगी।
छत्तीसगढ़ का यह कदम केंद्र के डिजिटल एग्री मिशन के तहत फार्मर आईडी और एग्री-स्टैक को राज्य-स्तरीय खरीद प्रणालियों से जोड़ने की व्यापक कोशिश का हिस्सा है। जिस तरह से भारत किसानों का डिजिटल पहचान-पत्र तैयार कर रहा है, वह विश्व स्तर पर कृषि-डेटा प्रणालियों के अध्ययन के लिए एक उदाहरण बन रहा है, खासकर उन देशों के लिए जो अपने यहां भी पारदर्शी खरीद तंत्र बनाना चाहते हैं।
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