राज्य कृषि समाचार (State News)

कलेक्टर नेहा मीना ने खेत में देखा ‘जीवामृत’ का चमत्कार, झाबुआ में प्राकृतिक खेती को मिलेगा नया मुकाम

15 जुलाई 2025, झाबुआ: कलेक्टर नेहा मीना ने खेत में देखा ‘जीवामृत’ का चमत्कार, झाबुआ में प्राकृतिक खेती को मिलेगा नया मुकाम – झाबुआ जिले में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए कलेक्टर नेहा मीना ने ग्राम खेड़ी में प्राकृतिक खेती कर रहे किसान विमल भाबोर के खेत का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने खेत पर तैयार जीवामृत, नीमास्त्र और ब्रह्मास्त्र जैसे जैविक आदानों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया और विमल भाबोर से प्राकृतिक खेती की विधियों पर विस्तार से चर्चा की।

कलेक्टर ने किसान के नवाचार की सराहना करते हुए कहा कि “वास्तव में ऐसे प्रयोग ही प्राकृतिक खेती के आंदोलन को जन-जन तक पहुंचा सकते हैं।” उन्होंने विमल भाबोर से आग्रह किया कि वे अन्य किसानों को भी आदान निर्माण की तकनीकें सिखाएं और जैविक खेती के लाभों से परिचित कराएं।

इस अवसर पर यह भी घोषणा की गई कि राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) के अंतर्गत एक बायो इनपुट रिसोर्स सेंटर (BRC) की इकाई किसान विमल भाबोर के खेत पर ही स्थापित की जाएगी। इससे चयनित क्लस्टर के अन्य किसानों को भी जैविक आदान जैसे बीजामृत, जीवामृत, घनामृत, नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे।

कृषक विमल भाबोर ने बताया कि उन्होंने पहले ही सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया के तहत आवेदन कर दिया है, जिससे उन्हें और उनके उत्पादों को सरकारी मान्यता मिल सकेगी।

कलेक्टर के साथ क्षेत्र भ्रमण में जिले के उप संचालक कृषि एन.एस. रावतसहायक संचालक उद्यानिकी बी.एस. चौहानअनुविभागीय कृषि अधिकारी एल.एस. चारेलउप परियोजना संचालक (आत्मा) एम.एस. धार्वेवरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी विजय मोरे सहित विकासखण्ड स्तरीय मैदानी अमला भी उपस्थित रहा।

कृषि विभाग झाबुआ द्वारा जिलेभर में किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करने हेतु निरंतर उन्मुखीकरण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, जिसमें गोबर, गौ-मूत्र, गुड़, बेसन, चूना, नीम, करंज, धतूरा, सीताफल, पपीता, अरण्डी व अमरूद जैसी स्थानीय वनस्पतियों का प्रयोग कर सस्ते, सशक्त जैविक आदानों का निर्माण सिखाया जा रहा है।

यह पहल न केवल किसानों की लागत घटाएगी, बल्कि उन्हें रसायनमुक्त सुरक्षित खेती की ओर प्रेरित भी करेगी। झाबुआ जिले में यह पहल ग्रामीण आत्मनिर्भरता और पोषण सुरक्षा की दिशा में एक मिसाल बन सकती है।

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