छत्तीसगढ़: रायगढ़ में कृषि मंत्रालय की टीम ने किया मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना का मूल्यांकन, किसानों से लिया फीडबैक
15 जुलाई 2026, रायपुर: छत्तीसगढ़: रायगढ़ में कृषि मंत्रालय की टीम ने किया मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना का मूल्यांकन, किसानों से लिया फीडबैक – कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत संचालित कृषि आर्थिक अनुसंधान केन्द्र, जबलपुर की विशेषज्ञ टीम ने 9 और 10 जुलाई को छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले का दो दिवसीय दौरा कर मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के क्रियान्वयन और उसके प्रभाव का व्यापक मूल्यांकन किया। इस दौरान विशेषज्ञों ने विभिन्न गांवों में पहुंचकर किसानों से सीधे संवाद किया और योजना के तहत जारी मृदा स्वास्थ्य कार्ड के उपयोग, उससे मिल रहे लाभ और खेती पर पड़ रहे प्रभाव का फीडबैक लिया।
दौरे के दौरान अनुसंधान दल ने ग्राम गोपालपुर, भगोरा, पाली, बायंग, नवरंगपुर और धनागर का भ्रमण किया। टीम ने किसानों से चर्चा कर यह जाना कि वे मृदा स्वास्थ्य कार्ड में उपलब्ध जानकारी का उपयोग अपनी खेती में किस प्रकार कर रहे हैं तथा इससे उत्पादन लागत और फसल उत्पादन पर क्या असर पड़ा है। किसानों ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए वैज्ञानिक तरीके से खेती करने में मृदा परीक्षण की उपयोगिता पर चर्चा की।
संतुलित उर्वरक उपयोग पर दिया जोर
उप संचालक कृषि ने बताया कि विशेषज्ञों ने किसानों को मृदा परीक्षण में शामिल प्रमुख पोषक तत्वों जैसे नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश सहित अन्य सूक्ष्म एवं आवश्यक पोषक तत्वों की भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का संतुलित उपयोग करने से न केवल खेती की लागत कम होती है, बल्कि भूमि की उर्वरता भी बनी रहती है और फसल उत्पादन में वृद्धि होती है।
विशेषज्ञ दल ने किसानों को सलाह दी कि वे मृदा स्वास्थ्य कार्ड में दिए गए सुझावों के अनुसार ही उर्वरकों और अन्य पोषक तत्वों का उपयोग करें। इससे वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा मिलेगा और अनावश्यक उर्वरक उपयोग से होने वाले खर्च में भी कमी आएगी।
पटेलपाली प्रयोगशाला से मिल रही मिट्टी परीक्षण की सुविधा
रायगढ़ जिले के किसानों की सुविधा के लिए पटेलपाली स्थित मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला संचालित की जा रही है। यहां किसानों की कृषि भूमि से लिए गए मिट्टी के नमूनों का परीक्षण कर उन्हें मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराया जाता है। इस कार्ड के माध्यम से किसानों को अपनी भूमि की पोषण स्थिति की सटीक जानकारी मिलती है, जिससे वे आवश्यकता के अनुसार उर्वरकों का उपयोग कर बेहतर उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं।
अध्ययन दल में शामिल रहे ये विशेषज्ञ
निरीक्षण एवं अध्ययन दल में कृषि आर्थिक अनुसंधान केन्द्र, जबलपुर के अनुसंधान अधिकारी डॉ. राजेन्द्र सिंह बरेलिया, डॉ. प्रेम रतन पाण्डेय और अखिलेश कुरील शामिल थे। अध्ययन को सफल बनाने में कृषि विभाग के अभिषेक पटेल और संजय सिदार सहित अन्य अधिकारियों एवं मैदानी अमले ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
ग्राम स्तर पर भी कृषि विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने कार्यक्रम के सफल संचालन में सक्रिय सहयोग दिया। ग्राम गोपालपुर में श्रीमती रंजीता पैंकरा, भगोरा में सुशील चौरसिया, पाली में श्रीमती जमीमा एक्का, बायंग में विकास साहू, नवरंगपुर में दयाशंकर नायक तथा धनागर में योगेश्वरी पटेल ने किसानों और अध्ययन दल के बीच समन्वय स्थापित कर कार्यक्रम को सफल बनाया।
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