राज्य कृषि समाचार (State News)

नीली क्रांति की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़: रिकॉर्ड 9.59 लाख मीट्रिक टन उत्पादन के साथ देश में छठा स्थान पर पहुंचा प्रदेश  

21 मई 2026, भोपाल: नीली क्रांति की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़: रिकॉर्ड 9.59 लाख मीट्रिक टन उत्पादन के साथ देश में छठा स्थान पर पहुंचा प्रदेश – छत्तीसगढ़ में मछली पालन तेजी से ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत कड़ी बनता जा रहा है। राज्य सरकार की मछुआरा हितैषी नीतियों और आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने की पहल के चलते प्रदेश ने मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। छत्तीसगढ़ अब देश में अंतर्देशीय मत्स्य उत्पादन के मामले में छठे स्थान पर पहुंच गया है। वर्तमान में राज्य में सालाना 9.59 लाख मीट्रिक टन मछली का रिकॉर्ड उत्पादन हो रहा है।

यह जानकारी कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा मत्स्य पालन मंत्री रामविचार नेताम ने रायपुर में आयोजित एक दिवसीय चिंतन शिविर में दी। यह शिविर समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एमपीईडीए), भारत सरकार के मत्स्य पालन विभाग और राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था।

96 प्रतिशत से अधिक जल क्षेत्र में हो रहा मछली पालन

मंत्री  नेताम ने बताया कि छत्तीसगढ़ में उपलब्ध 2.081 लाख हेक्टेयर जल क्षेत्र में से 96.25 प्रतिशत क्षेत्र को मछली पालन के अंतर्गत विकसित किया जा चुका है। इससे राज्य के 2.25 लाख से अधिक मछुआरों को स्थायी स्वरोजगार मिला है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार अंतिम व्यक्ति तक आर्थिक सशक्तिकरण पहुंचाने के लिए काम कर रही है।

उन्होंने बताया कि मछली पालन को कृषि का दर्जा मिलने से मत्स्य पालकों को बिजली दरों में रियायत, ब्याज मुक्त ऋण और पानी की दरों में छूट जैसी सुविधाएं मिल रही हैं, जिससे यह व्यवसाय और अधिक लाभकारी बन रहा है।

आधुनिक तकनीकों से बढ़ा उत्पादन

मंत्री  नेताम ने कहा कि राज्य सरकार मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए केज कल्चर, आरएएस (रीसर्कुलेटिंग एक्वाकल्चर सिस्टम) और बायोफ्लॉक जैसी आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दे रही है। इसके साथ ही रायपुर और कांकेर में “गिफ्ट तिलापिया” के लिए विशेष क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि सरकार का लक्ष्य वर्ष 2028 तक तिलापिया उत्पादन को 30 हजार मीट्रिक टन तक पहुंचाना है। इससे प्रदेश को हर साल 90 से 100 करोड़ रुपये तक का विदेशी निर्यात राजस्व प्राप्त होने की संभावना है।

मत्स्य बीज उत्पादन में आत्मनिर्भर बना राज्य

मत्स्य संचालक  नारायण सिंह नाग ने बताया कि राज्य में उच्च गुणवत्ता वाले मत्स्य बीज उत्पादन के लिए मजबूत आधारभूत ढांचा तैयार किया गया है। वर्तमान में प्रदेश में 123 सर्कुलर हेचरी, 102 मत्स्य बीज प्रक्षेत्र, 3698 संवर्धन पोखर, एक पंगेशियस हेचरी, सात मांगुर हेचरी और दो मोनोसेक्स तिलापिया हेचरी संचालित हो रही हैं।

उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में 606 करोड़ से अधिक मत्स्य बीज का उत्पादन हो रहा है। राज्य न केवल अपनी जरूरत पूरी कर रहा है, बल्कि पश्चिम बंगाल, झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, केरल और गोवा जैसे राज्यों को भी मत्स्य बीज की आपूर्ति कर रहा है।

उत्पादन में 11.75 प्रतिशत की वृद्धि

वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाने के कारण बीते एक वर्ष में राज्य के मत्स्य उत्पादन में 11.75 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। ग्रामीण तालाबों में औसत उत्पादकता 4,838 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गई है, जबकि केज कल्चर और बायोफ्लॉक जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग करने वाले किसान 8,000 से 12,000 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं।

तिलापिया निर्यात की संभावनाओं पर हुई चर्चा

कार्यक्रम में एमपीईडीए के निदेशक डॉ. राम मोहन एमके ने तिलापिया की निर्यात क्षमता पर जानकारी दी, जबकि भारत सरकार में मत्स्य विकास आयुक्त डॉ. के. मोहम्मद कोया ने पीएमएमएसवाई योजना के तहत गिफ्ट तिलापिया जलकृषि के लिए उपलब्ध योजनाओं और सेवाओं के बारे में विस्तार से बताया।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य मछुआरा संघ के उपाध्यक्ष श्री लखन लाल धीवर, मत्स्य किसान तथा केंद्र और राज्य सरकार के कई अधिकारी मौजूद रहे।

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