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राज्य कृषि समाचार (State News)

छत्तीसगढ़: IGKV ने तैयार की धान की 6 उन्नत म्यूटेंट किस्में, BARC के सहयोग से हुआ अनुसंधान; किसानों को मिलेगा लाभ  

28 अप्रैल 2026, रायपुर: छत्तीसगढ़: IGKV ने तैयार की धान की 6 उन्नत म्यूटेंट किस्में, BARC के सहयोग से हुआ अनुसंधान; किसानों को मिलेगा लाभ – इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV), रायपुर द्वारा भाभा अटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC), ट्रॉम्बे (मुंबई) के सहयोग से विकसित धान की छह उन्नत म्यूटेंट किस्मों का वितरण कृषि महाविद्यालय रायपुर में आयोजित समारोह में प्रगतिशील किसानों को किया गया। इन किस्मों में विक्रम ट्रॉम्बे छत्तीसगढ़ राईस (विक्रम टीसीआर), ट्रॉम्बे छत्तीसगढ़ विष्णुभोग म्यूटेंट, ट्रॉम्बे छत्तीसगढ़ सोनागाथी म्यूटेंट, ट्रॉम्बे छत्तीसगढ़ दुबराज म्यूटेंट-1, बौना लुचाई एवं ट्रॉम्बे छत्तीसगढ़ जवाफूल म्यूटेंट शामिल हैं।

ये सभी म्यूटेंट किस्में पारंपरिक धान की तुलना में जल्दी पकने वाली, अधिक उपज देने वाली, कम ऊंचाई वाली तथा कीट एवं रोगों के प्रति अधिक सहनशील बताई गई हैं। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती शहला निगार ने कहा कि रेडिएशन तकनीक से विकसित ये किस्में कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने में सक्षम हैं और किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

कृषि नवाचार और तकनीकी सहयोग

कृषि उत्पादन आयुक्त ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आर्थिक समृद्धि के लिए निरंतर कार्य कर रही है और IGKV तथा BARC का यह सहयोग कृषि नवाचार का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने किसानों से पारंपरिक फसलों की जगह अधिक लाभकारी और उन्नत किस्मों को अपनाने की अपील की।

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म्यूटेशन ब्रीडिंग से कृषि में नया बदलाव

IGKV के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने बताया कि पिछले 10 वर्षों से म्यूटेशन ब्रीडिंग तकनीक के माध्यम से छत्तीसगढ़ की पारंपरिक फसलों में सुधार किया जा रहा है। इस तकनीक से उच्च उपज, कम अवधि, कीट-प्रतिरोधी और सूखा सहनशील किस्में विकसित की गई हैं, जिससे कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय सुधार संभव हुआ है।

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वैज्ञानिक तकनीक का कृषि में उपयोग

BARC के विशेषज्ञों ने कार्यक्रम में म्यूटेशन ब्रीडिंग और नाभिकीय तकनीक के उपयोग पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रेडिएशन आधारित कृषि अनुसंधान से फसलों में वांछित गुणों का समावेश कर उत्पादन क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में वैज्ञानिक, कृषि विशेषज्ञ और प्रगतिशील किसान उपस्थित रहे।

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