राज्य कृषि समाचार (State News)

Chhattisgarh: कम बारिश की आशंका पर सरकार ने जारी की आकस्मिक कार्ययोजना, किसानों को दिए अहम सुझाव

03 जुलाई 2026, भोपाल: Chhattisgarh: कम बारिश की आशंका पर सरकार ने जारी की आकस्मिक कार्ययोजना, किसानों को दिए अहम सुझाव – खरीफ सीजन 2026 में अल-नीनो के संभावित प्रभाव के चलते मानसून के देर से आने, समय से पहले समाप्त होने, लंबे समय तक बारिश नहीं होने (खंड वर्षा) और कम वर्षा की आशंका को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों के लिए सामान्य आकस्मिक कार्ययोजना तैयार की है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और कृषि मंत्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में तैयार इस योजना का उद्देश्य कम बारिश की स्थिति में भी फसलों की सुरक्षा करना, उत्पादन बनाए रखना और खेती की लागत कम करना है।

कम अवधि वाली फसलों और डीएसआर तकनीक पर जोर

कृषि विभाग ने किसानों को कम और मध्यम अवधि में तैयार होने वाली फसलों एवं किस्मों का चयन करने की सलाह दी है, ताकि मौसम की अनिश्चितता का असर कम हो। धान की खेती में पारंपरिक रोपा पद्धति के बजाय डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर) यानी धान की सीधी बुवाई को प्राथमिकता देने की अपील की गई है।

विभाग के अनुसार, डीएसआर तकनीक अपनाने से करीब 20 प्रतिशत पानी की बचत होती है, प्रति एकड़ लगभग 5,000 रुपये तक लागत कम आती है और फसल 12 से 15 दिन पहले तैयार हो जाती है।

कम पानी वाली फसलें अपनाने की सलाह

सरकार ने किसानों को बारिश शुरू होने से पहले खेतों और मेड़ों की सफाई, समय पर जुताई तथा मेड़बंदी कर वर्षा जल संरक्षण करने की सलाह दी है, ताकि उपलब्ध पानी का अधिकतम उपयोग किया जा सके।

कम बारिश की संभावना को देखते हुए ऊंची भूमि में धान की जगह अरहर, मूंग, उड़द जैसी दलहनी फसलें तथा मूंगफली, तिल, रामतिल और सोयाबीन जैसी तिलहनी फसलें लगाने की सलाह दी गई है। कृषि विभाग का कहना है कि ये फसलें कम पानी में भी बेहतर उत्पादन देने में सक्षम हैं और किसानों का जोखिम कम कर सकती हैं।

बीज उपचार और दोबारा बुवाई के लिए भी जारी की सलाह

कृषि विभाग ने बुवाई से पहले बीज उपचार को अनिवार्य बताया है। इसके लिए कार्बेन्डाजिम, थायमेथोक्साम-इमिडाक्लोप्रिड तथा विभिन्न फसलों के अनुसार जैव उर्वरकों के उपयोग की सलाह दी गई है।

यदि 15 जुलाई तक बीजों का अंकुरण नहीं होता, तो किसानों को दोबारा बुवाई के समय सामान्य बीज दर से 10 प्रतिशत अधिक बीज उपयोग करने की सलाह दी गई है। इसके अलावा जुलाई के अंत तक मूंग और उड़द तथा अगस्त में तिल, सूरजमुखी और मध्यम अवधि वाली अरहर की बुवाई करने का सुझाव दिया गया है।

संतुलित उर्वरक उपयोग और सूक्ष्म सिंचाई अपनाने की अपील

सरकार ने कम वर्षा की स्थिति में उर्वरकों का संतुलित उपयोग करने पर भी जोर दिया है। किसानों को नत्रजन उर्वरकों का सीमित उपयोग करने, 2 प्रतिशत यूरिया घोल का पर्णीय छिड़काव या प्रति एकड़ दो बोतल नैनो यूरिया का उपयोग करने की सलाह दी गई है। वहीं दलहनी और तिलहनी फसलों में बुवाई के लगभग एक माह बाद 2 प्रतिशत डीएपी घोल का पर्णीय छिड़काव करने की भी सलाह दी गई है।

वर्षा जल संरक्षण और मौसम आधारित खेती पर जोर

सरकार ने गांवों में नालों पर सीमेंट की बोरियों में रेत भरकर अस्थायी बांध बनाने, डबरियों, तालाबों और कुओं में वर्षा जल संग्रह करने तथा जरूरत पड़ने पर इस पानी का जीवन रक्षक सिंचाई के रूप में उपयोग करने की सलाह दी है।

इसके साथ ही किसानों से मौसम पूर्वानुमान के आधार पर कृषि कार्य करने, ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों को अपनाने तथा फसल विविधीकरण के जरिए खेती का जोखिम कम करने की अपील की गई है।

जरूरत पड़ने पर कृषि विशेषज्ञों से लें सलाह

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खरीफ 2026 में वर्षा सामान्य से कम रहती है, तो कम अवधि वाली धान की किस्मों के साथ अरहर, मूंग, उड़द, मूंगफली, तिल, रामतिल और सोयाबीन जैसी दलहनी एवं तिलहनी फसलें किसानों के लिए अधिक लाभकारी साबित हो सकती हैं।

राज्य सरकार ने किसानों से अपील की है कि खेती से जुड़ी किसी भी समस्या या तकनीकी जानकारी के लिए अपने निकटतम कृषि महाविद्यालय, कृषि अनुसंधान केंद्र, कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग से संपर्क कर वैज्ञानिक सलाह अवश्य लें।

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