राज्य कृषि समाचार (State News)

छत्तीसगढ़: किसानों के लिए कृषि वैज्ञानिकों की सलाह, 15 जुलाई तक पूरी करें धान की सीधी बुवाई

09 जुलाई 2026, रायपुर: छत्तीसगढ़: किसानों के लिए कृषि वैज्ञानिकों की सलाह, 15 जुलाई तक पूरी करें धान की सीधी बुवाई – छत्तीसगढ़ में मानसून अब सक्रिय हो गया है और जुलाई के पहले सप्ताह में हुई अच्छी बारिश से अधिकांश मैदानी क्षेत्रों के खेतों में पर्याप्त नमी और पानी उपलब्ध हो गया है। इसे देखते हुए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए खरीफ मौसम की विशेष एडवाइजरी जारी की है। वैज्ञानिकों ने रायगढ़ जिले के किसानों से 15 जुलाई तक धान की सीधी बुवाई और 30 जुलाई तक धान की रोपाई का कार्य पूरा करने की अपील की है, ताकि बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सके।

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार इस वर्ष अल नीनो के प्रभाव के कारण मानसून करीब 10 दिन की देरी से पहुंचा, जिसके चलते जून में सामान्य से लगभग 40 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई। हालांकि जुलाई के पहले सप्ताह में लगातार हुई बारिश से खेतों में पर्याप्त नमी बन गई है। जिन किसानों की धान की नर्सरी तैयार है, उन्हें खेतों में मचाई कर तुरंत रोपाई शुरू करने की सलाह दी गई है। वहीं जिन किसानों के पास नर्सरी उपलब्ध नहीं है, वे लेही पद्धति के तहत अंकुरित बीजों की बुवाई ड्रम सीडर या छिटकवा विधि से कर सकते हैं।

इन धान की किस्मों को अपनाने की सलाह

वैज्ञानिकों ने वर्तमान मौसम को देखते हुए शीघ्र एवं मध्यम अवधि (125-130 दिन) में पकने वाली धान की किस्मों का चयन करने की सलाह दी है। इनमें इन्द्रावती, छत्तीसगढ़ बारानी, इंदिरा एरोबिक, एमटीयू-1010, एमटीयू-1153, एमटीयू-1156, एमटीयू-1001, विक्रम टीसीआर, छत्तीसगढ़ धान-1919, छत्तीसगढ़ तेजस्वी और महामाया जैसी किस्में शामिल हैं, जो बदलती मौसमीय परिस्थितियों में बेहतर उत्पादन देने में सक्षम मानी जाती हैं।

बीज उपचार और लेही पद्धति पर जोर

विशेषज्ञों ने धान की बुवाई से पहले बीजों को कार्बेन्डाजिम या अन्य अनुशंसित कवकनाशी से उपचारित करने की सलाह दी है। प्रति किलोग्राम बीज में 2.5 ग्राम दवा का उपयोग करने के साथ एजोस्पाइरिलम, पीएसबी और केएसबी जैसे जैव उर्वरकों से बीज उपचार करने की भी सिफारिश की गई है। इससे फसल को आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है।

जिन क्षेत्रों में लगातार वर्षा हो रही है और खेतों में पानी भरा हुआ है, वहां लेही पद्धति अपनाने की सलाह दी गई है। इसके लिए बीजों को 8 से 10 घंटे तक पानी में भिगोकर 24 से 30 घंटे तक अंकुरित करने के बाद मचाई किए गए खेतों में ड्रम सीडर या छिटकवा विधि से बुवाई करने की सलाह दी गई है। इस पद्धति में प्रति एकड़ लगभग 40 किलोग्राम बीज पर्याप्त माना गया है।

खरपतवार और उर्वरक प्रबंधन पर भी दें ध्यान

कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि रायगढ़ जिले में धान की सीधी बुवाई वाले खेतों में खरपतवार बड़ी समस्या बन सकते हैं। यदि समय पर नियंत्रण नहीं किया गया तो उत्पादन में 50 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। इसलिए बुवाई के बाद पहले 40 दिनों तक खेत को खरपतवार मुक्त रखना जरूरी है। इसके लिए 20 और 40 दिन बाद हाथ से निंदाई, पैडी वीडर या अनुशंसित खरपतवारनाशी का उपयोग किया जा सकता है।

उर्वरक प्रबंधन के लिए प्रति एकड़ अधिकतम दो बोरी यूरिया, एक बोरी डीएपी और आधी बोरी पोटाश के उपयोग की सलाह दी गई है। डीएपी और पोटाश की पूरी मात्रा बुवाई या रोपाई से पहले डालने तथा यूरिया की पहली खुराक 30 से 35 दिन और दूसरी खुराक 60 से 70 दिन बाद देने की सिफारिश की गई है। साथ ही मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए हरी खाद और नील हरित काई के उपयोग पर भी जोर दिया गया है।

कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से अपील की है कि खेती से जुड़ी किसी भी तकनीकी समस्या या सलाह के लिए निकटस्थ कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि अनुसंधान केंद्र, कृषि महाविद्यालय अथवा कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क करें, ताकि समय पर उचित मार्गदर्शन लेकर खरीफ फसलों का बेहतर उत्पादन सुनिश्चित किया जा सके।

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