उत्तर प्रदेश में गन्ने की दो नई किस्मों की मिनी सीड किट की बुकिंग शुरू, पांच मिनट में बुक हुए दो लाख सिंगल बड
11 अक्टूबर 2026, लखीमपुर खीरी: उत्तर प्रदेश में गन्ने की दो नई किस्मों की मिनी सीड किट की बुकिंग शुरू, पांच मिनट में बुक हुए दो लाख सिंगल बड – उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद, शाहजहांपुर ने गन्ने की दो नई किस्मों की मिनी सीड किट की ऑनलाइन बुकिंग शुक्रवार सुबह 10 बजे से शुरू कर दी। बुकिंग शुरू होते ही किसानों ने इतनी तेजी से पंजीकरण कराया कि को.शा. 23232 किस्म के दो लाख सिंगल बड महज पांच मिनट में बुक हो गए।
इस बार किसानों को को.शा. 23232 किस्म के दो लाख और को.शा. 19231 किस्म के एक लाख सिंगल बड यानी कुल तीन लाख सिंगल बड उपलब्ध कराए जा रहे हैं। को.शा. 23232 किस्म को सितंबर में ही प्रदेश में खेती के लिए जारी किया गया है। परिषद के अनुसार यह किस्में अधिक उपज, बेहतर शर्करा प्रतिशत और रोग-कीट के प्रति ज्यादा प्रतिरोधक क्षमता वाली हैं।
गन्ना किसानों में इन दोनों किस्मों को लेकर उत्साह का सीधा कारण यह है कि बीज सीमित मात्रा में हैं, जबकि मांग करने वाले किसानों की संख्या कहीं ज्यादा है। लखीमपुर खीरी जैसे बड़े गन्ना उत्पादक जिले में बुकिंग शुरू होते ही वेबसाइट पर एक साथ बड़ी संख्या में किसान जुट गए, और कुछ ही मिनटों में को.शा. 23232 किस्म का पूरा कोटा बुक हो गया।
ऑनलाइन बुकिंग, एक किसान कोड पर एक ही मौका
बुकिंग सिर्फ enquiry.caneup.in वेबसाइट पर ऑनलाइन होगी, ऑफलाइन बुकिंग स्वीकार नहीं की जा रही। एक कृषक कोड से किसान केवल एक बार ही बुकिंग कर सकते हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा किसानों तक नई किस्म पहुंच सके।
बुकिंग पूरी होने पर किसान के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर चार अंकों का एक पंजीकरण नंबर भेजा जाता है। किट कब और कहां से मिलेगी, इसकी जानकारी भी बाद में मोबाइल पर संदेश के जरिए दी जाएगी। किट का वितरण अक्टूबर में ही प्रस्तावित मिठास मेला-2026 में किया जाना है, जिसकी तारीख बाद में घोषित होगी।
किट लेने के लिए किसान को वितरण वाले दिन अपना चार अंकों का पंजीकरण नंबर और आधार कार्ड की मूल प्रति साथ लानी होगी। मेले में काउंटर पर सत्यापन के बाद किसान को एक टोकन दिया जाएगा, और उस टोकन पर ही बीज वितरण काउंटर से मिनी सीड किट मिलेगी।
परिषद के निदेशक अभिषेक आनंद के मुताबिक नई किस्मों से किसानों को बेहतर उत्पादकता, अधिक शर्करा प्रतिशत और रोग-कीट प्रतिरोध का सीधा फायदा मिल सकता है। किट वितरण की पूरी व्यवस्था की जिम्मेदारी नोडल अधिकारी डॉ. अजय तिवारी को दी गई है।
यह पहल गन्ने में लाल सड़न रोग के एक बेहद नुकसानदेह प्रकार के जवाब में शुरू की गई है, जिसने पहले बड़े पैमाने पर उगाई जाने वाली को-0238 किस्म को प्रभावित किया था और तराई क्षेत्र व पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया था। नई किस्मों को इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए करीब दस साल की फील्ड टेस्टिंग के बाद किसानों के लिए जारी किया गया है।
गन्ना किसानों के लिए बीज की किस्म का चुनाव सीधे उनकी सालाना कमाई से जुड़ा होता है, क्योंकि बेहतर शर्करा प्रतिशत वाली किस्मों पर चीनी मिलों में अच्छा भाव और समय पर भुगतान मिलने की उम्मीद रहती है। यही वजह है कि जैसे ही नई, रोग-प्रतिरोधी किस्म बाजार में आने की खबर फैली, किसानों ने बुकिंग वेबसाइट खुलते ही तुरंत पंजीकरण करना शुरू कर दिया। जिन किसानों को इस बार सीमित मात्रा के कारण बीज नहीं मिल पाया, उनके पास अब भी अपने खेत के एक हिस्से में पुरानी, परखी हुई किस्मों पर निर्भर रहने का विकल्प बचा है।
मिनी सीड किट के जरिए बीज बांटने का यह तरीका खास तौर पर इसलिए अपनाया जाता है ताकि सीमित मात्रा में उपलब्ध नई किस्म को ज्यादा से ज्यादा किसानों के बीच बांटा जा सके। हर किसान को पूरे खेत के लिए नहीं, बल्कि शुरुआती मात्रा में ही बीज दिया जाता है, जिसे किसान अपने खेत के एक छोटे हिस्से में लगाकर आगे खुद बढ़ा सकते हैं। इस तरह एक-दो सीजन में ही नई, रोग-प्रतिरोधी किस्म धीरे-धीरे बड़े इलाके में फैलने लगती है, और किसान अगली बुवाई के लिए अपने ही खेत से बीज तैयार कर पाते हैं।
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