राज्य कृषि समाचार (State News)

रायसेन जिले के बासमती धान ने अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मचाई धूम, 47 देशों में हो रहा निर्यात

24 अक्टूबर 2025, रायसेन: रायसेन जिले के बासमती धान ने अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मचाई धूम, 47 देशों में हो रहा निर्यात – रायसेन जिले में बासमती धान का उत्पादन बढ़ाने और किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिलाने के लिए कलेक्टर श्री अरूण कुमार विश्वकर्मा ने विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि राइस उत्पादन की उत्पादकता बढ़ाने और निर्यात को प्रोत्साहित करने पर विशेष ध्यान दिया जाए। इसके लिए जमीनी स्तर पर कार्य किया जाएगा। धान की उत्पादकता बढ़ाने के लिए कृषि अधिकारियां द्वारा प्राथमिकता के आधार पर काम किया जाएगा।

जिले में मिलर्स, किसानों, एनआरएलएम और स्व-सहायता समूहों के साथ संगोष्ठियाँ आयोजित की जाएंगी ताकि उनकी समस्याओं को समझा जा सके और समाधान किया जा सके। जिले में किसानों को उन्नत और प्रमाणित बीजों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे धान की पैदावार में वृद्धि होगी। उन्होंने धान की जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को प्रोत्साहित और प्रशिक्षित करने के लिए कहा है, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होगा और उत्पाद की कीमत भी बेहतर मिलेगी। सिंचाई की सुविधाओं को बेहतर बनाया जाएगा।

किसानों को बाजार की कीमतों और रुझानों की नियमित जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे वे अपनी उपज सही समय पर बेच सकें। फसल कटाई के बाद किसानों के लिए भंडारण की सुविधाएँ बढ़ाई जाएंगी। उल्लेखनीय है कि रायसेन जिले के बासमती धान प्रदेश के अन्य जिलों के साथ ही दूसरे राज्यों में भी निर्यात की जाती है। प्रदेश सरकार द्वारा भी एक जिला एक उत्पाद के रूप में रायसेन जिले की बासमती धान को चिन्हित किये के बाद से जिला प्रशासन एवं किसान कल्याण तथा कृषि विभाग द्वारा उच्च गुणवत्ता बासमती धान के उत्पादन से लेकर विपणन तक के लिए समेकित प्रयास किए जा रहे हैं। जिसके परिणाम स्वरुप रायसेन जिले ने बासमती धान उत्पादन तथा बासमती चावल निर्यात में प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। जिले में धान का कुल रकबा 292000 हेक्टेयर है जिसमें से 243000 हैक्टेयर में बासमती धान की रोपाई की जाती है। जिले की औसत उत्पादकता 4120 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है जिससे लगभग 10 लाख मै.टन बासमती धान की उपज प्राप्त होती है।

जिले में मूल रूप से पूसा बासमती-1, पूसा-1121, पूसा-1637 पूसा-1886 किस्मों का उत्पादन किया जाता है। वर्तमान में रायसेन जिले अंतर्गत 29 औद्योगिक ईकाईयों द्वारा 7.31 लाख मै.टन धान की प्रोसेसिंग की जाती है। जिले में लगभग 21 लाख मैट्रिक टन भण्डारण क्षमता उपलब्ध है। अभी जिले में कुल 29 चावल प्रसंस्करण की इकाइयां हैं जिनमें से 7 इकाइयों को चिन्हित किया गया है जो की 47 देशों को निर्यात करते हैं। जिले में बासमती धान के उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि हेतु शासन द्वारा लगातार काम किया जा रहा है।

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47 देशों में निर्यात किया गया बासमती धान

धान की उत्पादकता बढ़ाने के लिए विभागीय योजनाओं में बासमती धान की नवीन किस्मों पूसा-1637, पूसा-1728, आदि रोग प्रतिरोधी किस्मों को बढावा देकर उत्पादन में वृद्धि की जा रही है। इसके अतिरिक्त एफएलडी (प्रथम पंक्ति प्रदर्शन) के माध्यम से नवीन किस्मों एवं पद्धतियों का विस्तार कर उत्पादन में वृद्धि की जा रही है। इसके अतिरिक्त किसान खेत पाठशाला एवं आत्मा अंतर्गत विभिन्न प्रशिक्षणों के माध्यम से कृषकों एवं उत्पादक संगठनों को गुणवत्ता पूर्ण धान उत्पादन हेतु नियमित रूप से प्रशिक्षित किया जा रहा है। जिले में वर्ष अप्रेल 25 तक 7 औद्योगिक ईकाईयों के माध्यम से 1805.7956 करोड़ मूल्य की 190601.582 मै.टन बासमती चावल यू.के, यूएस, ऑस्ट्रेलिया, दुबई, अफ्रीका, यूरोप, स्वीडन सहित 47 देशों में निर्यात किया गया है।

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इन औद्योगिक इकाइयों में मेसर्स रेवा राईस मिल प्रा.लि. ग्राम चिखली तहसील उदयपुरा, मेसर्स टीएसएस फूड्स ग्राम बम्होरी जिला रायसेन, मेसर्स सागर राईस मिल ग्राम तामोट तहसील गौहरगंज, मेसर्स श्रीनाथ राईस मिल ग्राम पुरेना वीरान उदयपुरा, मेसर्स मेजेस्टिक बासमती राईस प्रालि. मेसर्स दावत फूडस प्रा.लि. मण्डीदीप तथा मेसर्स फारच्यून राईस लेंड द्वारा धान का विदेशों में निर्यात किया जा रहा है।

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