विदिशा में बलराम कृषि महोत्सव का आयोजन, 3500 किसान हुए शामिल; उन्नत खेती और कृषि नवाचारों पर हुआ सीधा संवाद
17 अगस्त 2026, विदिशा: विदिशा में बलराम कृषि महोत्सव का आयोजन, 3500 किसान हुए शामिल; उन्नत खेती और कृषि नवाचारों पर हुआ सीधा संवाद – किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, नवाचारों और शासन की किसान हितैषी योजनाओं से जोड़ने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश के विदिशा जिले की मिर्जापुर कृषि उपज मंडी में बलराम कृषि महोत्सव 2026 का आयोजन किया गया। महोत्सव में जिले के सभी विकासखंडों से करीब 3500 किसान और उन्नतशील कृषक शामिल हुए।
महोत्सव की शुरुआत तिरंगा ट्रैक्टर रैली से हुई। विवेकानंद चौराहे से शुरू हुई रैली शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए मिर्जापुर मंडी पहुंची। विदिशा विधायक मुकेश टंडन स्वयं ट्रैक्टर चलाकर रैली में शामिल हुए। तिरंगे से सजे ट्रैक्टरों के साथ किसानों ने देशभक्ति और कृषि विकास का संदेश दिया।
कार्यक्रम में विधायक मुकेश टंडन ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वर्ष 2026 को कृषि वर्ष घोषित किया है। इसका उद्देश्य किसानों को खेती से जुड़ी सुविधाएं सुगमता से उपलब्ध कराना और उनकी आय बढ़ाने के लिए किसान हितैषी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है।
जिला पंचायत अध्यक्ष गीता कैलाश रघुवंशी ने किसानों से कृषि क्षेत्र में हो रहे नवाचारों को अधिक से अधिक अपनाने और जैविक खेती को बढ़ावा देने का आह्वान किया। कार्यक्रम में किसान मोर्चा संघ के महामंत्री कप्तान सिंह यादव, खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के उपाध्यक्ष डॉ. राकेश जादौन और श्याम सुंदर शर्मा ने भी संबोधित किया।
उन्नतशील किसानों से हुआ सीधा संवाद
महोत्सव में किसानों से खरीफ, रबी और जायद फसलों की उन्नत तकनीक, उत्पादन बढ़ाने और लागत कम करने जैसे विषयों पर सीधा संवाद किया गया। कृषि वैज्ञानिकों ने रोग-कीट प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य, संतुलित उर्वरक उपयोग और उन्नत कृषि तकनीकों की जानकारी दी।
महोत्सव में कृषि, पशुपालन, उद्यानिकी, मत्स्य पालन और आजीविका मिशन सहित विभिन्न विभागों के स्टॉल लगाए गए। IFFCO, KRIBHCO और PNB Training Centre ने भी किसानों को कृषि तकनीकों और संसाधनों की जानकारी दी। आधुनिक कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी भी किसानों के आकर्षण का केंद्र रही।
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को नई तकनीक अपनाने, फसल में रोग-कीट की समय पर पहचान और संतुलित उर्वरक उपयोग की सलाह दी। साथ ही पशुपालन, उद्यानिकी और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों को अपनाकर अतिरिक्त आय के स्रोत विकसित करने के लिए भी प्रेरित किया गया।
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