धान का कटोरा बालाघाट, किसानों की मेहनत ने बनाया प्रदेश में अव्वल
03 नवंबर 2026, बालाघाट: धान का कटोरा बालाघाट, किसानों की मेहनत ने बनाया प्रदेश में अव्वल – मध्यप्रदेश की कृषि पहचान में बालाघाट जिले का अपना विशिष्ट स्थान है। यहां की उपजाऊ भूमि, अनुकूल कृषि परिस्थितियां और मेहनतकश किसानों ने जिले को प्रदेश के प्रमुख धान उत्पादक क्षेत्रों में स्थापित किया है। यही वजह है कि बालाघाट को मध्यप्रदेश का ‘धान का कटोरा’ कहा जाता है। इस वर्ष जिले ने धान उपार्जन के मामले में नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए पूरे प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। जिले में 60 लाख क्विंटल धान का उपार्जन किया गया है। यह उपलब्धि केवल सरकारी आंकड़ा नहीं, बल्कि किसानों के परिश्रम, कृषि के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और खेती में आ रहे बदलावों का परिणाम है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन से बालाघाट की कृषि उपज मंडी गोंगलई में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुए जिले के किसानों की उपलब्धि की सराहना की। उन्होंने कहा कि वीरता, त्याग और पराक्रम की गौरवशाली परंपरा वाला बालाघाट खनिज संपदा और अपने विशिष्ट खान-पान के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। जिले की पहचान यहां के प्रसिद्ध चिन्नौर चावल से भी जुड़ी हुई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बालाघाट के मेहनती किसानों ने अपनी प्रगतिशील सोच और परिश्रम से कृषि क्षेत्र में नई मिसाल कायम की है। धान उत्पादन के साथ-साथ यहां के किसान कोदो और अन्य श्रीअन्न के उत्पादन में भी अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। यह बदलाव कृषि विविधीकरण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। परंपरागत खेती के साथ मोटे अनाज का उत्पादन बढ़ना किसानों की आय के नए रास्ते खोल सकता है।
दरअसल, बदलते समय में खेती के सामने कई चुनौतियां हैं। मौसम की अनिश्चितता, उत्पादन लागत में वृद्धि, सिंचाई और बाजार की समस्याओं के बीच किसानों को बेहतर उत्पादन के लिए लगातार प्रयास करने पड़ रहे हैं। ऐसे में बालाघाट की उपलब्धि दूसरे कृषि प्रधान जिलों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है। हालांकि केवल अधिक उपार्जन ही किसानों की समृद्धि का आधार नहीं हो सकता। उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य, समय पर भुगतान, भंडारण की सुविधा और बाजार तक बेहतर पहुंच मिलना भी जरूरी है।
बलराम कृषि महोत्सव में मुख्यमंत्री ने प्रगतिशील किसानों और विभिन्न कृषि योजनाओं के विजेताओं से आत्मीय संवाद कर उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दीं। ऐसे आयोजन किसानों को नई तकनीक, उन्नत कृषि पद्धतियों और सरकारी योजनाओं से जोड़ने का माध्यम बन सकते हैं।
बालाघाट ने 60 लाख क्विंटल धान उपार्जन के साथ प्रदेश में अपनी अग्रणी स्थिति दर्ज कराई है। अब आवश्यकता इस उपलब्धि को स्थायी कृषि विकास में बदलने की है, ताकि धान के साथ चिन्नौर चावल, कोदो और अन्य श्रीअन्न भी जिले की आर्थिक पहचान को और मजबूत बना सकें।
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