बालाघाट : अर्जुन ने अपनाई प्राकृतिक एवं समन्वित खेती
28 अक्टूबर 2026, बालाघाट: बालाघाट : अर्जुन ने अपनाई प्राकृतिक एवं समन्वित खेती – खेती में नवाचार और विविधीकरण अपनाकर किसान अपनी आमदनी बढ़ाने के साथ खेती को अधिक टिकाऊ बना सकते हैं। इसका उदाहरण लालबर्रा विकासखंड के ग्राम कनकी के कृषक श्री अर्जुन ठकरेले हैं, जिन्होंने परंपरागत धान, गेहूं एवं चना की खेती के स्थान पर प्राकृतिक खेती, फल-सब्जियों की अंतरवर्तीय खेती और मुर्गी पालन को अपनाकर समन्वित कृषि की दिशा में कदम बढ़ाया है। वे पिछले दो वर्षों से इस पद्धति से खेती कर रहे हैं। उनका प्रयास है कि खेत में ऐसी फसलें लगाई जाएं, जिनसे वर्षभर अलग-अलग समय पर उत्पादन प्राप्त होता रहे और आय के अवसर बने रहें।
एक ही खेत में कई प्रकार की फसलें – कृषक अर्जुन ठकरेले ने खेती में विविधता लाने के उद्देश्य से बहुमंजिला खेती की पद्धति अपनाई है। इसके अंतर्गत उन्होंने अपने खेत में केला, नारियल, आम, चीकू, अमरूद और सहजन जैसे पौधे लगाए हैं। इसके साथ ही सूरन (जिमीकंद) और हल्दी जैसी फसलों की खेती भी कर रहे हैं। इस प्रकार उन्होंने एक ही खेत में विभिन्न ऊंचाइयों पर विकसित होने वाले फलदार पौधों और अन्य फसलों को स्थान देकर उपलब्ध भूमि का बेहतर उपयोग करने का प्रयास किया है। बहुमंजिला खेती एवं अंतरवर्तीय फसल प्रणाली का उद्देश्य खेत की जगह का अधिकतम उपयोग करना और अलग-अलग फसलों से विभिन्न समय पर उत्पादन प्राप्त करना है। इससे किसी एक फसल पर निर्भरता कम करने तथा खेती से आय के अनेक अवसर विकसित करने में मदद मिल सकती है।
प्राकृतिक खेती के साथ मुर्गी पालन भी – अर्जुन ठकरेले केवल फल एवं सब्जियों की खेती तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्होंने मुर्गीपालन को भी अपनी कृषि गतिविधियों में शामिल किया है। फसल उत्पादन के साथ पशुधन आधारित गतिविधियों को जोड़ना समन्वित कृषि का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस तरह की व्यवस्था किसानों को अपनी कृषि गतिविधियों में विविधता लाने और आय के वैकल्पिक स्रोत विकसित करने का अवसर देती है।
अधिकारियों ने खेत का भ्रमण कर देखी खेती की पद्धति – परियोजना संचालक आत्मा डॉ. रामनाथ पटेल एवं जिला सहकारी बैंक बालाघाट के पूर्व महाप्रबंधक श्री आरसी पटले ने गत दिनों ग्राम कनकी पहुंचकर कृषक अर्जुन ठकरेले के खेत का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने प्राकृतिक खेती, फल एवं सब्जियों की अंतरवर्तीय खेती तथा बहुमंजिला खेती की पद्धति का अवलोकन किया। कृषक द्वारा अपनाई जा रही समन्वित कृषि गतिविधियों की जानकारी भी प्राप्त की।
अन्य किसानों के लिए प्रेरणादायक पहल – कृषक अर्जुन ठकरेले का प्रयास बताता है कि किसान परंपरागत फसलों के साथ-साथ प्राकृतिक खेती, फलोद्यान, सब्जी उत्पादन और मुर्गी पालन जैसी गतिविधियों को अपनाकर खेती को विविधतापूर्ण बना सकते हैं। हालांकि, फसलों का चयन स्थानीय जलवायु, मिट्टी, सिंचाई की उपलब्धता और बाजार की मांग के अनुरूप करना आवश्यक है। समन्वित कृषि पद्धति अपनाने से किसानों को उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने और आय के नए अवसर विकसित करने में मदद मिल सकती है। अर्जुन ठकरेले की यह पहल क्षेत्र के अन्य किसानों को भी खेती में नए प्रयोग करने तथा परंपरागत कृषि के साथ वैकल्पिक गतिविधियां अपनाने के लिए प्रेरित करती है।
कृषक अर्जुन ठकरेले का प्रयास बताता है कि किसान परंपरागत फसलों के साथ-साथ प्राकृतिक खेती, फलोद्यान, सब्जी उत्पादन और मुर्गी पालन जैसी गतिविधियों को अपनाकर खेती को विविधतापूर्ण बना सकते हैं। हालांकि, फसलों का चयन स्थानीय जलवायु, मिट्टी, सिंचाई की उपलब्धता और बाजार की मांग के अनुरूप करना आवश्यक है। समन्वित कृषि पद्धति अपनाने से किसानों को उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने और आय के नए अवसर विकसित करने में मदद मिल सकती है। अर्जुन ठकरेले की यह पहल क्षेत्र के अन्य किसानों को भी खेती में नए प्रयोग करने तथा परंपरागत कृषि के साथ वैकल्पिक गतिविधियां अपनाने के लिए प्रेरित करती है।
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