Ad DesktopAd TabletAd Mobile
राज्य कृषि समाचार (State News)

डेयरी उद्योग को लेकर एसोसिएशन अध्यक्ष सोढ़ी ने कही ये बड़ी बात

01 सितम्बर 2025, भोपाल: डेयरी उद्योग को लेकर एसोसिएशन अध्यक्ष सोढ़ी ने कही ये बड़ी बात – भारत भर के कई शहरों और गांवों में डेयरी उद्योगों का संचालन होता है और इससे न केवल किसानों को लाभ होता है वहीं देश की आर्थिक समृद्धि में भी यह सहायक है। हाल ही में हैदराबाद में आयोजित सीएलएफएमए के वार्षिक सम्मेलन में इंडियन डेयरी एसोसिएशन के अध्यक्ष आरएस सोढ़ी ने इस उद्योग को लेकर बड़ी बात कही है।

इंडियन डेयरी एसोसिएशन के अध्यक्ष आरएस सोढ़ी ने कहा है कि भारत को अपने डेयरी उद्योग की हर हाल में सुरक्षा करनी चाहिए, क्योंकि यह सीधे तौर पर 8 करोड़ परिवारों की रोज़ी-रोटी से जुड़ा है।   सोढ़ी ने कहा कि अमेरिका में डेयरी सिर्फ बिजनेस है, जहां केवल 25 हजार बड़े किसान बचे हैं, जबकि भारत में करोड़ों छोटे किसान इस सेक्टर पर निर्भर हैं।

सोढ़ी ने अनुमान लगाया कि 2047 तक भारत 628 मिलियन टन दूध का उत्पादन करेगा, जो दुनिया के कुल उत्पादन का लगभग 45% होगा। इसमें से करीब 100 मिलियन टन अधिशेष रहेगा और वैश्विक डेयरी व्यापार का दो-तिहाई हिस्सा भारत से हो सकता है। उन्होंने कहा कि दूध के दाम लगातार बढ़ाना संभव नहीं है, क्योंकि अगर कीमतें बहुत बढ़ेगी तो खपत कम हो जाएगी। सोढ़ी के अनुसार, किसानों की आय बढ़ाने का तरीका दूध के दाम बढ़ाना नहीं, बल्कि उत्पादन बढ़ाना है। इसके लिए अच्छी नस्ल के पशु, बेहतर चारा और आधुनिक तकनीक की जरूरत है। उन्होंने कहा कि चारे की लागत दूध उत्पादन का 70% होती है। अगर प्रति किलो चारा से अधिक दूध निकाला जाए तो किसान की कमाई बढ़ेगी और उपभोक्ता पर अतिरिक्त बोझ भी नहीं पड़ेगा।

Ad DesktopAd TabletAd Mobile
Ad DesktopAd TabletAd Mobile

(नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़,  टेलीग्राम, व्हाट्सएप्प)

(कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें)

कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें:

कृषक जगत को व्हाट्सएप पर फॉलो करें
खेती-किसानी की ताज़ा खबरें, सीधे आपके फ़ोन पर
चैनल फॉलो करें

www.krishakjagat.org/kj_epaper/

कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें:

www.global-agriculture.com