राज्य कृषि समाचार (State News)

अश्वगंधा की खेती ने बदली किसान अरविंद की तकदीर, सिर्फ 16,500 रुपए की लागत में मिला 2 लाख से ज्यादा का मुनाफा

23 अगस्त 2026, भोपाल: अश्वगंधा की खेती ने बदली किसान अरविंद की तकदीर, सिर्फ 16,500 रुपए की लागत में मिला 2 लाख से ज्यादा का मुनाफा – मध्यप्रदेश के दमोह जिले जिले के छोटे से गांव भाटखमरिया के किसान अरविंद सिंह लोधी ने पारंपरिक खेती से हटकर औषधीय फसल अश्वगंधा की खेती को अपनाकर कमाई का नया रास्ता तैयार किया है। सोयाबीन, गेहूं और चना जैसी पारंपरिक फसलों में मेहनत के बावजूद सीमित आमदनी होने के बाद उन्होंने अपने बेटे ओम लोधी की सलाह पर अश्वगंधा की खेती शुरू की। खास बात यह है कि इसके लिए उन्होंने अपनी जमीन का इंतजार नहीं किया, बल्कि 12 एकड़ जमीन ठेके पर लेकर खेती शुरू की।

ओम लोधी पेशे से इंजीनियर हैं। उन्होंने पारंपरिक खेती से अलग हटकर औषधीय फसलों की संभावनाओं को समझते हुए पिता को अश्वगंधा की खेती करने का सुझाव दिया। इसके बाद पिता-पुत्र ने मिलकर वैज्ञानिक तरीके से खेती की योजना बनाई और कम लागत में बेहतर उत्पादन का लक्ष्य रखा।

16,500 रुपए प्रति एकड़ लागत

अश्वगंधा की खेती में प्रति एकड़ करीब 16,500 रुपए की लागत आई। किसानों ने खेती के साथ बाजार को भी ध्यान में रखा और उपज की बिक्री के लिए सीधे बल्क बायर से जुड़ने की रणनीति अपनाई। इससे फसल बेचने के लिए बाजार पर निर्भरता कम हुई और बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बनी।

एक एकड़ से 2 लाख से ज्यादा कमाई

उपलब्ध जानकारी के अनुसार अश्वगंधा की सूखी जड़ का उत्पादन प्रति एकड़ करीब 4 से 6 क्विंटल रहा। इसकी बिक्री दर करीब 350 से 450 रुपए प्रति किलो बताई गई। इससे प्रति एकड़ कुल आय 2.3 लाख रुपए से अधिक पहुंची और शुद्ध लाभ 2 लाख रुपए से ज्यादा रहा। खास बात यह रही कि कमाई केवल अश्वगंधा की जड़ से नहीं हुई। किसान ने बीज, पत्ती और तने को भी बेचकर अतिरिक्त आय हासिल की। इस तरह फसल के अलग-अलग हिस्सों का उपयोग कर कुल आमदनी बढ़ाने की कोशिश की गई।

पारंपरिक खेती से अलग अपनाया रास्ता

अरविंद सिंह लोधी पहले सोयाबीन, गेहूं और चना जैसी पारंपरिक फसलों की खेती करते थे। इन फसलों में मेहनत अधिक होने के बावजूद मौसम और बाजार की परिस्थितियों के कारण आमदनी सीमित रह जाती थी। इसी वजह से पिता-पुत्र ने फसल के विकल्पों पर विचार किया और अश्वगंधा की खेती को चुना। उनकी यह पहल बताती है कि खेती में फसल का सही चयन, लागत प्रबंधन और बाजार की समझ कमाई बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। खासकर औषधीय फसलों की खेती किसानों के लिए अतिरिक्त आय का विकल्प बन सकती है।

ठेके की जमीन पर तैयार किया मॉडल

अरविंद सिंह लोधी के पास खुद की जमीन न होने के बावजूद उन्होंने 12 एकड़ जमीन ठेके पर लेकर खेती शुरू की। इसके बाद वैज्ञानिक तरीके और बाजार की रणनीति के साथ अश्वगंधा की खेती की। उनकी सफलता यह दिखाती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद सही योजना और मेहनत के जरिए खेती को लाभ का व्यवसाय बनाया जा सकता है।

उनकी इस पहल से क्षेत्र के दूसरे किसानों को भी पारंपरिक फसलों के साथ औषधीय और अन्य लाभकारी फसलों के विकल्पों पर विचार करने की प्रेरणा मिल रही है I

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