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राज्य कृषि समाचार (State News)

भोपाल के अरुण राठौर ने बायोफ्लॉक से शुरू किया मछली पालन, अब फिश फीड बेचकर भी बढ़ा रहे आमदनी  

03 अक्टूबर 2026, भोपाल: भोपाल के अरुण राठौर ने बायोफ्लॉक से शुरू किया मछली पालन, अब फिश फीड बेचकर भी बढ़ा रहे आमदनी – पारंपरिक व्यवसाय के साथ आमदनी बढ़ाने का अवसर तलाश रहे ग्राम शेरपुर निवासी अरुण राठौर के लिए मत्स्य पालन एक लाभकारी पहल साबित हुआ। उन्होंने आधुनिक बायोफ्लॉक तकनीक से मछली पालन शुरू किया और इसके साथ फिश फीड यानी मछलियों के आहार की बिक्री का काम भी जोड़ लिया। इससे उन्हें अतिरिक्त आय का जरिया मिला और आसपास के मत्स्य पालकों को स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण फिश फीड उपलब्ध होने लगा।

बायोफ्लॉक तकनीक से शुरू किया मछली पालन

मत्स्य पालन शुरू करने के लिए अरुण राठौर ने सहायक संचालक मत्स्य विभाग, सीहोर के कार्यालय से संपर्क किया। इसके बाद उन्होंने मत्स्य पालन को अतिरिक्त आय के साधन के रूप में अपनाने का निर्णय लिया और बायोफ्लॉक पोंड तकनीक से मछली पालन शुरू किया। बायोफ्लॉक तकनीक में सीमित क्षेत्र में नियंत्रित जल व्यवस्था के साथ मछली पालन किया जाता है। इसमें पानी की गुणवत्ता बनाए रखना, पर्याप्त ऑक्सीजन की उपलब्धता और मछलियों के आहार का नियमित प्रबंधन जरूरी होता है। शुरुआत में ये सभी चीजें उनके लिए नई थीं।

शुरुआती चुनौतियों से अनुभव के जरिए निपटा

मछली पालन शुरू करने के बाद अरुण राठौर के सामने कई तरह की चुनौतियां आईं। मछलियों को उचित आहार देना, पानी की गुणवत्ता बनाए रखना, तकनीकी प्रबंधन समझना और तैयार मछलियों के लिए बाजार तलाशना उनके लिए नया अनुभव था। उन्होंने नियमित देखरेख और अनुभव के साथ इन चुनौतियों को संभाला। धीरे-धीरे मछलियों की वृद्धि बेहतर होने लगी और तैयार मछली को बाजार में उचित मूल्य मिलने लगा। मछली पालन से मिले इन सकारात्मक परिणामों ने उन्हें अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।

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आसपास के मत्स्य पालकों की जरूरत को बनाया अवसर

मछली पालन के दौरान अरुण राठौर ने महसूस किया कि आसपास के दूसरे मत्स्य पालकों को भी गुणवत्तापूर्ण फिश फीड की जरूरत रहती है। स्थानीय स्तर पर इस जरूरत को देखते हुए उन्होंने मछली पालन के साथ फिश फीड बेचने का काम भी शुरू कर दिया। इससे उनके पास आय के दो साधन हो गए। एक तरफ मछली उत्पादन से आमदनी होने लगी, वहीं दूसरी ओर फिश फीड की बिक्री से अतिरिक्त आय मिलने लगी। साथ ही, आसपास के मत्स्य पालकों को भी मछलियों के आहार के लिए स्थानीय स्तर पर सुविधा मिलने लगी।

उत्पादन के साथ जुड़ा कारोबार भी बढ़ाया

अरुण राठौर की पहल यह दिखाती है कि किसी एक व्यवसाय से जुड़े दूसरे अवसरों को पहचानकर आमदनी के नए रास्ते बनाए जा सकते हैं। उन्होंने बायोफ्लॉक तकनीक से मछली उत्पादन शुरू करने के बाद उसी क्षेत्र से जुड़ी फिश फीड की जरूरत को समझा और उसे अपने व्यवसाय का हिस्सा बना लिया।

उनकी यह पहल आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल, नियमित देखरेख और बाजार की जरूरत को समझकर व्यवसाय को आगे बढ़ाने का उदाहरण है। मछली उत्पादन के साथ उससे जुड़े कारोबार को अपनाकर उन्होंने अपनी आय बढ़ाने का प्रयास किया, वहीं आसपास के अन्य मत्स्य पालकों की फिश फीड संबंधी जरूरतों को पूरा करने में भी सहयोग किया।

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