खेती का गजब फॉर्मूला! किसान ने एक ही खेत में उगा दिए अमरूद, अदरक और अरहर, अब तीन फसलों से हो रही तगड़ी कमाई
14 जुलाई 2026, भोपाल: खेती का गजब फॉर्मूला! किसान ने एक ही खेत में उगा दिए अमरूद, अदरक और अरहर, अब तीन फसलों से हो रही तगड़ी कमाई – धान का कटोरा कहे जाने वाले बालाघाट जिले में अब किसान पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर आधुनिक कृषि तकनीकों को अपना रहे हैं। लालबर्रा विकासखंड के ग्राम अमोली के प्रगतिशील किसान राजेन्द्र पंचेश्वर ने धान की पारंपरिक खेती की जगह बागवानी और मल्टी लेयर (अंतर्वर्ती) खेती का मॉडल अपनाकर नई मिसाल पेश की है। एक ही खेत में अमरूद के साथ अदरक और अरहर की खेती कर उन्होंने यह दिखाया है कि सीमित संसाधनों में भी खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।
धान की जगह अपनाई मल्टी लेयर खेती
राजेन्द्र पंचेश्वर ने अपनी एक एकड़ भूमि पर धान की खेती छोड़कर अमरूद का बाग तैयार किया। इसके साथ ही उन्होंने अमरूद के पौधों के बीच खाली स्थान का उपयोग अदरक और अरहर जैसी अंतर्वर्ती फसलों की खेती के लिए किया। कृषि विशेषज्ञों ने उन्हें खेत की उपलब्ध जगह का बेहतर उपयोग करने के लिए भविष्य में मक्का की खेती भी शामिल करने की सलाह दी है, जिससे एक ही खेत से कई फसलों का उत्पादन लिया जा सके।
इस नवाचार को सफल बनाने में कृषि विभाग की अहम भूमिका रही है। उप संचालक कृषि फूलसिंह मालवीय के अनुसार लालबर्रा की वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी और ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी लगातार किसान के संपर्क में हैं। विभाग की ओर से अंतर्वर्ती फसल प्रणाली, फसल प्रबंधन और उत्पादन बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक सलाह दी जा रही है, ताकि यह मॉडल अन्य किसानों के लिए भी उपयोगी साबित हो सके।
मल्टी लेयर खेती के कई फायदे
विशेषज्ञों के अनुसार मल्टी लेयर खेती से एक ही खेत में अलग-अलग फसलें लेकर भूमि का बेहतर उपयोग किया जा सकता है। धान की तुलना में अमरूद, अदरक और अरहर जैसी फसलों में अपेक्षाकृत कम पानी की आवश्यकता होती है, जिससे जल संरक्षण में भी मदद मिलती है। साथ ही किसान की आय के कई स्रोत विकसित होते हैं और किसी एक फसल पर निर्भरता कम हो जाती है। विभिन्न फसलों की खेती से मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में भी सहायता मिलती है।
दूसरे किसानों के लिए बना प्रेरणादायी मॉडल
राजेन्द्र पंचेश्वर का यह प्रयोग क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा बन रहा है। कृषि विभाग का मानना है कि यदि किसान वैज्ञानिक सलाह के साथ बागवानी और अंतर्वर्ती खेती जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाएं, तो कम लागत में बेहतर उत्पादन और अधिक आय प्राप्त की जा सकती है। बालाघाट के कई किसान अब इस मॉडल को देखकर अपनी खेती में भी विविधता लाने की दिशा में रुचि दिखा रहे हैं।
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