राज्य कृषि समाचार (State News)

सोयाबीन पर एआईसीआरपीएस की वार्षिक समूह बैठक पालमपुर में संपन्न

22 फ़रवरी 2025, इंदौर: सोयाबीन पर एआईसीआरपीएस की वार्षिक समूह बैठक पालमपुर में संपन्न –  सोयाबीन पर अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (एआईसीआरपीएस) की तीन दिवसीय वार्षिक समूह बैठक गत दिनों चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर में आयोजित की गई। इस बैठक में सोयाबीन उगाने वाले प्रमुख राज्यों के 60 से अधिक वैज्ञानिकों ने भाग लिया। आईसीएआर के सहायक महानिदेशक (तिलहन और दलहन), डॉ. संजीव गुप्ता और इंदौर स्थित आईसीएआर-राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. के.एच. सिंह ने 2024-25 के दौरान देश भर में किए गए विभिन्न परीक्षणों और प्रयोगों की प्रगति और उपलब्धियों की समीक्षा की।

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डॉ बी यू दुपारे, प्रधान वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष प्रेस एवं मीडिया समिति,भा.कृ.अनु.प.-राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान,इंदौर द्वारा दी गई जानकारी अनुसार समापन सत्र के दौरान, सीसीएसएचपीकेवी पालमपुर के कुलपति डॉ. नवीन कुमार ने मानव जाति और पशुधन दोनों के लिए सोयाबीन के महत्व के बारे में जानकारी दी और नए तरीकों और किस्मों का उपयोग करके सोयाबीन खेती की खेती की पद्धतियों और साधनों के बारे में जागरूकता फैलाने का आग्रह किया। आईसीएआर एनएसआरआई के निदेशक डॉ. केएच सिंह ने सोयाबीन वैज्ञानिकों के प्रयासों की सराहना की और हाल के वर्षों में अनुभव की जा रही जलवायु प्रतिकूलताओं के कारण अस्थिर  उत्पादकता  और आगे की चुनौतियों के लिए अपनी चिंता भी व्यक्त की। इस अवसर पर आयोजित किस्म पहचान समिति की एक विशेष बैठक में जेएनकेवीवी, जबलपुर के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित जेएस 24-33 की मध्य भारत में खेती के लिए पहचान करने प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।

 इस अवसर पर डॉ. संजीव गुप्ता ने खाद्य गुणों के लिए उपयुक्त सोयाबीन किस्मों को विकसित करने के लिए वैज्ञानिकों के प्रयासों की सराहना की, लेकिन साथ ही सोयाबीन में ओलिक एसिड की मात्रा बढ़ाने, तथा कृषकों के स्तर पर सोयाबीन की उत्पादकता बढ़ाने के लिए मोलिब्डेनम और बोरोन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों के उपयोग करने एवं  चारकोल रॉट, येलो मोजेक रोग जैसी बीमारियों के लिए प्रतिरोधी किस्मों को विकसित करने का भी आग्रह किया।

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