Ad DesktopAd TabletAd Mobile
राज्य कृषि समाचार (State News)

आगर मालवा: कृषि विभाग का अमला पहुंचा किसानों के खेतों पर, कीट बीमारी से बचाव की सलाह

11 सितंबर 2026,  आगर मालवा: आगर मालवा: कृषि विभाग का अमला पहुंचा किसानों के खेतों पर, कीट बीमारी से बचाव की सलाह – आगर-मालवा जिले में वर्तमान समय में सोयाबीन फसल दाना भरने की अवस्था में हैं। इस अवस्था में फसल की नियमित निगरानी एवं समय पर रोग-कीट प्रबंधन करना आवश्यक है। कृषि विभाग मैदानी अमला जिले के विभिन्न ग्रामों में किसानों के खेतों पर जाकर फसल निरीक्षण कर फसल को  कीट / बीमारी से बचाव की किसानों को सलाह दी है कि वे अपने खेतों का नियमित निरीक्षण करें तथा रोग अथवा कीट के प्रारंभिक लक्षण दिखाई देने पर तत्काल नियंत्रण उपाय अपनाएं ।

सोयाबीन फसल में वर्तमान मौसम परिस्थितियों में पर्ण झुलसा (रायजोक्टोनिया एरियल ब्लाइट) रोग का प्रकोप देखा जा सकता है। इस रोग की शुरुआत पत्तियों पर पानी जैसे धब्बों के रूप में होती है तथा समय पर नियंत्रण नहीं होने पर पौधे पूर्णतः सूख सकते हैं। रोग के लक्षण दिखाई देने पर फ्लुक्सापायोक्साड + पायराक्लोस्ट्रोबिन (300 मि.ली./हेक्टेयर) अथवा पायराक्लोस्ट्रोबिन इपोक्सीकोनाजोल (750  मि.ली./हेक्टेयर) का छिड़काव करने की सलाह दी गई है । इसी प्रकार एन्थेक्नोज (श्याम वर्णी रोग) भी सोयाबीन की एक प्रमुख फफूंद जनित बीमारी है। इस रोग
में शुरुआत में  पत्ती , डंठल और फलियों पर अनियमित  भरे रंग के धब्बे दिखाई देते हैं। बरसात में यह तेजी से  फैलती  है, जिससे धब्बे काले पड़ जाते  हैं  व पत्तियां मुड़कर समय से पहले ही गिर जाती हैं तथा संक्रमण बढ़ने पर पूरा पौधा प्रभावित होकर सूख सकता है। रोग की प्रारंभिक अवस्था में कार्बेन्डाजिम 12 प्रतिशत + मैंकोजेब  63 प्रतिशत डब्ल्यूपी (1.25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर) अथवा टेबुकोनाजोल 25.9 ईसी या 38.39 एससी (625 मि.ली. प्रति हेक्टेयर) का छिड़काव प्रभावी पाया गया है ।

कृषकों को पीला मोजेक रोग एवं सोयाबीन मोजेक रोग के प्रति भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है। इस रोग में पत्तियों पर चमकदार पीलापन शिराओं के पास पीले बैंड और पुरानी पत्तियों पर जंग जैसे कत्थई धब्बे दिखने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। रोगग्रस्त पौधों को प्रारंभिक अवस्था में ही खेत से उखाड़कर नष्ट कर दें तथा रोग फैलाने वाले वाहक कीटों, विशेषकर सफेद मक्खी एवं एफिड के नियंत्रण हेतु अनुशंसित कीटनाशकों जैसे पूर्व मिश्रित कीटनाशक थायोमिथोक्सम 12.60% + लेम्ब्डा सायहेलोथिन 09.50% ZC@125 ML  प्रति हेक्टेयर  का उपयोग करें। साथ ही खेत   में विभिन्न स्थानों पर पीले स्टिकी ट्रैप लगाएं, जिससे सफेद मक्खी की संख्या नियंत्रित की जा सके ।

Ad DesktopAd TabletAd Mobile
Ad DesktopAd TabletAd Mobile

फफूंद जनित रोगों से बचाव के लिए किसानों को पलुक्सापायोक्साड पायराक्लोस्ट्रोबिन (300 ग्राम प्रति   हेक्टेयर  ) का सुरक्षात्मक छिड़काव करने तथा छिड़काव के समय पर्याप्त मात्रा में पानी का उपयोग करने की सलाह दी गई है। नैपसैक स्प्रेयर से प्रति हेक्टेयर लगभग 500 लीटर तथा ट्रैक्टर चलित पावर स्प्रेयर से न्यूनतम 200 लीटर पानी का उपयोग किया जाना चाहिए । पत्ती खाने वाली इल्लियां जैसे तम्बाकू व चने की इल्ली व सेमीलूपर के नियंत्रण हेतु स्पायनेटोरम 11.7  SC (450 मिली प्रति हेक्टेयर या क्लोरएन्ट्रानितिप्रोल 18.5% SC (150 मिली प्रति हेक्टेयर) या लेम्ब्डा सायहेलोथिन 4.90% CS (300 मिली. प्रति हैक्‍टयर) का छिड़काव करें ।

कृषक जगत को व्हाट्सएप पर फॉलो करें
खेती-किसानी की ताज़ा खबरें, सीधे आपके फ़ोन पर
चैनल फॉलो करें

चक्र भृंग (गर्डल बीटल) :- पौधे की शाखा या मुख्य तने पर दिखाई पड़ते हैं, दल्ले काटने के कारण पौधे का  ऊपरी  हिस्सा सूखने लगता है, पत्तियां और टहनियां मुरझाकर भूरी या पीली पड़ जाती है व सूख जाती है, इससे नियंत्रण हेतु प्रारंभिक अवस्था में ही पौधे के ग्रसित भाग को तोडकर नष्ट कर दें। नियंत्रण हेतु क्लोरएन्ट्रानिलिप्रोल 18.5% SC (150 मिली प्रति हेक्टेयर या थायक्लोप्रिड 21.7 SC (750 मिली प्रति
हेक्टेयर का छिड़काव करें ।

कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे खेतों में जलभराव न होने दें, अतिरिक्त जल निकासी की सुविधा करें व कीटभक्षी पक्षियों के बैठने हेतु टी  आकार के बर्ड पर्चेस स्थापित करें, जिससे प्राकृतिक रूप से हानिकारक कीटों की संख्या कम करने में सहायता मिल सके। साथ ही किसी भी कीटनाशक, फफूंदनाशक अथवा अन्य कृषि आदान का उपयोग केवल अनुशंसित मात्रा में ही करें तथा खरीदते समय पक्का बिल अवश्य प्राप्त करें ।

उप संचालक कृषि श्री गोपेश पाठक द्वारा बताया गया कि जिले में सोयाबीन फसल वर्तमान में दाना भरने की अवस्था में हैं। इस अवस्था में फसल को विभिन्न फफूंद जनित रोगों एवं कीटों से बचाने हेतु किसानों को विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है । किसानों को सलाह दी गई है कि वे नियमित रूप से फसल का निरीक्षण करें ।

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture