उज्जैन जिले के किसानों को सोयाबीन फसल के लिए सलाह जारी
22 अगस्त 2026, उज्जैन: उज्जैन जिले के किसानों को सोयाबीन फसल के लिए सलाह जारी – जिले में इस वर्ष खरीफ मौसम में 5.15 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसल लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जिले में मुख्य रूप से सोयाबीन की फसल ली जाती है, जिसके लिए 5.06 लाख हेक्टेयर क्षेत्र का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वर्तमान में सोयाबीन की फसल लगभग 50 से 55 दिन की अवस्था में पहुंच गई है। कृषि विभाग के अनुसार जिले में सोयाबीन की फसल की स्थिति वर्तमान में संतोषजनक है। जिले में आज दिनांक तक 497 मिमी वर्षा हो चुकी है।
कृषि विभाग ने किसान भाइयों को सलाह दी है कि वे अपने खेत की सतत निगरानी करें। खेत में जाकर 3-4 पौधों को हिलाकर देखें कि इल्ली अथवा अन्य कीटों का प्रकोप तो नहीं है। यदि कहीं एक वर्ग मीटर क्षेत्र में 3 से 4 इल्लियां दिखाई देती हैं तो कीटनाशक का छिड़काव करना चाहिए। जहां सोयाबीन की फसल घनी है, वहां गर्डल बीटल (रिंग कटर) का प्रकोप होने की संभावना अधिक रहती है। इसकी पहचान पौधे के तने पर दो रिंग बने हुए दिखाई देने तथा फसल का पौधा लटका अथवा मुरझाया हुआ दिखाई देने से की जा सकती है। ऐसे प्रभावित पौधों को प्रारंभिक अवस्था में ही तोड़कर खेत से बाहर फेंककर नष्ट कर देना चाहिए।
जिला डायग्नोस्टिक दल एवं मैदानी कृषि अधिकारियों द्वारा क्षेत्र का सतत भ्रमण किया जा रहा है तथा किसान भाइयों को कीट एवं व्याधि से बचाव की जानकारी दी जा रही है। वर्तमान में सोयाबीन की फसल की स्थिति संतोषजनक है। यदि कहीं पर कीट व्याधि का प्रकोप दिखाई देता है तो कृषि विभाग की सलाह के अनुसार नियंत्रण उपाय किए जा सकते हैं।
कृषि विभाग के अनुसार सोयाबीन में गर्डल बीटल (रिंग कटर), पत्ती खाने वाली इल्लियों जैसे सेमीलूपर, तंबाकू की इल्ली एवं अन्य इल्लियों तथा रस चूसने वाले कीटों जैसे सफेद मक्खी, जैसिड एवं तना छेदक कीटों के प्रकोप पर विशेष निगरानी रखना जरूरी है। गर्डल बीटल से प्रभावित पौधे को प्रारंभिक अवस्था में ही तोड़कर नष्ट कर देना चाहिए। इन कीटों के लक्षण दिखाई देने पर प्रारंभिक अवस्था में नियंत्रण के लिए डायफ्लूबेंजुरॉन 21.7 एससी की 750 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर, टेट्रानिलिप्रोल 18.18 एससी की 250 से 300 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर, क्लोरएन्ट्रानिलीप्रोल 18.5 एससी की 150 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर, स्पाइनेटोरम 11.7 एससी की 450 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर, इमामेक्टिन बेंजोएट 1.90 की 425 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर, फ्लूबेंडियामाइड 20 डब्ल्यूजी की 250 से 300 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर, फ्लूबेंडियामाइड 39.35 एससी की 150 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर अथवा इंडोक्साकार्ब 15.8 एससी की 333 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर मात्रा का उपयोग किया जा सकता है। इसी प्रकार नोवाल्यूरॉन + इंडोक्साकार्ब 04.50 प्रतिशत एससी की 825 से 875 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर, प्रोफेनोफॉस 50 ईसी की 1 लीटर प्रति हेक्टेयर, थायोमेथोक्सम + लैम्ब्डा साइहेलोथ्रिन 9.5 प्रतिशत की 125 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर अथवा पूर्व मिश्रित कीटनाशक बीटासाइफ्लुथ्रिन + इमिडाक्लोप्रिड की 350 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर मात्रा का छिड़काव किया जा सकता है।
कीटनाशक के छिड़काव के समय पर्याप्त मात्रा में पानी का उपयोग करने की सलाह दी गई है। नेप्सैक स्प्रेयर अथवा ट्रैक्टर चालित स्प्रेयर से 450 लीटर पानी प्रति हेक्टेयर तथा पावर स्प्रेयर से न्यूनतम 125 लीटर पानी प्रति हेक्टेयर का उपयोग किया जाना चाहिए। कृषि विभाग ने किसानों से यह भी कहा है कि जब भी वे किसी भी प्रकार की कृषि आदान सामग्री, जैसे उर्वरक, बीज अथवा कीटनाशक खरीदें तो संबंधित दुकान से पक्का बिल जरूर लें।
किसानों को सोयाबीन की फसल में अन्य कृषि कार्यों के संबंध में भी सलाह दी गई है। सोयाबीन की फसल में तीन दिन से अधिक जलभराव नुकसानदायक होता है। अतिरिक्त अथवा अधिक वर्षा होने की स्थिति में खेत से जल निकासी की उचित व्यवस्था करें। घनी फसल में गर्डल बीटल (रिंग कटर) के प्रकोप की अधिक संभावना रहती है, इसलिए सोयाबीन के तने पर दो रिंग दिखाई देने तथा पौधे के मुरझाकर या लटकने जैसी स्थिति दिखाई देने पर ऐसे पौधों को प्रारंभिक अवस्था में ही तोड़कर खेत से बाहर कर दें।
किसानों को अपने खेत की नियमित निगरानी करने तथा खेत में जाकर पौधों को हिलाकर यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि कहीं कीट या इल्ली का प्रकोप तो नहीं हुआ है। यदि एक वर्ग मीटर में 3-4 इल्लियां दिखाई देती हैं तो कृषि विभाग द्वारा बताए गए कीट नियंत्रण उपाय अपनाएं। इसके साथ ही सोयाबीन की फसल में पक्षियों के बैठने के लिए उचित आकार के बर्ड पर्च लगाने की सलाह दी गई है। इन पर पक्षी बैठकर सोयाबीन के हानिकारक कीट एवं इल्लियों को खाते हैं, जिससे खेत में कीटों की संख्या कम करने में मदद मिलती है।
अधिक जानकारी के लिए किसान अपने क्षेत्रीय कृषि विस्तार अधिकारी कार्यालय, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, कृषि विज्ञान केंद्र उज्जैन एवं कृषि विभाग उज्जैन से संपर्क कर सकते हैं।
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