असम में रबी आलू की बुवाई से पहले बीज उपचार, उड़द-मूंग में कीट से बचाव की सलाह
04 नवंबर 2026, गुवाहाटी, असम: असम में रबी आलू की बुवाई से पहले बीज उपचार, उड़द-मूंग में कीट से बचाव की सलाह – असम में रबी सीजन की आलू बुवाई शुरू होने से पहले मौसम विज्ञान केंद्र गुवाहाटी की कृषि मौसम सलाहकार इकाइयों ने किसानों को बीज उपचार और उड़द-मूंग की फसल में कीट प्रकोप से बचाव की सलाह जारी की है। यह सलाह 30 अक्टूबर को जारी हुए बुलेटिन संख्या 87/2026 में दी गई है, जो 3 नवंबर तक वैध है और विस्तारित पूर्वानुमान 10 नवंबर तक के लिए है।
एएमएफयू शिलोंगानी की सलाह के अनुसार, आलू की बुवाई से पहले स्वस्थ, विषाणु-मुक्त और मध्यम या छोटे आकार के अंकुरित बीज कंद चुनें और उन्हें 2 ग्राम इंडोफिल एम-45 प्रति लीटर पानी के घोल में 10 मिनट तक भिगोकर उपचारित करें। अगर बीज कंद को काटकर टुकड़ों में बोया जा रहा है, तो एएमएफयू गोस्साईगांव के अनुसार कटे हुए टुकड़ों को बेनोमिल के 0.1 प्रतिशत घोल में 10 मिनट डुबोकर 48 घंटे छाया में सुखाना चाहिए, या उन्हें दो-तीन दिन तक नम बोरे से ढककर रखना चाहिए, जिससे कटे हुए हिस्से पर एक सुरक्षा परत बन जाए और सड़न का खतरा कम हो।
उड़द-मूंग में फली छेदक और रस चूसक कीट पर नज़र रखें
बुलेटिन में उड़द और मूंग की फसल में फली छेदक इल्ली और फली का रस चूसने वाले कीट के प्रकोप पर भी ध्यान देने को कहा गया है। इल्ली फलियों में छेद करके अंदर के दाने खाती है, जबकि रस चूसक कीट के हमले से दाने सिकुड़ जाते हैं और उपज घट जाती है। एएमएफयू शिलोंगानी ने साफ मौसम में फली छेदक के लिए क्लोरएंट्रानिलिप्रोल 18.5 प्रतिशत एससी (कोराजेन) का 0.2 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करने की सलाह दी है।
जिन खेतों में उड़द की फसल में अब भी पत्ती लपेटक या माहू का प्रकोप दिख रहा है, वहां एएमएफयू दीफू की सलाह के अनुसार पहले क्विनालफॉस 2.5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी का छिड़काव करें, और इसके 10 दिन बाद ज़रूरत पड़ने पर डाइमेथोएट 2 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी के हिसाब से दूसरा छिड़काव करें। छिड़काव हमेशा साफ, शुष्क मौसम में ही करने की सलाह दी गई है, ताकि दवा का असर पूरी तरह से हो सके।
आलू की फसल के लिए नमी और बीज का चुनाव अहम
कृषि मौसम विशेषज्ञों के अनुसार असम में रबी आलू की बुवाई के समय मिट्टी में सही नमी बनाए रखना उत्पादन के लिए बहुत ज़रूरी होता है। बुलेटिन में किसानों से कहा गया है कि बुवाई से पहले खेत की तैयारी के दौरान जल निकासी का भी पूरा ध्यान रखें, क्योंकि जलभराव वाली ज़मीन में बीज कंद सड़ने का खतरा बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बीज उपचार को छोड़ देने वाले किसानों की फसल में बाद में झुलसा और सड़न जैसी समस्याएं ज़्यादा देखी जाती हैं, जिससे उपज में बड़ा नुकसान हो सकता है। इसलिए बुलेटिन में बार-बार इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि बुवाई से पहले का यह छोटा-सा उपचार आगे की पूरी फसल को सुरक्षित रखने में मदद करता है।
इसी तरह, दलहन की फसलों में कीट की पहचान समय पर करने की सलाह भी दी गई है, ताकि प्रकोप बढ़ने से पहले ही नियंत्रण किया जा सके। कृषि अधिकारियों ने किसानों से कहा है कि किसी भी दवा के छिड़काव से पहले नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विस्तार अधिकारी से सलाह लेना बेहतर रहता है, ताकि खेत की सही स्थिति के अनुसार फैसला लिया जा सके।
असम में रबी सीजन की आलू की खेती कई जिलों में किसानों की अतिरिक्त आय का महत्वपूर्ण ज़रिया मानी जाती है, खासकर उन इलाकों में जहां मुख्य धान की फसल के बाद खेत खाली रहते हैं। कृषि मौसम सलाहकार इकाइयों का कहना है कि नवंबर की शुरुआत में बोई जाने वाली आलू की फसल अगर सही तरीके से शुरू की जाए, तो आगे चलकर बीमारी और सड़न जैसी समस्याओं में काफी कमी आती है। इसी वजह से हर साल बुवाई के इस मौसम में बीज उपचार को लेकर अलग से एडवाइजरी जारी की जाती है, ताकि किसान सही जानकारी के साथ खेत की तैयारी शुरू करें।
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