राज्य कृषि समाचार (State News)

 छिंदवाड़ा जिले में उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण

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24 मई 2024, छिंदवाड़ा: छिंदवाड़ा जिले में उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण – कलेक्टर श्री शीलेन्द्र सिंह के निर्देशानुसार जिले में सभी उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण मार्कफेड के सभी डबल लॉक गोदामों व सभी 146 सहकारी समितियों तथा निजी क्षेत्रों में कराया गया है, जिसका वितरण लगातार किसानों को किया जा रहा है। जिले को खरीफ सीजन 2024 के लिये 86000  मीट्रिक  टन यूरिया प्राप्त हो चुका है, जिसमें से आज दिनांक तक 25500  मीट्रिक  टन यूरिया का वितरण किया जा चुका है तथा 60500  मीट्रिक  टन यूरिया शेष है। 12500 मेट्रिक टन डीएपी प्राप्त हो चुका है जिसमें से आज दिनांक तक 6400  मीट्रिक  टन डीएपी का वितरण किया जा चुका है तथा 6100  मीट्रिक  टन डीएपी शेष है। 7869  मीट्रिक  टन एनपीके प्राप्त हो चुका है जिसमें से आज दिनांक तक 2500  मीट्रिक  टन एनपीके का वितरण किया जा चुका है तथा 5369 मीट्रिक  टन एनपीके शेष है। 16548  मीट्रिक  टन सिंगल सुपर फास्फेट प्राप्त हो चुका है जिसमें से आज दिनांक तक 3525  मीट्रिक  टन सिंगल सुपर फास्फेट का वितरण किया जा चुका है तथा 13023  मीट्रिक  टन सिंगल सुपर फास्फेट शेष है एवं 4525  मीट्रिक  टन पोटाश प्राप्त हो चुका है जिसमें से आज दिनांक तक 1550  मीट्रिक  टन पोटाश का वितरण किया जा चुका है तथा 2975 मीट्रिक टन पोटाश शेष है ।

 उप संचालक कृषि श्री जितेन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि खरीफ सीजन नजदीक है और सीजन में असुविधा से बचने के लिये कलेक्टर श्री शीलेन्द्र सिंह द्वारा लगातार समीक्षा कर महाप्रबंधक जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित छिंदवाड़ा   को निर्देशित किया गया है कि प्रत्येक सहकारी समिति में यूरिया के साथ डीएपी या एनपीके काम्पलेक्स उर्वरक का अनिवार्यतः भंडारण हो। साथ ही किसानों को निर्धारित मापदंड के अनुसार उर्वरकों का वितरण सुनिश्चित कराने के निर्देश दिये हैं। कृषि उत्पादन आयुक्त द्वारा संभागीय समीक्षा बैठक में जिले के तीन वर्ष के मृदा नमूनों की विश्लेषण रिपोर्ट के आधार पर जिले के लिये एनपीके उर्वरक को प्रोत्साहित कर किसानों को उठाव कराने के लिये कहा गया है, जिससे जिले की मिट्टी में पोटाश तत्व की पूर्ति हो सके। अभी देखने में आया है कि जिले के किसान मुख्यतः यूरिया एवं डीएपी उर्वरक का ही उपयोग करते हैं, जिससे पोटाश तत्व की कमी होने से उत्पादन प्रभावित होता है एवं मिट्टी की उर्वरता भी प्रभावित होती है। इसलिये कृषि वैज्ञानिकों द्वारा जिले के किसानों को एनपीके उर्वरकों के उपयोग की सलाह दी जा रही है।

आंचलिक कृषि अनुसंधान केन्द्र के सह संचालक डॉ.विजय पराडकर ने कहा कि जिले के किसान मक्का फसल में अधिक यूरिया का उपयोग कर रहे हैं, उन्हें संतुलित मात्रा में उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए एवं मक्का फसल में जमीन के प्रकार के अनुसार प्रति एकड 02 से 03 बोरी यूरिया का ही उपयोग करें, उससे अधिक नहीं करें। कलेक्टर श्री सिंह एवं उप संचालक कृषि श्री सिंह द्वारा किसानों से अपील की गई है कि आवश्यकतानुसार तत्काल उर्वरकों का उठाव अपने क्षेत्र की सहकारी समितियों एवं मार्कफेड के डबल लॉक केन्द्रों (गोदाम) से करें एवं सीजन में होने वाली असुविधा से बचें।

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