पांढुर्ना में वास्तविक फसल अन्य खसरे में दर्ज़
किसानों को फसल पंजीयन में आ रही परेशानी
10 अक्टूबर 2026, (उमेश खोड़े, कृषक जगत, पांढुर्ना): पांढुर्ना में वास्तविक फसल अन्य खसरे में दर्ज़ – खेत का खसरा नंबर और उस पर बोई गई फसल की गिरदावरी सही होने पर ही किसान फसल पंजीयन , फसल बीमा और प्राकृतिक आपदा से प्रभावित फसल पर सरकार द्वारा दी जाने वाली आर्थिक सहायता के पात्र होते हैं। लेकिन पांढुर्ना जिले में आउट सोर्स कर्मचारियों द्वारा सेटेलाइट से की गई गिरदावरी में कई त्रुटियां सामने आई हैं , जिसमें एक किसान की वास्तविक फसल को दूसरे पड़ोसी के खसरे में दर्ज़ कर दिया गया है। खेतों का नक्शा दुरुस्त नहीं होने से आई इस विसंगति के कारण किसानों को फसल पंजीयन में तो परेशानी आ ही रही है, भविष्य में फसल बीमा और प्राकृतिक आपदा होने पर मिलने वाली आर्थिक सहायता से भी वंचित रहने का अंदेशा है।
खेत किसका , फसल किसकी – इस संबंध में कुछ किसानों ने अपनी परेशानी कृषक जगत को बताई। ग्राम बोरखेड़ी के श्री रामेश्वर बेलखड़े ने अपने खसरा नंबर 148 / 2 रकबा 0.595 हेक्टेयर में कपास और अरहर की फसल लगाई है ,लेकिन सेटेलाइट से की गई गिरदावरी में संतरा फसल चढ़ाई है , जबकि संतरे की फसल पास में भाई श्री रमेश बेलखड़े के खेत में है। इसी तरह कलावती बेलखड़े के खसरा नंबर 99 /5 के रकबा में 0.405 में सोयाबीन और संतरा की फसल लगाई है , जबकि गिरदावरी में मक्का फसल दर्ज़ है , जो वास्तविक रूप से पास वाले किसान श्री भगवान बेलखड़े के खेत में है। ऐसी ही त्रुटि श्री मंसाराम झोटया खोड़े के खसरा नंबर 352/ 2 , कुल रकबा 0.651 हेक्टेयर में से 0.350 हेक्टेयर में सोयाबीन और 0.300 हेक्टेयर में मूंगफली बोई है , जो श्री संदीप खोड़े के खसरा नंबर 352 / 1 में दर्ज़ हुई है , वहीं श्री संदीप खोड़े के खसरा नंबर 352 /1 रकबा 0.652 हेक्टेयर में बोई कपास की फसल को मंसाराम खोड़े के खसरे में दर्ज़ किया गया है। यह समस्या नक्शा दुरुस्त नहीं होने से आ रही है। नक्शा दुरुस्ती के संबंध में श्री मंसाराम खोड़े , श्रीमती वनमाला खोड़े , श्री रामेश्वर बेलखड़े और श्रीमती कलावती बेलखड़े ने खरीफ फसल के पूर्व 26 मई 2026 को कलेक्टर पांढुर्ना को जन सुनवाई में आवेदन भी दिया था । श्री खोड़े के आवेदन को आईडी क्र 689999 से दर्ज़ कर तहसील कार्यालय भेजा गया था, लेकिन अभी तक समाधान नहीं हुआ। इस बारे में तहसील कार्यालय से जानकारी लेने पर भी संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया , जिसका खामियाज़ा किसानों को अब पंजीयन में उठाना पड़ रहा है।
सेटेलाइट गिरदावरी की प्रकिया – सेटेलाइट गिरदावरी पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए पटवारी संघ , पांढुर्ना के जिला उपाध्यक्ष श्री मिथिलेश उइके ने कृषक जगत को बताया कि चार साल पहले मौके पर जाकर पटवारी द्वारा गिरदावरी की जाती थी । जिसमें किसानों की वास्तविक फसल दर्ज़ होती थी। अब सेटेलाइट के माध्यम से आउट सोर्स कर्मचारियों द्वारा डिजिटल क्रॉप सर्वे किया जाता है। जिसमें फसल की अधिकतम 10 मीटर अंदर तक की फोटो खींची जा सकती है। सर्वे की समय अवधि कम होने और सर्वेयरों के प्रशिक्षित नहीं होने से भी कई समस्या आती है। 8 रु प्रति फसल और 2 रु प्रति अतिरिक्त फसल की दर पर सर्वे करने वाले इन बाहरी कर्मचारियों को सुरक्षा साधन भी उपलब्ध नहीं होते , ताकि वे फसल के बीच में जहरीले जीव जंतु से अपना बचाव कर सके। फसल का नक्शा गलत होने पर सर्वेयर उपलब्ध नक्शे के आधार पर ही सर्वे करता है । इसमें खेत में आगे की फसल की फोटो तो ले ली जाती है , लेकिन पीछे बोई गई फसल की फोटो नहीं ले पाने से भी समस्या आती है। नक्शे की त्रुटि को पहले ठीक करना ज़रूरी है। अधिकतम तीन माह में नक्शा दुरुस्त हो जाता है। विवादित मामलों में समय अधिक लगता है। सरकार पर निर्भर न रहते हुए किसान स्वयं भी ‘एमपी किसान एप ‘ पर अपने खेत खसरे के अलावा आसपास के अन्य दस खसरों की फसल भी चढ़ा सकता है। किसानों का कहना है कि आउटसोर्स कर्मचारियों को सुरक्षा गारंटी और सुरक्षा किट देने के अलावा गिरदावरी की निर्धारित दूरी को बढ़ाना चाहिए। साथ ही नक्शा दुरुस्ती के लिए राजस्व विभाग द्वारा एक अभियान चलाया जाना चाहिए ,क्योंकि यह समस्या केवल पांढुर्ना जिले की न होकर पूरे राज्य की है।
इस संबंध में अलका एक्का , एसडीएम , पांढुर्ना ने कृषक जगत को बताया कि यदि गिरदावरी में किसानों की फसल गलत चढ़ी है, तो वे एमपी किसान एप पर 10 अक्टूबर तक सुधार कर सकते हैं । किसान अपनी फसल चैक करके अपने पटवारी को बताएं। पटवारी द्वारा सत्यापित किए जाने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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