केवीके टीकमगढ़ में महिला संगोष्ठी आयोजित
08 दिसंबर 2025, टीकमगढ़: केवीके टीकमगढ़ में महिला संगोष्ठी आयोजित – कृषि विज्ञान केंद्र टीकमगढ़ में अंतर्राष्ट्रीय महिला किसान वर्ष-2026 के औपचारिक शुभारम्भ के अवसर पर एक प्रेरणादायक महिला संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी का उद्देश्य कृषि और ग्रामीण विकास में महिला किसानों के अतुलनीय योगदान को रेखांकित करना तथा उनकी चुनौतियों पर चर्चा करना था। इस कार्यक्रम में जिले की 35 महिला किसानों, कृषक महिलाओं और महिला उद्यमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम कृषि विज्ञान केंद्र टीकमगढ़ के प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रमुख, डॉ. बी. एस. किरार के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य महिला किसानों के कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में दिए जा रहे अमूल्य योगदान को पहचानना और उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों, पोषण सुरक्षा तथा उद्यमशीलता के लिए प्रेरित करना था। डॉ. किरार ने महिला किसानों को अंतर्राष्ट्रीय महिला किसान वर्ष-2026 की महत्ता से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि महिलाएँ कृषि की रीढ़ हैं और उनका सशक्तिकरण ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार है। डॉ. आर. के. प्रजापति ने महिला समूहों को कृषि आधारित लघु उद्योगों जैसे- खाद्य प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और मशरूम उत्पादन में आगे आने के लिए प्रोत्साहित किया। डॉ. सतेंद्र कुमार, मत्स्य पालन वैज्ञानिक ने जल संरक्षण के साथ-साथ मछली पालन और बत्तख पालन जैसी सहायक गतिविधियों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया, जो पारिवारिक पोषण और आय दोनों में वृद्धि कर सकती हैं।विशेष प्रशिक्षण सत्र के दौरान, कृषि विज्ञान केंद्र टीकमगढ़ के प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. किरार, वैज्ञानिक डॉ. आर. के प्रजापति, डॉ. एस.के. सिंह, डॉ. यू. एस. धाकड़ डॉ. यू. एस. धाकड़, डॉ. सतेन्द्र कुमार, डॉ. एस. के. जाटव एवं डॉ. आई. डी. सिंह ने टीकमगढ़ ज़िले में खेती एवं मप्र संस्करण पर महिला किसानों को प्रशिक्षण दिया जबकि श्री हंसनाथ खान एवं श्री जयपाल छिगारहा ने कंप्यूटर प्रेजेंटेशन में तकनीकी सहायता प्रदान की।
कार्यक्रम के दौरान पोषण सुरक्षा महिला किसानों को खेत और घर के लिए पोषण वाटिका (न्यूट्रिशन गार्डन) तैयार करने के तरीके बताए गए। प्रसंस्करण तकनीक अनाज, फल और सब्जियों का मूल्य संवर्धन करके उत्पाद बेचने की सरल तकनीकों पर प्रशिक्षण दिया गया ताकि वे बेहतर मूल्य प्राप्त कर सकें। सरकारी योजनाएं केंद्र और राज्य सरकार की उन योजनाओं की जानकारी दी गई जो विशेष रूप से महिला किसानों और स्वयं सहायता समूहों (एसएचजीएस) को आर्थिक सहायता प्रदान करती हैं।
संगोष्ठी में जिले भर की महिला किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और कृषि क्षेत्र में अपने अनुभवों को साझा किया। ब्रजपुरा गाँव की सुधा लोधी ने केंद्र से मिल रहे मार्गदर्शन के प्रति सभी महिला किसानों की ओर से हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र की तकनीकी सलाह ने उन्हें खेती में बेहतर परिणाम प्राप्त करने में मदद की है।कोडियां गाँव की सावित्री आदिवासी ने भी चर्चा में सक्रिय रूप से भाग लिया। उन्होंने कृषि में आ रही मुख्य समस्या, सिंचाई से संबंधित चुनौतियों, को प्रमुखता से उठाया और केंद्र से इस दिशा में प्रभावी समाधान प्रदान करने का आग्रह किया।डॉ. किरार ने महिला किसानों के परिश्रम की सराहना की और उन्हें केंद्र की योजनाओं से जुड़कर लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया। 2026 को अंतर्राष्ट्रीय महिला किसान वर्ष के रूप में मनाना उनके सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। डॉ. किरार ने आश्वासन दिया कि केंद्र महिला किसानों द्वारा उठाई गई सिंचाई और अन्य समस्याओं के समाधान हेतु जल्द ही विशेष प्रशिक्षण और तकनीकों पर कार्य करेगा। यह संगोष्ठी महिला किसानों को सशक्त बनाने और कृषि में उनकी भूमिका को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ संपन्न हुई। कार्यक्रम का संचालन और समन्वय डॉ. सतेंद्र कुमार ने किया।
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