राज्य कृषि समाचार (State News)

12 एकड़ में खेती का अनोखा मॉडल, लालजी मौर्य ने फसल विविधीकरण से कमाया 10-12 लाख का मुनाफा

01 सितंबर 2026, भोपाल:  12 एकड़ में खेती का अनोखा मॉडल, लालजी मौर्य ने फसल विविधीकरण से कमाया 10-12 लाख का मुनाफा – मध्यप्रदेश के कटनी जिले के ग्राम कन्हवारा के प्रगतिशील कृषक लालजी मौर्य ने आधुनिक कृषि तकनीकों, फसल विविधीकरण और पशुपालन को अपनाकर खेती को लाभकारी व्यवसाय का रूप दिया है। किसान मौर्य अपने दो छोटे भाइयों के साथ करीब 12 एकड़ भूमि में मिश्रित एवं बहुफसली खेती कर रहे हैं। फसल उत्पादन के साथ पशुपालन और आम के पौधों से भी उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है।

कलेक्टर आशीष तिवारी ने लालजी मौर्य के खेत पहुंचकर विभिन्न फसलों का अवलोकन किया और कृषक से कृषि कार्यों, फसल उत्पादन तथा अपनाई जा रही आधुनिक तकनीकों की जानकारी ली। इस दौरान कलेक्टर ने पशुपालन विभाग की डेयरी प्लस योजना की जानकारी देते हुए कृषक को योजना का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया।

DSR पद्धति से धान की खेती, कतार पद्धति को बढ़ावा

श्री मौर्य कृषि कार्यों में आधुनिक एवं नवीन तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं। धान की खेती में उनके द्वारा डीएसआर (डायरेक्ट सीडेड राइस) पद्धति अपनाई जा रही है। इसके साथ ही विभिन्न सब्जियों, उद्यानिकी और अनाज फसलों में कतार पद्धति का उपयोग किया जा रहा है। गन्ना और अदरक जैसी फसलें भी उनके कृषि मॉडल का हिस्सा हैं।

खरीफ में 9 एकड़ धान सहित कई फसलें

वर्तमान खरीफ सीजन 2026-27 में श्री मौर्य करीब 9 एकड़ में धान, 1 एकड़ में अरहर, आधे एकड़ में गन्ना, आधे एकड़ में अदरक और आधे एकड़ में कद्दू की खेती कर रहे हैं। इसके अलावा लगभग आधे एकड़ भूमि में आम के पौधे लगाए गए हैं। इनसे आने वाले समय में अतिरिक्त आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है।

तीनों सीजन में अलग-अलग फसलों का उत्पादन

श्री मौर्य वर्षभर कृषि गतिविधियों से जुड़े रहते हैं। खरीफ सीजन में धान के साथ उड़द, अरहर और विभिन्न सब्जियों का उत्पादन किया जाता है। रबी सीजन में गेहूं के साथ चना, मसूर, मिर्च और गोभी जैसी फसलें ली जाती हैं। वहीं जायद सीजन में उड़द और मूंग के साथ ककड़ी, कलिंदर और खरबूजा जैसी फसलें उगाई जाती हैं। इस तरह अलग-अलग मौसम में अलग-अलग फसलों का उत्पादन कर श्री मौर्य फसल विविधीकरण के माध्यम से वर्षभर खेत से आय प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं।

खेती के साथ पशुपालन भी आय का जरिया

कृषक श्री लालजी मौर्य ने कृषि के साथ पशुपालन को भी अपनी आजीविका का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है। उनके पास उन्नत नस्ल की गायों के साथ चार भैंसें हैं, जिनसे दुग्ध उत्पादन किया जा रहा है। खेती और पशुपालन के इस समन्वित मॉडल से उन्हें अतिरिक्त आय का स्रोत मिल रहा है।

तीनों सीजन से 10 से 12 लाख रुपये तक मुनाफा

श्री मौर्य के अनुसार विभिन्न फसलों के उत्पादन, पशुपालन और अन्य कृषि गतिविधियों से तीनों सीजन को मिलाकर करीब 10 से 12 लाख रुपये तक का मुनाफा अर्जित किया जा रहा है। आधुनिक कृषि तकनीक, फसल विविधीकरण और खेती के साथ पशुपालन उनकी सफलता के प्रमुख आधार हैं।

वैज्ञानिक सलाह अपनाने की अपील

कलेक्टर श्री आशीष तिवारी ने कृषक को फसलों में बीमारी, कीट या खरपतवार की समस्या सामने आने पर कृषि वैज्ञानिकों से संपर्क कर उचित वैज्ञानिक उपचार एवं प्रबंधन अपनाने की सलाह दी। उन्होंने किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों के साथ वैज्ञानिक सलाह को अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया।

श्री मौर्य का कृषि मॉडल यह दर्शाता है कि आधुनिक तकनीकों के साथ फसल विविधीकरण, उद्यानिकी और पशुपालन को अपनाकर किसान अपनी आय के विभिन्न स्रोत विकसित कर सकते हैं और खेती को अधिक लाभकारी व्यवसाय बना सकते हैं।

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