राज्य कृषि समाचार (State News)

झाबुआ में कड़कनाथ मुर्गी पालन पर एक दिवसीय कार्यशाला, 328 दीदियों ने लिया प्रशिक्षण

15 जनवरी 2026, झाबुआ: झाबुआ में कड़कनाथ मुर्गी पालन पर एक दिवसीय कार्यशाला, 328 दीदियों ने लिया प्रशिक्षण – मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन जिला पंचायत झाबुआ के तत्वावधान में आजीविका कलादीर्घा भवन में कड़कनाथ मुर्गी पालन पर एक दिवसीय विस्तृत कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य कड़कनाथ मुर्गी पालन के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना था। कार्यक्रम में जिले के सभी छह विकासखंडों से 328 स्वयं सहायता समूह की दीदियों के साथ जिला एवं विकासखंड स्तर के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यशाला को राज्य कार्यालय से पधारे राज्य परियोजना प्रबंधक श्री महेश बावनकर ने संबोधित किया और कड़कनाथ पालन की संभावनाओं, उद्देश्य एवं इसकी वैल्यू चेन की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने दीदियों को उत्पादन के साथ-साथ बाजार, मूल्य निर्धारण और लाभ बढ़ाने की नीतियों को समझने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने यह भी बताया कि कड़कनाथ पालन में स्वास्थ्य प्रबंधन अत्यंत महत्वपूर्ण है। समय पर उपचार, संतुलित आहार और सही प्रबंधन निर्णय ही इस व्यवसाय को टिकाऊ बना सकते हैं। कार्यक्रम में पशुपालन, वित्त और बाजार से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन दिया गया, जिससे दीदियों को कड़कनाथ पालन को एक सफल आजीविका गतिविधि के रूप में अपनाने में मदद मिले।

विषय विशेषज्ञों की रही गरिमामयी उपस्थिति

कार्यक्रम में राज्य कार्यालय से तकनीकी सहयोग हेतु डॉ. अरविंद यादव, पशुपालन विभाग के उपसंचालक  अमर दिवाकर, नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक श्री नरेंद्र मोहिते, ट्राई फाउंडेशन के अंकित राज एवं सारा फाउंडेशन के श्री जिमी निर्मल की विशेष उपस्थिति रही।

वैज्ञानिक सत्र एवं नस्ल सुधार पर चर्चा

प्रथम सत्र में पशुपालन विभाग के उपसंचालक अमर दिवाकर ने कड़कनाथ नस्ल की शुद्धता, इसके औषधीय गुणों और बाजार में बढ़ती मांग पर प्रकाश डाला। उन्होंने वैज्ञानिक पद्धति से कड़कनाथ पालन, शेड निर्माण, चूजों की देखभाल, संतुलित आहार और रोग नियंत्रण पर विस्तार से जानकारी दी।

संकुल विकास और बाजार रणनीति

दोपहर के सत्र में ट्राई फाउंडेशन के श्री अंकित राज ने संकुल विकास मॉडल और सामूहिक उत्पादन के महत्व को समझाया। उन्होंने बताया कि समूह बनाकर उत्पादन करने से लागत कम होती है और बाजार में बेहतर दाम प्राप्त किए जा सकते हैं।

वित्तीय जानकारी और ब्रांडिंग पर जोर

नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक श्री नरेंद्र मोहिते ने पीएमएफएमई योजना, बैंक ऋण प्रक्रिया और लागत-लाभ विश्लेषण पर जानकारी दी। वहीं सारा फाउंडेशन के श्री जिमी निर्मल ने जीवित मुर्गी की बजाय मांस विपणन, उत्पाद ब्रांडिंग और एफपीओ से जुड़कर आय बढ़ाने के तरीकों पर मार्गदर्शन दिया।

लखपति दीदी बनने की दिशा में कदम

समापन सत्र में जिला परियोजना प्रबंधक द्वारा दीदियों की शंकाओं का समाधान किया गया और भविष्य की कार्ययोजना पर चर्चा की गई। इस अवसर पर स्वयं सहायता समूह की कुछ दीदियों ने अपनी सफलता की कहानियां साझा कीं, जो अन्य प्रतिभागियों के लिए प्रेरणादायक रहीं। कार्यशाला का उद्देश्य दीदियों को कड़कनाथ मुर्गी पालन के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाते हुए ‘लखपति दीदी’ की दिशा में आगे बढ़ाना रहा। 

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