नर्सरी से चमकी भोपाल के किसान भाइयों की किस्मत, हर महीने 15 लाख पौधों का उत्पादन, 20 लोगों को रोजगार भी दिया
02 नवंबर 2026, भोपाल: नर्सरी से चमकी भोपाल के किसान भाइयों की किस्मत, हर महीने 15 लाख पौधों का उत्पादन, 20 लोगों को रोजगार भी दिया – खेती में आधुनिक तकनीक और नए प्रयोग अपनाकर किसान अपनी आमदनी बढ़ाने के साथ रोजगार के अवसर भी पैदा कर सकते हैं। इसकी मिसाल भोपाल जिले के ग्राम रतुआ रतनपुर के किसान भाई हेमंत कुशवाह और ओम कुशवाह ने पेश की है। दोनों भाइयों ने वर्ष 2018 में महज 2 हजार वर्ग फुट क्षेत्र में 10 हजार पौधों के साथ नर्सरी की शुरुआत की थी। आज उनका यह छोटा-सा प्रयास बड़े कारोबार में बदल चुका है। उनकी नर्सरी में हर महीने करीब 15 लाख पौधे तैयार किए जा रहे हैं। इस उद्यम से आसपास के 15 से 20 ग्रामीणों को रोजगार भी मिल रहा है। मध्यप्रदेश के अलावा महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान के किसान भी उनसे पौधे मंगवा रहे हैं।
2 हजार वर्गफीट से शुरू किया नर्सरी का कारोबार
हेमंत और ओम कुशवाह को वर्ष 2017-18 में कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के संपर्क में आने के बाद नर्सरी व्यवसाय की संभावनाओं के बारे में जानकारी मिली। विभाग के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में उन्होंने उन्नत कृषि तकनीक, नर्सरी प्रबंधन और पौध उत्पादन का प्रशिक्षण लिया। इसके बाद वर्ष 2018 में अपने खेत पर 2 हजार वर्गफीट क्षेत्र में पॉलीहाउस नर्सरी स्थापित की और करीब 10 हजार पौधों से काम शुरू किया।
शुरुआत में पौधों के लिए पानी की व्यवस्था करना उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती थी। दोनों भाइयों ने इस समस्या का समाधान निकालने के लिए कुएं की खुदाई कर जल स्रोत विकसित किया। इसके बाद सिंचाई सुविधाओं का विस्तार किया। वर्तमान में उनकी 8 एकड़ भूमि सिंचित है।
45 लाख रुपये के ऋण से किया नर्सरी का विस्तार
प्रशिक्षण से मिली जानकारी और अनुभव के आधार पर दोनों भाइयों ने धीरे-धीरे अपने काम का विस्तार किया। वर्ष 2024 में करीब 45 लाख रुपये का ऋण लेकर नर्सरी को आगे बढ़ाया। वर्तमान में लगभग 2 एकड़ क्षेत्र में उनकी नर्सरी संचालित है, जहां कुल 4 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में दो पॉलीहाउस स्थापित किए गए हैं। नर्सरी में गुलाब, जरबेरा और गेंदा जैसे फूलों के साथ बैंगन, टमाटर, मिर्च, गिलकी, लौकी और खीरे की हाइब्रिड पौध तैयार की जाती है। शुरुआत में जहां वे करीब 10 हजार पौधे तैयार करते थे, वहीं अब हर महीने लगभग 15 लाख पौधों का उत्पादन कर रहे हैं।
5 राज्यों तक पहुंच रहा पौधों का कारोबार
नर्सरी के विस्तार से दोनों भाइयों ने अपने कारोबार को स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं रखा। अब मध्यप्रदेश के अलावा महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान के किसानों तक भी पौधों की आपूर्ति की जा रही है। इस कारोबार को बढ़ाने में डिजिटल माध्यमों की भी अहम भूमिका है। सोशल मीडिया और मोबाइल के जरिए किसान उनसे संपर्क करते हैं और अपनी जरूरत के अनुसार पौधे मंगवाते हैं। इस उद्यम से गांव के 15 से 20 लोगों को रोजगार मिल रहा है। इस तरह दोनों भाइयों ने न केवल अपना व्यवसाय स्थापित किया, बल्कि आसपास के ग्रामीण परिवारों के लिए भी आजीविका के अवसर तैयार किए हैं।
प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक से मिली सफलता
हेमंत कुशवाह के अनुसार, कृषि एवं उद्यानिकी विभाग से मिले प्रशिक्षण, शासकीय योजनाओं के सहयोग और आधुनिक तकनीकों को अपनाने से नर्सरी व्यवसाय को आगे बढ़ाने में मदद मिली। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में संचालित किसान हितैषी योजनाओं के प्रति आभार जताया। रतुआ रतनपुर के हेमंत और ओम कुशवाह की यह पहल बताती है कि खेती में प्रशिक्षण, तकनीक और लगातार प्रयास से छोटे स्तर पर भी सफल उद्यम खड़ा किया जा सकता है।
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