मध्यप्रदेश के 4 जिलों के किसानों को बड़ी सौगात: सरकार ने शुरू किए नए सिंचाई और कृषि प्रोजेक्ट; 3.10 लाख हेक्टेयर में मिलेगा पानी
25 मार्च 2026, भोपाल: मध्यप्रदेश के 4 जिलों के किसानों को बड़ी सौगात: सरकार ने शुरू किए नए सिंचाई और कृषि प्रोजेक्ट; 3.10 लाख हेक्टेयर में मिलेगा पानी – जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है. हमारी सरकार का ध्येय है समृद्ध किसान, समृद्ध मध्य प्रदेश. जब किसानों के खेतों में पानी पहुंचेगा तो मिट्टी सोना उगलेगी. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के हर किसान के खेत तक सिंचाई के लिए पानी पहुंचाने का संकल्प लिया है और उसी संकल्प की पूर्ति के लिए अधिकारी निरंतर कार्य करें. मध्यप्रदेश में प्रगतिरत विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं को निर्धारित समय अवधि में पूरी गुणवत्ता के साथ पूर्ण करें, जिससे जनता को समय पर उनका पूरा-पूरा लाभ मिल सके.
मंत्री सिलावट ने मंगलवार को मंत्रालय में विभागीय समीक्षा बैठक ली. बैठक में मंत्री सिलावट ने प्रमुख रूप से बीना परियोजना प्रबंधन इकाई सागर एवं बेतवा परियोजना प्रबंधन इकाई भोपाल में निर्माणाधीन वृहद एवं मध्यम परियोजनाओं की समीक्षा की। बैठक में विभाग के अपर मुख्य सचिव राजेश राजौरा, प्रमुख अभियंता विनोद कुमार देवड़ा सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं कार्य से संबंधित निर्माण एजेंसियों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
इन 4 जिलों में चालू हुए नए प्रोजेक्ट
मंत्री सिलावट ने बैठक में बीना संयुक्त सिंचाई बहुउद्देशीय परियोजना सागर, कोठा बैराज परियोजना विदिशा, बंडा सिंचाई परियोजना सागर-छतरपुर, हनोता सिंचाई परियोजना सागर-विदिशा, पंचम नगर सिंचाई परियोजना दमोह-सागर, कड़ान मध्यम सिंचाई परियोजना सागर, साजली मध्यम सिंचाई परियोजना दमोह, कैथ मध्यम सिंचाई परियोजना सागर, जूडी एवं जैरा मध्यम सिंचाई परियोजना दमोह-छतरपुर की विस्तृत समीक्षा की।
उन्होंने सभी कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण गुणवत्ता एवं विभागीय मापदण्ड अनुसार पूर्ण करने के निर्देश दिए। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने पर सागर, विदिशा, छतरपुर एवं दमोह ज़िलों की लगभग 3 लाख 10 हजार हेक्टेयर भूमि में अतिरिक्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। अधिकारियों को इन परियोजनाओं को स्वीकृत समय सीमा में पूर्ण करने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर प्रति 15 दिवस में इससे संबंधित समीक्षा किये जाने के भी निर्देश दिए गये।
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