पूसा-16 अरहर वैरायटी को उगाकर चमकी किसान की किस्मत, सिर्फ ढाई एकड़ में कमाए 70 हजार रुपए
18 मई 2026, भोपाल: पूसा-16 अरहर वैरायटी को उगाकर चमकी किसान की किस्मत, सिर्फ ढाई एकड़ में कमाए 70 हजार रुपए – मध्यप्रदेश शासन की नीतियों के फलस्वरूप जबलपुर जिले में किसानों का दलहनी फसलों के प्रति रुझान लगातार बढ़ रहा है। ग्राम सिवनी टोला के प्रदीप पटेल ऐसे ही कृषक है परम्परागत खेती के स्थान पर दलहनी फसलों को अपनाया और आज आसपास के किसानों के प्रेरणा के स्त्रोत बन गए हैँ।

युवा कृषक प्रदीप पटेल के पिता दुलीचंद पटेल वर्षों से धान, गेहूं और मक्का की फसल लेते आ रहे थे। जबकि प्रदीप की सोच कुछ अलग थी। प्रदीप ने खेती किसानी की बागडोर अपने हाथ में लेकर सरकार की दलहन के उत्पादन को बढ़ावा देने की नीतियों से प्रोत्साहित होकर गेहूं, धान के साथ अरहर की फसल लेने का निर्णय लिया। कृषि विभाग के अधिकारियों से उन्हें भरपूर सहयोग भी मिला। प्रदीप ने खरीफ के सीजन में कृषि विभाग द्वारा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन अंतर्गत उपलब्ध कराये गए अरहर की उन्नत किस्म पूसा -16 के 20 किलो बीज की ढाई एकड़ में बोनी की। इससे उन्हें 20 क्विंटल का उत्पादन प्राप्त हुआ और लागत घटाने के बाद उन्हें 70 हजार रूपये का मुनाफा हुआ।
पूसा-16 अरहर की विशेषताएं
प्रदीप ने बताया कि पूसा-16 अरहर की फसल का झाड़ काफी घना रहा तथा दानों का आकार बढ़ा था। क्षेत्र के अन्य किसानों की तुलना में उनकी फसल अधिक उन्नत एवं आकर्षक दिखाई दी। उन्होंने बताया कि अरहर की इस किस्म की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि जुलाई में बोनी के बाद लगभग 130 से 140 दिनों में ही नवंबर माह तक फसल कटाई के लिए तैयार हो गई।
20 क्विंटल अरहर का हुआ उत्पादन
उन्नत खेती के परिणामस्वरूप किसान श्री प्रदीप पटेल को कुल 20 क्विंटल अरहर का उत्पादन प्राप्त हुआ। इसमें से 15 क्विंटल उपज को उन्होंने 7 हजार 700 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बाजार में बेचा।इससे उन्हें 1 लाख 15 हजार 500 रुपये की आय प्राप्त हुई। लगभग 45 हजार रुपये की लागत घटाने के बाद उन्हें करीब 70 हजार 500 रुपये का शुद्ध लाभ हुआ। उनकी सफलता से प्रेरित होकर आसपास के किसान भी अब उन्नत दलहन खेती और पूसा-16 जैसी उन्नत किस्मों को अपनाने के लिए आगे आ रहे हैं।
सिर्फ 130 दिनों में तैयार हो जाती हैं फसल
क्षेत्र की कृषि विस्तार अधिकारी जागृति साहू ने बताया कि अरहर की पूसा -16 किस्म 130 से 140 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। उन्होंने क्षेत्र के अन्य किसानों को भी दलहनी फसल अपनाने का आग्रह करते हुए कहा की उन्नत बीज एवं आधुनिक तकनीकों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी बना सकते हैं।
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