किसानों की सफलता की कहानी (Farmer Success Story)राज्य कृषि समाचार (State News)

बिलासपुर के किसान ने मशरूम की खेती से बदली किस्मत, दो चरणों में मिला 28 लाख का सरकारी अनुदान

10 सितंबर 2026, बिलासपुर: बिलासपुर के किसान ने मशरूम की खेती से बदली किस्मत, दो चरणों में मिला 28 लाख का सरकारी अनुदान – झंडूता ब्लॉक की ग्राम पंचायत बालघाड़ के गांव पराहू के किसान जगदीश वर्मा ने परंपरागत खेती छोड़कर मशरूम की खेती को अपनी आय का मुख्य जरिया बना लिया है। उन्होंने वर्ष 2009 में बटन मशरूम से शुरुआत की थी और आज वे हर साल लाखों रुपये कमा रहे हैं।

जगदीश ने 2017 में अपने मशरूम कारोबार का बड़े पैमाने पर विस्तार किया और बाद में इसमें शिटाके मशरूम का उत्पादन भी जोड़ लिया। उन्हें वर्ष 2017-18 में एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत करीब 8 लाख रुपये और वर्ष 2021-22 में आरकेवीवाई-रफ्तार योजना के तहत करीब 20 लाख रुपये का अनुदान मिला, जिससे उन्होंने अपने उत्पादन ढांचे को और मजबूत किया।

कम जगह में ज्यादा कमाई का मॉडल

जगदीश बताते हैं कि परंपरागत फसलों के मुकाबले मशरूम की खेती में बहुत कम जगह की जरूरत पड़ती है, जबकि आमदनी कहीं ज्यादा होती है। वे हर साल कई क्विंटल मशरूम का उत्पादन कर बाजार में बेच रहे हैं और आसपास के किसानों को भी परंपरागत खेती के साथ-साथ मशरूम उत्पादन अपनाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।

उनके इस काम को स्थानीय स्तर पर भी पहचान मिली है। जगदीश वर्मा को जिला स्तर पर सर्वश्रेष्ठ किसान पुरस्कार, प्रगतिशील मशरूम उत्पादक सम्मान और कृषि शोधकर्ता एवं किसान मंच सम्मान से नवाजा जा चुका है।

वर्ष 2017-18 में मिले अनुदान से जगदीश ने उत्पादन इकाई का बुनियादी ढांचा खड़ा किया, जबकि 2021-22 में आरकेवीवाई-रफ्तार योजना से मिली बड़ी राशि ने उन्हें शिटाके जैसी अपेक्षाकृत महंगी और मांग वाली प्रजाति में उतरने का हौसला दिया। इस तरह पहले चरण की छोटी शुरुआत ने आगे चलकर बड़े निवेश और विस्तार की नींव रखी।

2009 में जब जगदीश ने बटन मशरूम की खेती शुरू की थी, तब यह इलाके में एक नया और अनजाना विकल्प था। शुरुआती वर्षों में उत्पादन और बाजार की समझ बनाने के बाद ही उन्होंने सरकारी योजनाओं का सहारा लेकर धीरे-धीरे अपने कारोबार का विस्तार किया, जो आज जिले के अन्य किसानों के लिए एक नजीर बन चुका है।

दूसरे किसानों के लिए मौका

बिलासपुर जिले में बागवानी विभाग की योजनाओं के जरिये अन्य किसान भी मशरूम इकाई शुरू करने के लिए अनुदान का लाभ ले सकते हैं। कम पूंजी और सीमित जगह में शुरू होने वाला यह कारोबार खासकर उन किसानों के लिए मुफीद है, जिनके पास बड़ी जोत नहीं है लेकिन वे अतिरिक्त आय का जरिया तलाश रहे हैं।

हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य में जहां समतल खेती योग्य जमीन सीमित है, वहां मशरूम की खेती छोटे कमरे या शेड में भी की जा सकती है, जिससे भूमि की कमी बड़ी बाधा नहीं बनती। बटन मशरूम की तुलना में शिटाके मशरूम की बाजार में मांग और कीमत दोनों ज्यादा होने के चलते जगदीश जैसे अनुभवी किसानों के लिए यह अतिरिक्त कमाई का जरिया बन गया है।

जिला बागवानी विभाग के अधिकारी मानते हैं कि जगदीश जैसे प्रगतिशील किसानों की सफलता का असर सिर्फ उनकी अपनी आय तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे आसपास के गांवों के किसान भी मशरूम उत्पादन की तकनीक सीखने और अपनाने के लिए आगे आते हैं। इससे धीरे-धीरे पूरे इलाके में मशरूम की खेती का एक छोटा लेकिन मजबूत नेटवर्क तैयार हो रहा है।

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