अल्ट्रा हाई डेंसिटी मॉडल से लगाए गए पौधों पर आम की बहार
लेखक: सचिन बोंद्रिया
16 मई 2026, इंदौर/जलगांव (कृषक जगत): अल्ट्रा हाई डेंसिटी मॉडल से लगाए गए पौधों पर आम की बहार – जलगांव स्थित जैन इरिगेशन सिस्टम्स लिमिटेड के जैन हिल्स परिसर में अल्ट्रा हाई डेंसिटी मैंगो प्लांटेशन मॉडल पर आधारित बागों में इस वर्ष आम की आकर्षक बहार देखने को मिल रही है। यहां केसर, सोनपरी, मल्लिका, तोतापरी सहित कई उन्नत किस्मों के पौधों पर बेहतर फ्लावरिंग एवं फल धारण ने किसानों का ध्यान आकर्षित किया है।
मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे किसानों ने इस आधुनिक बागवानी मॉडल का भ्रमण कर कम क्षेत्र में अधिक उत्पादन की तकनीक को समझा। विशेषज्ञों ने बताया कि अल्ट्रा हाई डेंसिटी प्लांटेशन (UHDP) पद्धति में पौधों को सामान्य बागों की तुलना में कम दूरी पर लगाया जाता है, जिससे प्रति एकड़ पौध संख्या बढ़ती है और शुरुआती वर्षों से ही अधिक उत्पादन मिलने लगता है।
एग्रोनॉमिस्ट श्री अज़हर जैदी ने कृषक जगत को बताया कि इस मॉडल में सामान्यतः 3×2 मीटर अथवा 4×2 मीटर दूरी रखी जाती है। पौधों की ऊंचाई एवं फैलाव नियंत्रित रखने के लिए नियमित प्रूनिंग एवं कैनोपी मैनेजमेंट अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ड्रिप सिंचाई एवं फर्टिगेशन प्रणाली के माध्यम से पानी एवं घुलनशील उर्वरकों की नियंत्रित मात्रा सीधे जड़ों तक पहुंचाई जाती है, जिससे जल उपयोग दक्षता बढ़ती है और पौधों का विकास संतुलित रहता है।उन्होंने बताया कि आम में बेहतर बहार एवं फल धारण के लिए संतुलित पोषण प्रबंधन जरूरी है। नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश के साथ जिंक, बोरॉन एवं मैग्नीशियम जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों का संतुलित उपयोग फ्लावरिंग एवं फ्रूट सेटिंग में सहायक होता है। पुष्प आगमन से पूर्व हल्की सिंचाई रोकना तथा बाद में नियंत्रित सिंचाई देना भी लाभकारी माना जाता है।
श्री जैदी ने कहा कि रोग एवं कीट प्रबंधन में पाउडरी मिल्ड्यू, एन्थ्रेक्नोज तथा आम के हॉपर की समय पर निगरानी आवश्यक है। अनुशंसित दवाओं का समय पर छिड़काव, मल्चिंग एवं जैविक पदार्थों के उपयोग से मिट्टी की नमी और उर्वरता बनाए रखने में मदद मिलती है।
भ्रमण में शामिल हरदा के किसान श्री हरिओम अंजाने, खरगोन के संदीप पाटीदार, अखिलेश पाटीदार, बड़वानी के हरदीप सोलंकी सहित अन्य किसानों ने इस पद्धति से लगाए गए आम के बागों को देखकर आश्चर्य व्यक्त किया। किसानों ने कहा कि कम क्षेत्र में अधिक उत्पादन एवं बेहतर गुणवत्ता प्राप्त करने वाली इस तकनीक का वे अपने क्षेत्रों में भी अनुसरण करने का प्रयास करेंगे। भ्रमण में शामिल किसानों ने इस तकनीक को भविष्य की लाभकारी एवं वैज्ञानिक बागवानी पद्धति बताते हुए कहा कि इससे कम क्षेत्र में अधिक उत्पादन और बेहतर गुणवत्ता प्राप्त की जा सकती है।
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