कर्मचारियों के डीए में 3% वृद्धि, किसान की बढ़ती लागत पर राहत का क्या ?
लेखक: सचिन बोंद्रिया
29 अक्टूबर 2026, इंदौर: कर्मचारियों के डीए में 3% वृद्धि, किसान की बढ़ती लागत पर राहत का क्या ? – केंद्र सरकार ने 28 अक्टूबर को केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) और पेंशनभोगियों की महंगाई राहत (DR) में 3 प्रतिशत अंक की वृद्धि को मंजूरी दी है। इससे दर 60 से बढ़कर 63 प्रतिशत हो जाएगी। महंगाई के असर को कम करने के लिए कर्मचारियों को राहत देना जरूरी है, लेकिन सवाल यह भी है कि खेती की बढ़ती लागत का सामना कर रहे किसानों की आर्थिक सुरक्षा के लिए क्या ऐसे ही नियमित उपाय किए जा रहे हैं?
खेती में डीजल, खाद, बीज, कीटनाशक, सिंचाई, मजदूरी, मशीनों के किराये और प्लास्टिक सहित कृषि सामग्रियों की कीमतें किसान का खर्च बढ़ाती हैं। इसके ऊपर मौसम की अनिश्चितता और फसल खराब होने का जोखिम अलग है। ऐसे में किसान की लागत और आय के बीच संतुलन बनाए रखना कृषि नीति की महत्वपूर्ण जरूरत है।
गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में विपणन वर्ष 2027-28 के लिए ₹25 की वृद्धि कर इसे ₹2,610 प्रति क्विंटल किया गया है। यह पिछले वर्ष के ₹2,585 से लगभग 0.97 प्रतिशत अधिक है। DA और MSP की गणना के आधार अलग हैं, लेकिन खेती की बढ़ती लागत के संदर्भ में समर्थन मूल्य की पर्याप्तता पर चर्चा जरूरी है। गेहूं का MSP भी तभी मिल पाता है, जब उपज निर्धारित FAQ गुणवत्ता मानकों पर खरी उतरे और सरकारी खरीद में स्वीकार हो।
आधुनिक खेती और मौसम के जोखिम से बचाव के लिए पॉलीहाउस तथा शेडनेट जैसी संरक्षित खेती पर अनुदान भी महत्वपूर्ण है। इन योजनाओं की सहायता राशि की समीक्षा कर उसे बढ़ती निर्माण लागत के अनुरूप बनाना चाहिए। इसी तरह, मध्यप्रदेश सहित विभिन्न राज्यों में गन्ना और बागवानी फसलों के लिए फसल बीमा की उपलब्धता और कवरेज की कमियों का आकलन कर किसानों की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है।
महंगाई के अनुरूप किसान सहायता की भी नियमित समीक्षा हो। किसान सम्मान निधि और कृषि अनुदानों की राशि, पात्रता तथा प्रभावशीलता का समय-समय पर आकलन किया जाना चाहिए। स्वामीनाथन आयोग की व्यापक उत्पादन लागत (C2) पर 50 प्रतिशत लाभ संबंधी सिफारिश पर भी स्पष्ट नीति-निर्णय आवश्यक है।
कर्मचारियों को महंगाई से राहत देने की व्यवस्था की तरह किसानों के लिए भी बढ़ती लागत, लाभकारी मूल्य और मौसम के जोखिम से सुरक्षा को कृषि नीति का महत्वपूर्ण लक्ष्य बनाया जाना चाहिए। देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले किसान की आर्थिक सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है।
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