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राज्य कृषि समाचार (State News)

बनासकांठा में कृषि अवसंरचना कोष की 521 परियोजनाओं का लोकार्पण, कांकरेज गाय के लिए देश का पहला प्रजनन केंद्र शुरू

03 नवंबर 2026, भीलडी (बनासकांठा): बनासकांठा में कृषि अवसंरचना कोष की 521 परियोजनाओं का लोकार्पण, कांकरेज गाय के लिए देश का पहला प्रजनन केंद्र शुरू – गुजरात के बनासकांठा जिले में शुक्रवार को कृषि अवसंरचना कोष (एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड) के तहत पूरी हुई 521 परियोजनाओं का लोकार्पण हुआ। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार इन परियोजनाओं की कुल लागत करीब 4,950 करोड़ रुपये है।

इन परियोजनाओं में कोल्ड स्टोरेज, गोदाम, साइलो, पॉलीहाउस और प्रसंस्करण केंद्र शामिल हैं। इनका मकसद किसानों को उपज के भंडारण और प्रसंस्करण की सुविधा उनके खेत के पास ही उपलब्ध कराना है, जिससे फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान में कमी आएगी।

कृषि अवसंरचना कोष की शुरुआत 2020 में एक लाख करोड़ रुपये की वित्तपोषण सुविधा के रूप में हुई थी। इसके तहत बैंकों से कम ब्याज दर पर कर्ज लेकर किसान, एफपीओ और सहकारी समितियां भंडारण व प्रसंस्करण ढांचा खड़ा कर सकती हैं। इस कोष के ज्यादातर प्रोजेक्ट छोटे और मझोले आकार के होते हैं, जो गांव या ब्लॉक स्तर पर उपज को तुरंत सुरक्षित रखने में मदद करते हैं, जिससे बड़ी मंडियों तक पहुंचने में लगने वाले समय में होने वाला नुकसान घटता है।

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बनासकांठा गुजरात का प्रमुख आलू और डेयरी उत्पादक जिला है, इसलिए यहां बनने वाले कोल्ड स्टोरेज और प्रसंस्करण केंद्रों का सीधा फायदा आलू किसानों और दूध उत्पादकों दोनों को मिलने की उम्मीद है। एक ही दिन में इतनी बड़ी संख्या में अवसंरचना परियोजनाओं का लोकार्पण गुजरात में कृषि क्षेत्र के लिहाज से बड़ा आयोजन माना जा रहा है।

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12 हॉर्टिकल्चर क्लस्टर, 1.3 लाख किसानों को फायदा

प्रधानमंत्री कार्यालय की विज्ञप्ति के मुताबिक इस मौके पर 12 हॉर्टिकल्चर क्लस्टर भी मंजूर किए गए हैं। ये क्लस्टर करीब 1.46 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करेंगे।

इनसे 1.3 लाख से ज्यादा किसानों को फायदा पहुंचने की उम्मीद है। उत्तर गुजरात में बने दो क्लस्टर खासतौर पर आलू की खेती पर केंद्रित हैं, जो इस इलाके की प्रमुख फसल है। यह आंकड़ा अभी सिर्फ सरकारी विज्ञप्ति में ही उपलब्ध है, किसी स्वतंत्र स्रोत से इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है।

कांकरेज गाय के लिए देश का पहला प्रजनन केंद्र

भीलडी में ही 127 एकड़ में भारत बोवाइन ब्रीडिंग एंड रिसर्च सेंटर की शुरुआत हुई। यह देश की पहली ऐसी सुविधा है, जो खासतौर पर कांकरेज नस्ल की देसी गायों के लिए बनाई गई है। केंद्र का मकसद उन्नत प्रजनन तकनीकों और भ्रूण स्थानांतरण (एम्ब्रायो ट्रांसफर) के जरिए नस्ल सुधार की रफ्तार को 10 से 20 गुना तेज करना है।

केंद्र में ओवम पिक-अप और इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (ओपीयू-आईवीएफ) तकनीक से भ्रूण तैयार किए जाएंगे, जिसका लक्ष्य सालाना करीब 25 हजार उच्च गुणवत्ता वाले भ्रूण तैयार करना है। सामान्य तौर पर एक श्रेष्ठ गाय से साल में एक ही बछड़ा मिलता है, लेकिन इस तकनीक से एक गाय से सालाना 10 से 20 बछड़े तैयार हो सकेंगे। केंद्र से बनासकांठा के 316 डेयरी किसानों का एक समूह सीधे जुड़ा है, जिसमें हर किसान को एक भ्रूण के लिए शुरुआत में सिर्फ 1,000 रुपये चुकाने होते हैं, बाकी खर्च में सब्सिडी मिलती है। इस काम में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) तकनीकी सहयोग दे रहा है।

इसी कार्यक्रम में बनास डेयरी के दो बायो-सीएनजी प्लांट की नींव भी रखी गई। तारड़ में बनने वाले प्लांट की क्षमता रोजाना 75 मीट्रिक टन गोबर प्रोसेस करने की होगी। राधनपुर में लगने वाले प्लांट में यह क्षमता 100 मीट्रिक टन प्रतिदिन होगी। बनासकांठा जिले में कुल मिलाकर करीब 28 लाख पशुधन है, जिनके गोबर का इस्तेमाल अब ऊर्जा उत्पादन में भी हो सकेगा, जिससे डेयरी किसानों को गोबर बेचने से भी अतिरिक्त आमदनी हो सकती है।

बोवाइन ब्रीडिंग सेंटर की कुल लागत को लेकर अलग-अलग स्रोतों में अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं, इसलिए यहां किसी एक लागत का जिक्र नहीं किया जा रहा। केंद्र को राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत तकनीकी व वित्तीय सहयोग मिल रहा है, जो देश में स्वदेशी गोवंश नस्ल सुधार की केंद्रीय योजना है। केंद्र का स्वामित्व बनास डेयरी के पास है, और आगे कांकरेज के अलावा गिर, साहीवाल व थारपारकर जैसी देसी गाय नस्लों तथा मेहसाणी, बन्नी व जाफराबादी भैंस नस्लों पर भी काम बढ़ाने की योजना है।

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