खंडवा में शुरू हुआ 1.36 करोड़ का इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर, 160 महिलाएं बनेंगी आत्मनिर्भर
21 मई 2026, खंडवा: खंडवा में शुरू हुआ 1.36 करोड़ का इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर, 160 महिलाएं बनेंगी आत्मनिर्भर – मध्यप्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने बुधवार को खंडवा जिले के खालवा विकासखंड के ग्राम रोशनी में 1 करोड़ 36 लाख रुपए लागत के इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर कार्य का लोकार्पण किया।
मंत्री डॉ. शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की “लखपति दीदी” की अवधारणा को साकार करने के उद्देश्य से आदिवासी बहुल विकासखंड खालवा के ग्राम रोशनी में 1 करोड़ 36 लाख रुपए लागत से इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर तैयार किया जा रहा है, जहां स्व-सहायता समूह की महिलाएं मछली पालन, उद्यानिकी एवं पशुपालन जैसी गतिविधियों के माध्यम से आय प्राप्त कर सकेंगी और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकेंगी ।
मंत्री डॉ. शाह ने कहा कि प्रदेश सरकार ने जनजातीय वर्ग के लोगों के आर्थिक उत्थान के लिए अनेक योजनाएं शुरू की हैं, जिससे इस वर्ग के लोगों के जीवन स्तर में सुधार आया है। उन्होंने बताया कि खालवा विकासखंड के ग्राम रोशनी में 19 करोड़ 78 लाख रूपये लागत से “सामुदायिक कला भवन सह प्रशिक्षण केन्द्र” का निर्माण कराया जाएगा। इस भवन में सर्व सुविधायुक्त 50 सीटर महिला छात्रावास एवं 50 सीटर पुरुष छात्रावास का निर्माण भी कराया जाएगा।
इस भवन में आदिवासी वर्ग के युवाओं को सांस्कृतिक संरक्षण एवं रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण दिलाने की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने बताया कि आदिवासी वर्ग के ग्रामीणों को उनकी जनजाति से संबंधित लोक गायन, वादन, आदिवासी लोक नृत्य, आदिवासियों की परंपरागत चित्रकला और अन्य लोक कलाओं के संबंध में प्रशिक्षित किया जाएगा। इस भवन में विभिन्न विधाओं के 50 कलाकार प्रशिक्षकों के रूकने हेतु ट्रांजिट छात्रावास का निर्माण भी कराया जाएगा।
रोशनी बन रहा ग्रामीण विकास का मॉडल
मंत्री डॉ. शाह ने बताया कि इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर से जुड़ी डेढ़ सौ से अधिक महिलाओं को मछली पालन, पशुपालन, पौधारोपण एवं अन्य गतिविधियों के लिए आवश्यक प्रशिक्षण दिया जाएगा जिससे वे इन व्यवसायों को अच्छी तरह से कर सकें। उन्होंने बताया कि रोशनी में पहले से संचालित गौशाला से प्राप्त गोबर एवं गोमूत्र का उपयोग जैविक खेती और पोषण वाटिका में किया जा रहा है।
इसी मॉडल को आगे बढ़ाते हुए एक्वा पार्क, फलदार पौधों की वाटिका और पर्यटन आकर्षण हेतु सेल्फी प्वाइंट विकसित किए गए हैं। यह परियोजना पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल और जीरो-वेस्ट मॉडल पर आधारित है। मछली टैंकों से निकलने वाला पोषक तत्वों से भरपूर पानी सब्जियों और फलों के लिए जैविक खाद का कार्य करेगा, जबकि बत्तखों से उत्पन्न जैविक तत्व से मछलियों के लिए प्राकृतिक भोजन तैयार करेंगे। इससे उत्पादन लागत कम होगी और केमिकल फ्री उत्पादन संभव हो सकेगा।
मंत्री डॉ. शाह ने बताया कि एक्वा पार्क में मछलियों के पालन के लिए चरणबद्ध आधुनिक व्यवस्था विकसित की गई है, जिसमें 14 बायो फ्लॉक टैंक, रिवर्स एक्वा सिस्टम, बड़े बायो फ्लॉक तालाब, तथा आवलिया बांध के बैकवॉटर में स्थापित 120 आधुनिक केज शामिल हैं। मछली बीजों को प्रारंभिक अवस्था में बायोफ्लॉक टैंकों में पाला जाएगा और आकार बढ़ने पर उन्हें क्रमशः बड़े सिस्टम और केज कल्चर में स्थानांतरित किया जाएगा। महिला समूहों द्वारा उत्पादित मछलियों की आपूर्ति खंडवा सहित प्रदेश के अन्य जिलों और बाहरी राज्यों तक करने की योजना बनाई जा रही है। इसके लिए फिश फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन का गठन किया जाएगा, जिससे महिलाओं को संगठित बाजार और बेहतर मूल्य प्राप्त हो सके। उन्होंने बताया कि 50 एकड़ क्षेत्र में 16 महिला स्व-सहायता समूहों की कुल 160 आदिवासी महिलाएं मछली पालन के साथ-साथ बत्तख पालन, फल-सब्जी उत्पादन कर अपनी आय बढ़ा कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनेंगी।
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