भारत सरकार के कृषि एवं उपभोक्ता मंत्रालय द्वारा वित्तपोषित – बीमा ग्राम योजना

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प्रदेश में बीज निगम/शासकीय कृषि प्रक्षेत्र/ तिलहन संघ/कृषि विश्वविद्यालय एवं राष्ट्रीय बीज निगम द्वारा प्रमाणित बीज उपलब्ध कराया जा रहा है किंतु इन संस्थाओं के माध्यम से आवश्यक बीज उपलब्ध कराना संभव नही हैं। भारत सरकार के कृषि एवं उपभोक्ता मंत्रालय द्वारा वित्तपोषित ‘बीमा ग्राम योजना’ का क्रियान्वयन किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग द्वारा किया जा रहा है।

अनुदान

प्रत्येक चयनित कृषक को आधा एकड़ के लिये 50 प्रतिशत अनुदान पर आधार/प्रमाणित बीज प्रदान किया जाता है। योजना के तहत प्रशिक्षण में 3 प्रमुख फसल अवस्थाओं : बोनी के समय, फूल अवस्था तथा कटाई के समय कृषकों को प्रशिक्षण दिये जाते हैं।

उन्नत भण्डारण पात्र

बीज भण्डारण हेतु 10 क्विंटल भंडार कोठी के लिये अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के कृषकों को निर्धारित कीमत का 33 प्रतिशत, अधिकतम रू 1500/- तथा 20 क्विंटल भंडार कोठी पर कीमत का 33 प्रतिशत या रू. 3000/- जो भी कम हो अनुदान का प्रावधान है।

सामान्य कृषकों का 25 प्रतिशत अनुदान :

अ. 10 क्विंटल कोठी पर अधिकतम रू. 1000/- तथा
ब. 29 क्विंटल कोठी पर अधिकतम रू. 2000/- जो भी कम हो देय होगा।

लक्षित उत्पादन का लक्ष बीज

कृषि में यदि सबसे महत्वपूर्ण आदान है तो वह है बीज, अच्छे बीज की ललक प्राय: हर कृषक को होती है परन्तु इस ललक को पूरा करने के लिये कृषकों को हिदायत दी जाती है की आस-पास के पड़ोसी प्रान्तो से अनजाना बीज लाकर स्वयं को मुसीबत में नहीं डालें बीज को सफल खेती का आधार माना जाता है कारण यह है कि उत्तम बीज से ही उत्तम उत्पादन संभव है और अधिकांश रोग बीज चलित होते हंै चाहे तो सब्जी बीज हो या खाद्यान्नों के बीज। बीज को महत्व को जानने के बाद कृषकों में यह आम बात होती है कि रिश्तेदार आंध्रप्रदेश गये अच्छी फसल देखी और उसका बीज ले आये इस बात पर अब पूर्ण विराम की आवश्यकता है क्योंकि प्रदेश की ही नहीं भारतीय शासन भी इस बात से चिंतित है कि बीज इधर-उधर से लाकर लगाना एक अपराध ही माना जाये। वर्तमान में चूंकि लाभकारी खेती कम लागत में अधिक उत्पादन के उपाय किये गये हंै क्योंकि बीज एक ऐसा आदान है जो सबसे महंगा पड़ता है इस आदान का खर्च घटाने के उद्देश्य से केन्द्र तथा राज्य सरकारों द्वारा विभिन्न प्रयास किये जा रहे हैं। बीज ग्राम योजना इस बात का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है दूसरा कृषकों को यह सलाह भी दी जा रही है कि आधार बीज को एक बार कम मात्रा में खरीदें वह महंगा होता है इस बीज को उच्च कोटि के प्रबंध देकर उसकी बुआई से लेकर कटाई तक नियंत्रित दिशा में लगाया जाये। बीज की ‘डिबलिंगÓ हाथ में बुआई कतारों में करने से भरपूर अंकुरण मिलेगा थोड़ी जगह में खाद/पानी/उर्वरक तथा दवाईयों को समय से प्रबंध करके इस बीज को बढ़ाया जाये तथा आने वाले साल में इसको बड़े क्षेत्र में बोया जाये तब यदि अतिरिक्त बीज है तो पड़ोसी कृषकों को बीज अदला-बदली कार्यक्रम के समान बांटा जाये यह कार्य एक पवित्र तथा सेवा की दृष्टि से महान कार्य होगा। कृषक जगत में स्वयं का बीज बनाने पर तथा लगाकर बीज के मद में पैसा बचाने के लिये मार्गदर्शक देने के लिये रोगिंग तथा फसलों से अच्छा गुणवत्तायुक्त उत्पादन करने के लिये मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है। एक बार यदि बीज के मद में जैसा बचाया जाने लगे तो लाभकारी खेती की दिशा में एक सशक्त कदम होगा। बीज फसल की आत्मा है यदि वह कमजोर रहा तो लक्षित उत्पादन की विचारधारा धरी की धरी रह जायेगी। स्वस्थ बीज स्वस्थ मृदा रोगों का संयोग हो तो फसल ‘फेल कदापिÓ नहीं होगी। इस वर्ष रबी में मार्च तक प्रकृति आपदा सामने आती रही इस कारण बीज में नमी का प्रतिशत बराबर अधिक रहने की संभावनायें पैदा हो चुकी हंै इस कारण जो आपको आने वाले वर्ष में बीज बनाना है उसको धूप में सुखायें जब नमी बिल्कुल कम हो जाये तब ही भंडारण अलग से करें। इस अनाज को समय-समय पर कीटों के प्रकोप खासकर धूप के प्रकोप से बचाने के उपाय भी करें और अच्छे बीज से लक्षित उत्पादन का लक्ष्य प्राप्त करें।

प्रदेश में बीज निगम/शासकीय कृषि प्रक्षेत्र/ तिलहन संघ/कृषि विश्वविद्यालय एवं राष्ट्रीय बीज निगम द्वारा प्रमाणित बीज उपलब्ध कराया जा रहा है किंतु इन संस्थाओं के माध्यम से आवश्यक बीज उपलब्ध कराना संभव नही हैं। भारत सरकार के कृषि एवं उपभोक्ता मंत्रालय द्वारा वित्तपोषित ‘बीमा ग्राम योजना’ का क्रियान्वयन किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग द्वारा किया जा रहा है।

अनुदान

प्रत्येक चयनित कृषक को आधा एकड़ के लिये 50 प्रतिशत अनुदान पर आधार/प्रमाणित बीज प्रदान किया जाता है। योजना के तहत प्रशिक्षण में 3 प्रमुख फसल अवस्थाओं : बोनी के समय, फूल अवस्था तथा कटाई के समय कृषकों को प्रशिक्षण दिये जाते हैं।

उन्नत भण्डारण पात्र बीज भण्डारण हेतु 10 क्विंटल भंडार कोठी के लिये अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के कृषकों को निर्धारित कीमत का 33 प्रतिशत, अधिकतम रू 1500/- तथा 20 क्विंटल भंडार कोठी पर कीमत का 33 प्रतिशत या रू. 3000/- जो भी कम हो अनुदान का प्रावधान है।

सामान्य कृषकों का 25 प्रतिशत अनुदान :

अ. 10 क्विंटल कोठी पर अधिकतम रू. 1000/- तथा

ब. 29 क्विंटल कोठी पर अधिकतम रू. 2000/- जो भी कम हो देय होगा।

लक्षित उत्पादन का लक्ष बीज

कृषि में यदि सबसे महत्वपूर्ण आदान है तो वह है बीज, अच्छे बीज की ललक प्राय: हर कृषक को होती है परन्तु इस ललक को पूरा करने के लिये कृषकों को हिदायत दी जाती है की आस-पास के पड़ोसी प्रान्तो से अनजाना बीज लाकर स्वयं को मुसीबत में नहीं डालें बीज को सफल खेती का आधार माना जाता है कारण यह है कि उत्तम बीज से ही उत्तम उत्पादन संभव है और अधिकांश रोग बीज चलित होते हंै चाहे तो सब्जी बीज हो या खाद्यान्नों के बीज। बीज को महत्व को जानने के बाद कृषकों में यह आम बात होती है कि रिश्तेदार आंध्रप्रदेश गये अच्छी फसल देखी और उसका बीज ले आये इस बात पर अब पूर्ण विराम की आवश्यकता है क्योंकि प्रदेश की ही नहीं भारतीय शासन भी इस बात से चिंतित है कि बीज इधर-उधर से लाकर लगाना एक अपराध ही माना जाये। वर्तमान में चूंकि लाभकारी खेती कम लागत में अधिक उत्पादन के उपाय किये गये हंै क्योंकि बीज एक ऐसा आदान है जो सबसे महंगा पड़ता है इस आदान का खर्च घटाने के उद्देश्य से केन्द्र तथा राज्य सरकारों द्वारा विभिन्न प्रयास किये जा रहे हैं। बीज ग्राम योजना इस बात का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है दूसरा कृषकों को यह सलाह भी दी जा रही है कि आधार बीज को एक बार कम मात्रा में खरीदें वह महंगा होता है इस बीज को उच्च कोटि के प्रबंध देकर उसकी बुआई से लेकर कटाई तक नियंत्रित दिशा में लगाया जाये। बीज की ‘डिबलिंगÓ हाथ में बुआई कतारों में करने से भरपूर अंकुरण मिलेगा थोड़ी जगह में खाद/पानी/उर्वरक तथा दवाईयों को समय से प्रबंध करके इस बीज को बढ़ाया जाये तथा आने वाले साल में इसको बड़े क्षेत्र में बोया जाये तब यदि अतिरिक्त बीज है तो पड़ोसी कृषकों को बीज अदला-बदली कार्यक्रम के समान बांटा जाये यह कार्य एक पवित्र तथा सेवा की दृष्टि से महान कार्य होगा। कृषक जगत में स्वयं का बीज बनाने पर तथा लगाकर बीज के मद में पैसा बचाने के लिये मार्गदर्शक देने के लिये रोगिंग तथा फसलों से अच्छा गुणवत्तायुक्त उत्पादन करने के लिये मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है। एक बार यदि बीज के मद में जैसा बचाया जाने लगे तो लाभकारी खेती की दिशा में एक सशक्त कदम होगा। बीज फसल की आत्मा है यदि वह कमजोर रहा तो लक्षित उत्पादन की विचारधारा धरी की धरी रह जायेगी। स्वस्थ बीज स्वस्थ मृदा रोगों का संयोग हो तो फसल ‘फेल कदापिÓ नहीं होगी। इस वर्ष रबी में मार्च तक प्रकृति आपदा सामने आती रही इस कारण बीज में नमी का प्रतिशत बराबर अधिक रहने की संभावनायें पैदा हो चुकी हंै इस कारण जो आपको आने वाले वर्ष में बीज बनाना है उसको धूप में सुखायें जब नमी बिल्कुल कम हो जाये तब ही भंडारण अलग से करें। इस अनाज को समय-समय पर कीटों के प्रकोप खासकर धूप के प्रकोप से बचाने के उपाय भी करें और अच्छे बीज से लक्षित उत्पादन का लक्ष्य प्राप्त करें।

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