दुबई पहुंचा यूपी का दशहरी-लंगड़ा आम, समुद्री रास्ते से भेजी गई 12.5 टन खेप; किसानों को ₹20 प्रति किलो तक मिला अतिरिक्त फायदा
23 जुलाई 2026, नई दिल्ली: दुबई पहुंचा यूपी का दशहरी-लंगड़ा आम, समुद्री रास्ते से भेजी गई 12.5 टन खेप; किसानों को ₹20 प्रति किलो तक मिला अतिरिक्त फायदा – भारत के ताजे आमों के निर्यात क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। उत्तर प्रदेश के अमरोहा से 12.5 टन प्रीमियम दशहरी और लंगड़ा आमों की पहली सफल व्यावसायिक खेप समुद्री मार्ग के जरिए संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के दुबई पहुंचाई गई है। यह खेप 40 फुट के रेफ्रिजरेटेड कंटेनर में भेजी गई, जिसके लिए आईसीएआर-केंद्रीय उपोष्णकटिबंधीय बागवानी संस्थान (आईसीएआर-सीआईएसएच), लखनऊ और कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीईडीए) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित समुद्री निर्यात प्रोटोकॉल का उपयोग किया गया। इस सफलता से आम उत्पादकों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।
यह खेप अमरोहा स्थित शहनाज़ एक्सपोर्ट ने अत्ताशी ग्लोबल के सहयोग से यूएई की प्रमुख रिटेल चेन लुलु ग्रुप को निर्यात की। पूरे अभियान में आईसीएआर-सीआईएसएच ने तकनीकी मार्गदर्शन दिया, जबकि एपीईडीए ने आवश्यक सहयोग प्रदान किया। यह उत्तर प्रदेश से दुबई तक दशहरी और लंगड़ा आमों की पहली सफल व्यावसायिक समुद्री खेप मानी जा रही है।
वैज्ञानिक तकनीक से बढ़ी आमों की शेल्फ लाइफ
आमों की तुड़ाई 22 जून 2026 को की गई थी। इसके बाद फलों का वैज्ञानिक तरीके से तुड़ाई उपरांत प्रबंधन किया गया। आईसीएआर-सीआईएसएच द्वारा विकसित ‘मेटवॉश’ तकनीक से आमों का उपचार कर उनकी शेल्फ लाइफ बढ़ाई गई। इसके बाद वैज्ञानिक मानकों के अनुसार ग्रेडिंग और पैकिंग अमरोहा के पैक हाउस में की गई तथा उन्हें 40 फुट के रेफ्रिजरेटेड कंटेनर में लगातार कोल्ड चेन बनाए रखते हुए समुद्री मार्ग से दुबई रवाना किया गया।
25 दिन के सफर के बाद भी 90% आम बिकने योग्य मिले
पश्चिमी विक्षोभ के कारण जहाज के संचालन में हुई देरी की वजह से खेप 17 जुलाई 2026 को दुबई पहुंची। तुड़ाई से लेकर बाजार तक कुल 25 दिनों का समय लगा। लंबी यात्रा के बावजूद लगभग 90 प्रतिशत आम अच्छी गुणवत्ता और बिक्री योग्य स्थिति में पाए गए। यह परिणाम समुद्री निर्यात के लिए विकसित भारतीय तकनीक की सफलता को दर्शाता है।
किसानों को मिला प्रति किलो ₹15-20 तक अतिरिक्त लाभ
समुद्री मार्ग से निर्यात हवाई माल ढुलाई की तुलना में काफी सस्ता साबित हुआ। कम परिवहन लागत का सीधा लाभ किसानों को मिला। निर्यातकों ने किसानों से आम अधिक कीमत पर खरीदे, जिससे उन्हें पारंपरिक निर्यात व्यवस्था की तुलना में प्रति किलोग्राम लगभग ₹15 से ₹20 तक अतिरिक्त आय प्राप्त हुई। इससे आम उत्पादकों की आमदनी बढ़ने के साथ भारतीय आमों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा भी मजबूत हुई है।
निर्यात के नए अवसर खुलेंगे
आईसीएआर-सीआईएसएच और एपीईडीए के अनुसार, इस सफल समुद्री निर्यात प्रोटोकॉल से उत्तर प्रदेश सहित देश के अन्य आम उत्पादक राज्यों से समुद्री मार्ग के जरिए बड़े पैमाने पर आमों का निर्यात बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ है। इससे खाड़ी देशों समेत अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय आमों की पहुंच बढ़ेगी, निर्यात लागत घटेगी, किसानों की आय में वृद्धि होगी और भारत के ताजे फलों के निर्यात को नई गति मिलेगी।
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