केंद्रीय बजट 2026–27: खाद सुरक्षा और घरेलू उत्पादन को मज़बूत करने के लिए FAI की सरकार से अहम मांगें
30 जनवरी 2026, नई दिल्ली: केंद्रीय बजट 2026–27: खाद सुरक्षा और घरेलू उत्पादन को मज़बूत करने के लिए FAI की सरकार से अहम मांगें – केंद्रीय बजट 2026–27 से पहले, द फर्टिलाइज़र एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FAI) ने सरकार से अपील की है कि देश में खाद की उपलब्धता, संतुलित पोषण और घरेलू खाद उद्योग को मज़बूत करने के लिए ठोस नीतिगत और वित्तीय कदम उठाए जाएँ।
FAI ने कहा कि वर्ष 2024–25 में भारत ने 358 मिलियन टन का रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन किया है, जिसमें खाद की अहम भूमिका रही है। आने वाले वर्षों में इस उत्पादन को बनाए रखने के लिए ज़रूरी है कि खाद का सही और संतुलित उपयोग हो, आधुनिक खेती तकनीकों को बढ़ावा मिले और किसानों व उद्योग दोनों के लिए नीतियाँ स्थिर और भरोसेमंद हों।
वैश्विक बाजार की अनिश्चितता से बढ़ी खाद की लागत
FAI के अनुसार, रॉक फॉस्फेट, फॉस्फोरिक एसिड, अमोनिया, पोटाश और सल्फर जैसे खाद के कच्चे माल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। इसका कारण वैश्विक तनाव, आपूर्ति श्रृंखला में रुकावट और कुछ देशों द्वारा निर्यात पर रोक है। इससे खाद बनाने की लागत बढ़ी है और आयात पर निर्भरता भी बढ़ी है।
हालाँकि सरकार ने मोरक्को, सऊदी अरब और कतर जैसे देशों से समझौते कर खाद की उपलब्धता सुनिश्चित की है, लेकिन वैश्विक बाजार की अनिश्चितता के कारण उद्योग में नए निवेश को लेकर चिंता बनी हुई है।
किसानों और उद्योग के बीच संतुलन ज़रूरी: FAI
FAI के महानिदेशक डॉ. सुरेश कुमार चौधरी ने कहा कि खाद सुरक्षा तभी संभव है जब किसानों को उचित कीमत पर खाद मिले, उद्योग आर्थिक रूप से मज़बूत रहे और नए निवेश लगातार होते रहें। इसके लिए सब्सिडी व्यवस्था में स्पष्टता, करों में संतुलन और समय पर नीतिगत फैसले बेहद ज़रूरी हैं।
उन्होंने कहा कि अगर खाद कंपनियाँ आर्थिक रूप से मजबूत रहेंगी, तभी किसानों तक समय पर खाद पहुँचाई जा सकेगी।
देश में खाद उत्पादन बढ़ाने पर ज़ोर
FAI ने सरकार से देश में फॉस्फेट और पोटाश आधारित खाद के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने की माँग की है। इसके तहत नई फैक्ट्रियाँ, बैकवर्ड इंटीग्रेशन प्रोजेक्ट्स और विदेशों में कच्चे माल के रणनीतिक निवेश को प्रोत्साहन देने की बात कही गई है। यह कदम आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया के लक्ष्य को भी मज़बूत करेगा।
इसके साथ ही एसिड और कॉम्प्लेक्स खाद संयंत्रों को आधुनिक बनाने, ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और पर्यावरणीय समस्याओं को कम करने के लिए प्रोत्साहन देने की जरूरत बताई गई है। फॉस्फो-जिप्सम जैसे उप-उत्पादों के उपयोग को निर्माण, मिट्टी सुधार और उद्योग में बढ़ावा देने पर भी ज़ोर दिया गया है।
कर और GST व्यवस्था में सुधार की मांग
FAI ने खाद उद्योग पर पड़ने वाले कर बोझ को कम करने की भी मांग की है। इसमें अमोनिया, फॉस्फोरिक एसिड, सल्फ्यूरिक एसिड, रॉक फॉस्फेट और सल्फर जैसे कच्चे माल पर कस्टम ड्यूटी घटाने या हटाने, एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर सेस में राहत और उलटी GST संरचना से जुड़ी समस्याओं के समाधान की बात शामिल है।
इसके अलावा रिसर्च, किसान प्रशिक्षण, ऊर्जा-कुशल मशीनों और डाउनस्ट्रीम परियोजनाओं को टैक्स में अतिरिक्त छूट देने की भी सिफारिश की गई है।
संतुलित खाद उपयोग से ही मिट्टी बचेगी
FAI ने कहा कि यूरिया और फॉस्फेट-पोटाश खाद की कीमतों में अंतर के कारण खेतों में असंतुलित खाद उपयोग बढ़ रहा है, जिससे मिट्टी की सेहत खराब हो रही है। इसे सुधारने के लिए यूरिया को न्यूट्रिएंट-बेस्ड सब्सिडी के दायरे में लाने, जैव-खाद, नई तकनीक वाली खाद और समेकित पोषण प्रबंधन को बढ़ावा देने की जरूरत है।
PM-PRANAM जैसी योजनाएँ किसानों को संतुलित और टिकाऊ खेती की ओर प्रेरित कर सकती हैं।
बजट से किसानों को राहत की उम्मीद
FAI को उम्मीद है कि अगर सरकार केंद्रीय बजट 2026–27 में इन सुझावों पर ध्यान देती है, तो खाद की लागत नियंत्रित रहेगी, घरेलू उद्योग मजबूत होगा, विदेशों पर निर्भरता घटेगी और किसानों को समय पर खाद मिलती रहेगी। इससे देश की खेती और खाद्य सुरक्षा को लंबी अवधि में मजबूती मिलेगी।
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